बना हुआ है इस्लामिक स्टेट का ख़तरा: यूएन रिपोर्ट

11 फ़रवरी 2019

पिछले साल इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा किए जाने वाले हमलों में कमी आने के बावजूद वैश्विक सुरक्षा को ख़तरा बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दिखाती है कि अब आईएस एक गुप-चुप ढंग से काम करने वाले आतंकवादी नेटवर्क में तब्दील हो गया है लेकिन हिंसक चरमपंथ की चुनौती देशों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है.  

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक कार्यालय (UNOCT) के प्रमुख व्लादीमीर वोरोनकोफ़ ने बताया, "गुपचुप ढंग से और स्थानीय स्तर पर की जाने गतिविधियों के बावजूद, केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव अब भी बना हुआ है. अब भी वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमले करना चाहते हैं और इस नज़रिए से गुट के मक़सद को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं. "

"संघर्षग्रस्त इलाक़ों से लौटकर घर वापस जा रहे या जेल से छूटकर आने वाले लड़ाकों की वजह से चुनौती और बढ़ गई है. हिरासत में लिए गए लड़ाकों की संख्या बढ़ रही हैऔर जेल में उन्हें और कट्टरपंथ का शिकार होने से बचाना और देखरेख करना एक बड़ी चुनौती बन कर उभरा है."

वोरोनकोफ़ के मुताबिक़ हताश होकर यात्रा करने वाले लड़ाके ख़तरे की जटिलता को और बढ़ा रहे हैं. ये वो लड़ाके हैं जो युद्ध भूमि तक नहीं पहुंच पाए और उन्हें आईएस कमांडरों ने कहीं और भेज दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएस का मुख्य केंद्र अब भी सीरिया और इराक़ में है जहां 18 हज़ार लड़ाके हैं. इनमें तीन हज़ार से ज़्यादा विदेशी शामिल हैं. 

"ज़मीन खोने की वजह से आईएस को राजस्व के मामले में कुछ नुक़सान हुआ है लेकिन अब भी अभियान चलाने में उसे धन का सहारा मिल रहा है. रिज़र्व में उसके पास 5 से 30 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है. ये पैसा आपराधिक गतिविधियों के सहारे जुटाया गया है." मोसुल और राक्क़ा में खदेड़ दिए जाने के बाद पूर्वी सीरिया में आईएस लड़ाके एक छोटे से इलाक़े में एकत्र हैं और वहां अमेरिकी समर्थित विरोधी गुटों से घमासान जारी है. 

इस्लामिक स्टेट पर यह आठवीं रिपोर्ट है जिसे संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक कार्यकारी निदेशालय और अन्य संगठनों की ओर से तैयार किया गया है.

यूएन विश्लेषण से पता चलता है कि सदस्य देशों को आईएस के ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है और इसका स्तर बढ़ रहा है. ख़तरा विशेष रूप से उत्तर, पश्चिम, पूर्वी अफ़्रीका और मध्य एशिया में है. अफ़ग़ानिस्तान और दक्षिण पूर्वी एशिया में प्रशिक्षण शिविरों का पता चला है जहां महिलाओं और युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा है. 

पिछले कईं सालों में यूएन ने पुराने लड़ाकों को सज़ा दिलाने में, समाज में उन्हें फिर बसाने और अन्य कार्यों में सदस्य देशों को सहायता मुहैया कराई है. यह मदद अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग, आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग की रोकथाम, सीमा प्रबंधन और क़ानून का राज स्थापित करने और आतंकवादी के प्रति माहौल बनाकर हिंसक चरमपंथ का मुक़ाबला करने के तौर पर दी गई है. 

वोरोनकोफ़ ने कहा, "महासचिव ने ज़ोर देकर कहा है कि इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ हाल के दिनों में मिली सफलता के बावजूद वापस लौट रहे लड़ाकों से ख़तरा बना हुआ है. उन से भी जो आईएस से प्रेरित होते हैं. इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए."

 

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