टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी ज़रूरी

11 फ़रवरी 2019

विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों और करियर विकल्पों में  महिलाओं और लड़कियों की संख्या बढ़ाना बेहद अहम है और इससे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर कहा है कि दुनिया की आधी आबादी को इन क्षेत्रों में उनकी भागीदारी और उनके अहम योगदान से वंचित नहीं रखा जा सकता.

11 फ़रवरी को विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने का  प्रयास किया जा रहा है. यूएन महासचिव ने अपने संदेश में कहा कि लड़कियों और महिलाओं को समुचित प्रतिनिधित्व अब भी नहीं मिल पा रहा है. इसकी वजहों में घिसी पिटी लैंगिक मान्यताएं और प्रोत्साहन देने वाले वातावरण का अभाव  शामिल हैं.

इन बाधाओं से पार पाने के लिए उन्होंने सामूहिक प्रयास किए जाने, लड़कियों की क्षमताओं के बारे में कायम ग़लत धारणाओं को दूर करने और पढ़ाई के साधन और अवसर सुलभ कराने का आग्रह किया है. इस साल अंतरराष्ट्रीय दिवस की विषय वस्तु "समावेशी हरित विकास के लिए लड़कियों और महिलाओं में निवेश" है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक कार्यक्रम में विशेषज्ञ, विज्ञान आधारित टिकाऊ विकास से जुड़े कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव की चर्चा करेंगे. 

महिलाओं के लिए काम करने वाली यूएन संस्था (UN Women) और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने साझा बयान जारी कर बताया है कि किन कदमों के तहत विज्ञान में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व को दूर करने के लिए प्रयास हो रहे हैं. इनमें L’Oréal-UNESCO For Women in Science Programme,  Organization for Women in Science for the Developing World, और STEM and Gender Advancement project जैसी पहल शामिल हैं.

दुनिया को विज्ञान और विज्ञान को महिलाओं की ज़रूरत

तेज़ी से बदलती दुनिया में विज्ञान की शिक्षा की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता. एक अनुमान के मुताबिक़ भविष्य में 90 फ़ीसदी नौकरियां ऐसी होंगी जिसमें किसी न किसी रूप में सूचना और संचार तकनीक का ज्ञान होना आवश्यक होगा.

साथ ही विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नौकरियों के अवसर पैदा हो रहे हैं. हाल के कुछ अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि पांच करोड़ से ज़्यादा नए रोज़गार के अवसर डाटा विश्लेषण, सॉफ़्टवेयर डवेलेपमेंट और डाटा विज़ुवलाइज़ेशन से संबंधित हैं. 

लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं की उचित संख्या अब भी नहीं है. यूनेस्को के आंकड़े दिखाते हैं कि आगे पढ़ाई के लिए एक तिहाई से भी कम लड़कियां STEM से जुड़े विषयों को चुनती हैं. सिर्फ़ तीन फ़ीसदी महिलाएं सूचना और संचार तकनीक के विषयों को चुनती हैं.

आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (एआई) या कृत्रिम बुद्धिमता की अहमियत दिनोंदिन बढ़ रही है और इससे जुड़ी तकनीकों को पूर्वाग्रहों से मुक्त रखने के लिए एआई पर काम करने वाले लोगों में विविधता होना ज़रूरी है. लेकिन विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबर जैंडर रिपोर्ट बताती है कि एआई तकनीकों पर कुल पेशेवरों का सिर्फ़ 22 फ़ीसदी ही महिलाएं हैं. 

विज्ञान में लड़कों और लड़कियों के बीच खाई पैदा होने के कईं कारण हैं. लड़कों की पढ़ाई को प्राथमिकता दिया जाना, लैंगिक पूर्वाग्रह और घिसी-पिटी मान्यताएं और वैश्विक डिजिटल डिवाइड जिससे महिलाएं कहीं ज़्यादा प्रभावित हैं. इन्हीं चुनौतियों का सामना करने के लिए पिछले एक दशक में इस सिलसिले में ठोस प्रयास हो रहे हैं और लड़कियों और महिलाओं की स्कूल तक पहुंच को सुलभ बनाया जा रहा है. 

लड़कियों को विज्ञान पंसद नहीं हैं, ऐसी धारणाओं और घिसी-पिटी मान्यताओं को दूर करने की आवश्यकता है. साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण में, अभिनव और लैंगिक भिन्नताओं और ज़रूरतों को समझने वाली तकनीकों में निवेश वर्तमान रूझानों को बदल सकता है.