भाड़े के सैनिकों की गतिविधियों पर लगाम कसने की ज़रूरत पर ज़ोर

4 फ़रवरी 2019

भाड़े के सैनिकों की बढ़ती गतिविधियों के कारण विश्व शांति और सुरक्षा के लिए पनपते ख़तरों और लोगों को संरक्षण देने की देशों की कमज़ोर होती क्षमताओं को देखते हुए सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बैठक में उन्हें अफ़्रीका में अस्थिरता का बड़ा कारण बताया. 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बैठक में अपने संबोधन में कहा, “ प्राचीन काल से मध्य काल और वर्तमान समय तक, पैसे या किसी और इनाम के लोभ में लड़ने वाले लगभग हमेशा ही युद्ध के मैदान में मौजूद रहे हैं.” उनके मुताबिक़ भाड़े के सैनिकों की छद्म गतिविधियां पिछले कईं वर्षों से विकसित होती रही हैं.

“आज वे पारदेशीय संगठित अपराध, आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद जैसी अन्य समस्याओं का नाजायज़ लाभ उठा रहे हैं और उन्हें बढ़ावा भी दे रहे हैं."  इस बैठक का आयोजन फ़रवरी के लिए परिषद कीअध्यक्षता संभाल रहे इक्वेटोरियल गिनी ने किया था.

गुटेरेश ने कहा कि अफ़्रीका में उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए “रोकथाम करने से लेकर दंड देने और भाड़े के सैनिकों की गतिविधियों का असर कम करने से लेकर उन्हें जन्म देने वाले मूल कारणों का समाधान करने तक सभी प्रकार की कार्रवाई करनी होगी.”

साहेल, आइवरी कोस्ट, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, कैमरून और इक्वेटोरियल गिनी में भाड़े के सैनिकों की गतिविधियों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए यूएन महासचिव ने कहा कि उनका सामना करने के लिए क़ानूनी तंत्रों और दायरों को मज़बूत करने सहित अन्य ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है.

गुटेरेश ने संकल्प लिया कि मध्य अफ़्रीका के लिए यूएन क्षेत्रीय कार्यालय और अफ़्रीका में शांति एवं निरस्त्रीकरण के लिए यूएन क्षेत्रीय केन्द्र, अफ़्रीकी संघ के ‘साइलेंसिंग द गन बाई 2020’ एजेंडा को आगे बढ़ाने में मदद करते रहेंगे.

उन्होंने मिले-जुले सीमा आयोगों, संयुक्त सीमा सुरक्षा निगरानी तंत्रों और राष्ट्रीय रक्षा सेनाओं के बीच गुप्तचर सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अफ़्रीकी संघ, मध्य अफ़्रीकी देशों के आर्थिक समुदाय और क्षेत्र के देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को अत्यंत ज़रूरी बताया. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि युवाओं के लिए अवसर पैदा करना बेहद आवश्यक है ताकि भाड़े के लड़ाकुओं की ओर से मिलने वाले प्रलोभनों और विद्रोही बनने की गुंजाइश को कम किया जा सके. उनके मुताबिक़ टिकाऊ विकास लक्ष्य इस दिशा में और अन्य प्रयासों में मददगार हो सकते हैं.

अफ़्रीकी संघ की अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील

आदिस अबाबा से टेलीकान्फ़्रेसिंग के ज़रिए अफ़्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष मूसा फ़की महामत ने याद दिलाया कि 1960 के दशक से महाद्वीप का इतिहास “ तख्ता पलट सहित अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों, सशस्त्र संघर्षों में दखल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़े की कोशिशों में भाड़े के लड़ाकुओं का हाथ होने की घटनाओं से भरा पड़ा है.

इतने वर्षों में भाड़े के सैनिकों से निपटने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद उनकी गतिविधियां जारी हैं जिससे अफ़्रीकी देशों का सामंजस्यपूर्ण विकास ख़तरे में रहा है. उन्होंने कहा, “ज़ाहिर है कि हमें अंतरराष्ट्रीय समझौतों को मज़बूत करना होगा क्योंकि उनका इससे संबंध है.”

फ़की महामत ने कहा कि संघर्ष से उबरते देशों में निरस्त्रीकरण, सैनिकों को मोर्चों से हटाने और समाज में फिर शामिल करने की आवश्यकता पर बल देना भी उतना ही आवश्यक है. पहले से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील के साथ उन्होंने अपनी बात समाप्त की. 

इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति थियोदोर ओबियांग एंगुमा म्बोसोगो ने कहा कि आज़ादी के 50 वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी अधिकांश अफ़्रीकी देशों ने अभी तक शांति या सामाजिक-आर्थिक विकास का अनुभव नहीं किया है हालांकि “उनमें प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण आर्थिक विकास की बहुत अधिक गुंजाइश है. “अफ़्रीका आज भी सबसे कम विकसित महाद्वीप है और उसके विकास में देरी के लिए भाड़े के लड़ाकू भी ज़िम्मेदार हैं.”

रवांडा के राष्ट्रपति पॉल किगामी की ओर से वहां के विदेश मंत्री रिचर्ड सेज़ीबेरा ने अफ़्रीका में भाड़े के सैनिकों की गतिविधियों का इतिहास ध्यान दिलाते हुए कहा कि वे  “सदस्य देशों की स्वतंत्रता, प्रभुसत्ता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं.”

उन्होंने कहा कि भाड़े के लड़ाकुओं की 1977 की परिभाषा आज सही नहीं है क्योंकि आज वे राष्ट्रीय सीमाओं से परे आतंकवादी नेटवर्कों से भी जुड़े हैं. रवांडा भी इस समस्या से अछूता नहीं है.

“आज भाड़े के लड़ाकू सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं हैं, हम देख रहे हैं कि वे घर बैठे-बैठे ज़्यादा से ज़्यादा साइबर हमलों और औद्योगिक जासूसी जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं.” उन्होंने बताया कि जिस तरह से वे नए-नए तरीके अपना रहे हैं उसे देखते हुए “हमें जवाबी कार्रवाई के पुराने तरीकों तक सीमित रहने के बजाय उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए मौजूदा कानूनी साधनों को उन्नत करना होगा.”