पेटेंट आवेदनों में बढ़ोत्तरी तकनीकी क्षेत्र में छलांग का संकेत

31 जनवरी 2019

आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (एआई) या कृत्रिम बुद्धिमता से चलने वाली मशीनों और यंत्रों के लिए पेटेंट आवेदनों में पिछले पांच सालों में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में ये नई खोजें तकनीक की दुनिया से बाहर रोज़मर्रा के जीवन में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं.

एआई के ज़रिए मशीनों में  तकनीक के माध्यम से मानवीय बुद्धिमता विकसित की जाती है और इसका परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है.  विश्व बौद्धिक संपदा संगठन  (WIPO) के मुताबिक़ एआई पर होने वाले कुल पेटेंट में से 50 फ़ीसदी – डेढ़ लाख से ज़्यादा पेटेंट - सिर्फ़ 2013 के बाद से प्रकाशित हुए हैं. 2001 में एआई पर शोध पर वैज्ञानिक प्रकाशनों में शुरुआती वृद्धि के बाद अब फिर यह बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. 

संगठन के महानिदेशक फ्रांसिस गरी ने जिनिवा में पत्रकारों को बताया कि यह एक ध्यान खींचने वाला तथ्य है. “2013 के बाद से ज़बरदस्त उछाल रहा है और इस समय हम देख रहे हैं कि यह तेज़ी से आगे बढ़ता क्षेत्र है.”

मशीनी समझ का बढ़ता दबदबा

एआई के लिए पेटेंट आवेदनों में संख्या की दृष्टि से मशीन लर्निंग से जुड़ी तकनीकों का दबदबा है जिनके तहत उदाहरण के तौर पर ऐसी एप्लीकेशन विकसित की जाती हैं जिससे टैक्सी सेवाओं और रास्तों की जानकारी दिया जाने को सुगम बनाया जा सके. लेकिन जिस क्षेत्र में शोध सबसे तेज़ी से आगे बढ़ रहा है वह डीप लर्निंग है जो वाणी की पहचान (speech recognition) करने के काम में आती है.

 

डीप लर्निंग में 2013 से 2016 तक पेटेंट आवेदनों में 175 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ जबकि इस दौरान सभी पेटेंट आवेदनों की संख्या में कुल उछाल औसतन 33 फ़ीसदी रहा. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एआई पर पेटेंट के आवेदन होने वाले देशों में अमेरिका और चीन आगे हैं.

वहीं कंपनियों में अमेरिकी कंपनी आईबीएम पेटेंट आवेदनों की संख्या में पहले (8,290) है जबकि माइक्रोसॉफ़्ट दूसरे स्थान (5,930) पर है. तीसरे स्थान पर जापान की तोशिबा कंपनी है जिसने 5,223 पेटेंट आवेदन किए और वह दक्षिण कोरिया की सैमसंग (5,102) और जापान की ही एनईसी ग्रुप (4,406) से आगे है. चीन की इस क्षेत्र में बढ़ती भूमिका इस बात से भी साबित होती है कि एआई पेटेंट के मामले में प्रमुख 20 संस्थानों में 17 चीन से हैं जबकि 20 प्रमुख वैज्ञानिक प्रकाशनों में 10 चीनी हैं

सैन्य और आर्थिक आयाम

महानिदेशक गरी ने बताया कि आने वाले सालों में एआई तकनीकों का सैन्य और आर्थिक क्षेत्र में इस्तेमाल बढ़ेगा. इसके चलते उन्होंने बौद्धिक संपदा से जुड़े क़ानूनी और नैतिक मुद्दों पर सदस्य देशों में विमर्श की ज़रूरत पर बल दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई क्रांति में इंटरनेट सर्च इंजनों जैसे गूगल और बाइडू (चीन) ने अहम भूमिका निभाई है और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास बड़ी मात्रा में डाटा था.

अभिनव तकनीकों की खोज के लिए सरकार से समर्थन भी एक वजह है कि कुछ देश इस क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़े हैं. यूरोप में सांस्कृतिक और भाषाई विविधता बड़े पैमाने पर डाटा एकत्र करने में आड़े आती है और मशीन लर्निंग में बेहतर परिणाम के लिए डाटा का होना ज़रूरी होता है.

जब गरी से पूछा गया कि इन तकनीकों के होने से क्या दुनिया बेहतर हुई है तो उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि तकनीक उदासीन है और यह निर्भर करता है कि आप उसके साथ क्या करते हैं. इससे स्वचालित हथियार भी बनाए जा सकते हैं जो हम सबको मार सकते हैं तो यह अच्छी ख़बर नहीं है. लेकिन फ़िलहाल यह स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और बीमारियों का पता लगाने में इस्तेमाल हो रही है, यह शानदार ख़बर है.”