'सबसे घातक समुद्री रास्ते' में हर दिन 6 जानें गईं: यूएन रिपोर्ट

30 जनवरी 2019

सुरक्षित जीवन की तलाश में भूमध्यसागर  सागर को पार कर यूरोप पहुंचने की कोशिश करना सैकड़ों लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ.  संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में इसे दुनिया में सबसे घातक समुद्री रास्ता करार देते हुए कहा है कि पिछले साल हर दिन औसतन 6 लोगों की मौतें हुई.  

एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2018 में भूमध्यसागर पार करने की कोशिश कर रहे 2,275 लोग या तो डूब गए या फिर लापता हो गए. और यह ऐसे समय में हुआ जब यूरोप में शरण या काम की तलाश में आने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आई है. 2018 में 139,300 शरणार्थियों और प्रवासियों ने यूरोप का रुख़ किया जो पिछले पांच सालों में सबसे कम संख्या है. 

स्पेन में 65,400, ग्रीस में 50,500 और इटली में करीब 23 हज़ार लोग पहुंचे. 

एजेंसी के उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रान्डी ने कहा, "समुद्र में लोगों की जान बचाना कोई हमारे चुनने का विषय नहीं है और ना ही राजनीतिक मुद्दा है. यह सदियों पुराना दायित्व है.  साहस के साथ हम इन त्रासदियों को विराम दे सकते हैं और क्षेत्रीय सहयोग पर आधारित एक दीर्घकालीन रणनीति अपना सकते हैं जिसके केंद्र में मानवीय जीवन और गरिमा हो."

पिछले साल कुछ दक्षिणी यूरोपीय देशों ने अपनी नीतियों में बदलाव किए जिसके बाद से कई घटनाएं हुई हैं. लोग बीच समुद्र में कईं दिनों तक फंसे रहे क्योंकि उनकी नावों को आने की अनुमति नहीं दी गई. 

"बड़ी संख्या में हैरान-परेशान और बीमार लोगों के कईं दिनों तक समुद्र में फंसे रहने के बाद ही उन्हें आने की अनुमति दी गई. यह अनुमति तभी मिली जब बचाए गए लोगों में अधिकतर को कहीं और भेजे जाने का फ़ैसला कर लिया था."

यूरोप  पहुंचने का मुश्किलों भरा सफ़र

यूएन रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वैच्छिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और बचाव नौकाओं पर भी बंदिशें लगाईं जा रही हैं. लीबिया से यूरोप तक के सफ़र में औसतन 14 लोगों के सुरक्षित पहुंचने में 1 की जान गई है. 2017 की तुलना में यह संख्या बढ़ी है क्योंकि तब औसतन 38 लोगों के सुरक्षित पहुंचने में एक की जान जा रही थी.

शरणार्थी एजेंसी ने बताया कि लीबिया के तटरक्षक दलों ने 2018 में अपना अभियान तेज़ कर दिया जिसके चलते समुद्र में पकड़े गए अधिकतर लोगों को लीबिया में उतार दिया गया जहां हिरासत केंद्रों में उन्हें बेहद ख़राब स्थिति में रखा जाता है. 

ऐसे केंद्रों में भोजन की व्यवस्था ठीक नहीं है और बीमारियों के चलते कईं मौतें हो चुकी हैं. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की पड़ताल में भी ऐसी जानकारी सामने आई थी. लीबिया में पूर्व राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफ़ी को 2011 में हटाए जाने के बाद से देश में हिंसा और राजनीतिक उठापठक रही है और इस वजह से लोग सुरक्षित शरण की तलाश में माल्टा या इटली जाने का प्रयास करते रहेंगे. 

स्पेन पहुंचने वाले अधिकतर शरणार्थी मोरक्को और गिनी (13,000) से हैं जबकि इटली का रुख़ करने वाले ट्यूनीशिया (5,200) और एरिट्रिया (3,300) से आते हैं. ग्रीस पहुंचने वालों में अफ़गान नागरिक (9,000) बड़ी संख्या में हैं वहीं सीरियां से भी 7,900 लोग वहां पहुंचे. 

"यूरोप पहुंचने का सफ़र बुरे सपने जैसा है जिसमें लोगों को यातना, बलात्कार, यौन हिंसा, अपहरण और फ़िरौती जैसे ख़तरों से जूझना पड़ता है."  रिपोर्ट में अपील की गई है कि मानव तस्करी के नेटवर्क को ख़त्म कर दिया जाना चाहिए और दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए. 

लोगों को बचाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग के ज़रिए रास्ता निकाले जाने की प्रक्रिया में यूरोपीय देशों में राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है. कईं देश भूमध्य सागर में बचाए गए लोगों को पुनर्स्थापित करने के लिए संकल्पबद्ध हैं और रिपोर्ट में इसका स्वागत किया गया है. 

 

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