ग़ाज़ा में गहराते ईंधन संकट से मरीज़ों की मुश्किलें बढ़ीं

22 जनवरी 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि ग़ाज़ा में ईंधन संकट के चलते अस्पताओं में आपात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं जिससे मरीज़ों की जान को ख़तरा पैदा हो गया है.  संगठन ने स्थानीय प्रशासन और सभी पक्षों से अपनी ज़िम्मेदारी समझने और ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने की अपील की है. 

पश्चिमी तट और ग़ाज़ा में विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्यालय के प्रमुख जेराल्ड रॉकेनश्वॉब ने बताया, "ईंधन की ज़बरदस्त किल्लत है जिससे ग़ाज़ा के स्वास्थ्य सेवा तंत्र की क्षमता जवाब देने लगी है. दवाईयों, बिजली और अन्य ज़रूरी सामानों की कमी के चलते संघर्ष करना पड़ रहा है."

ग़ाज़ा में 14 सार्वजनिक अस्पताल हैं जो बिजली की किल्लत से होने वाली मुश्किलों को झेल रहे हैं. बचा कर भंडार में रखा गया ईंधन भी ख़़त्म हो रहा है. ईंधन भंडार की देखरेख का ज़िम्मा संयुक्त राष्ट्र के पास भी है लेकिन उन पर नियंत्रण इसराइल का है जिसने लगभग एक दशक से ग़ाज़ा की नाक़ेबंदी कर रखी है.

बिजली आपूर्ति में व्यवधान के चलते आपात सेवाओं के लिए बिजली मुहैया कराने के लिए जनरेटर का सहारा लिया जाता है और उसके लिए ईंधन चाहिए. 

"अस्पतालों में आपात परिस्थितियों के लिए भी ख़त्म होते ईंधन की समस्या से निपटने के लिए जल्द समाधान तलाशे जाने की ज़रूरत है नहीं तो मरीज़ों की जान ख़तरे में पड़ जाएगी."

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ जिन अस्पतालों पर ईंधन की किल्लत की मार ज़्यादा पड़ी है उन्होंने ऐहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं - एक्सरे, साफ़-सफ़ाई, कपड़े धोने, भोजन और कई अन्य सेवाओें को रोक दिया गया है. 

ग़ैरज़रूरी ऑपरेशन को टाला जा रहा है और डॉक्टर और अन्य कर्मचारी मरीज़ों को चेता रहे हैं कि आने वाले दिनों में कुछ सेवाओं को पूरी तरह बंद किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो इससे सैकड़ों मरीज़ बुरी तरह प्रभावित होंगे जिनमें वो नवजात शिशु और बच्चे भी शामिल हैं जिन्हें तत्काल आपात सेवाओं की ज़रूरत होती है.

"ग़ाज़ा में संकट से प्रभावित कई स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा करने और स्थिति का जायज़ा लेने के बाद हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और जीवनरक्षक सेवाओं को जारी रखने के लिए सामूहिक  प्रयास किए जाने चाहिए."

भंडार में रखा गया ईंधन कितने दिनों तक स्थानीय लोगों की मदद कर पाएगा यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ग़ाज़ा में बिजली व्यवस्थान कैसी रहती है. 

 

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