संयुक्त राष्ट्र की म्यांमार में शांतिपूर्ण समाधान की अपील

9 जनवरी 2019

म्यांमार के राखीन प्रांत में हथियारबंद गुटों और सुरक्षा बलों के बीच छिटपुट झड़पों को छोड़ कर बड़े पैमाने पर लड़ाई अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन सुरक्षा बलों का जमावड़ा लगातार बढ़ने से चिंतित संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी ने समस्या का शांतिपूर्ण ढंग से रास्ता तलाशे जाने की अपील की है.  

 

यूएन न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में म्यांमार में मानवीय मामलों के कार्यवाहक समन्वयक क्नयुट ओस्टबी ने दोहराया कि सभी पक्षों को मिल जुलकर स्थिति को सुलटाने का प्रयास करना चाहिए. साथ ही हिंसा से प्रभावित लोगों की मदद करने और हालात में सुधार के लिए उन तक पहुंच पाना आसान होना चाहिए.

हाल के कुछ हफ़्तों में हुई हिंसा से 4,500 लोग विस्थापित हुए हैं. म्यांमार प्रशासन ने अराकान सेना नामक गुट को कुचल डालने की अपनी मंशा ज़ाहिर की है जिससे हिंसा फिर भड़कने की आशंका बढ़ गई है. 

"मेरे हिसाब से बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू नहीं हुई है लेकिन सैन्य बलों का जमावड़ा बढ़ रहा है." ओस्टबी ने कहा कि पुलिस चेकपोस्ट पर हुए हमलों में 13 अधिकारियों के मारे जाने की घटना से उन्हें धक्का लगा है. 

उन्होंने कहा कि 2017 के बाद से ही राखीन प्रांत में हिंसा से प्रभावित समुदायों तक पहुंच पाना मुश्किल बना हुआ है. उस दौरान हुई हिंसा के चलते सात लाख से ज्यादा रोहिंज्या मुस्लिमों ने भागकर पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ले ली थी.  यूएन अधिकारी का कहना है कि अगर फिर से बड़े पैमाने पर लोंगों का पलायन होता है तो उसके लिए तैयारी फ़िलहाल नहीं है. 

"हमें चिंता है कि अगर लोग फिर से विस्थापित हुए और मानवीय सहायता की ज़रूरत पैदा हुई तो हम ठीक से मदद मुहैया नहीं करा पाएंगें." 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही सामुदायिक गुटों और म्यांमार प्रशासन के बीच रूक रूक कर झड़पें होती रही हैं. 

म्यांमार के उत्तरी और पूर्वी इलाक़ों में फ़िलहाल संघर्षविराम लागू है लेकिन इनमें राखीन प्रांत शामिल नहीं है. इससे चिंता है कि लड़ाई फिर से तेज़ हो सकती है जो आम लोगों के सामने फिर से दिक्कतें पैदा कर देगी. 

ओस्टबी ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र राखीन में स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार से लगातार संपर्क बनाए हुए है और मानवीय आधार पर और विकास के लिए काम करता रहेगा. 

 

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