'हिंसा और डराने धमकाने के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर हो कार्रवाई'

4 जनवरी 2019

बांग्लादेश चुनाव के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा से चिंतित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने  हिंसा में शामिल और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है. 30 दिसंबर को हुए चुनाव में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की जीत हुई लेकिन मतदान में धांधली के आरोप भी लगे. 

 

मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने बताया कि मतदान के दिन हुई हिंसा में लोगों के मरने और घायल  होने के बारे में उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली है.

"ऐसे चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं कि अब लोगों के ख़िलाफ़ बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है - ख़ास तौर पर विपक्षी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़. उन पर हमले हुए हैं, कईं को हिरासत में लिया गया है, मुक़दमे दर्ज हुए हैं जबकि कुछ ग़ायब कर दिए गए हैं. "

प्रवक्ता के मुताबिक़ सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता विपक्षियों को डराने धमकाने का काम कर रहे हैं और कई स्थानों पर हिंसक घटनाओं में भी शामिल हैं. कुछ मामलों में पुलिस की संलिप्तता की भी रिपोर्टें मिली हैं. मीडिया को डराने धमकाने की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से चुनाव की रिपोर्टिंग मुश्किल साबित हुआ है.

शमदसानी के अनुसार चुनावी कवरेज में जुटे दो पत्रकारों को डिजिटल सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया. आरोप हैं कि इस क़ानून के ज़रिए प्रेस स्वतंत्रता को दबाने के प्रयास हुए हैं. साथ ही 10 दिसम्बर से 54 वेबसाइटों पर लगा प्रतिबंध अभी तक नहीं हटाया गया है और इंटरनेट पर शिकंजा कसने के चलते अभिव्यक्ति की आज़ादी को भी ठेस पहुंची है. 

"ऐसे नियामक क़ानूनों में सुधार लाए जाने की ज़रूरत है  जिनके ज़रिए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और नागरिक समाज को स्वतंत्रता से काम करने से रोकने की कोशिश होती है."

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने स्थानीय प्रशासन से चुनावी हिंसा की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रभावी रूप से जांच कराने का आग्रह किया है. साथ ही दोषियों को सज़ा देने की मांग की गई है. उच्चायुक्त कार्यालय ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रोत्साहित करते हुए  स्वतंत्र भूमिका निभाने के लिए कहा है. 

 

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