मुश्किल समय में आशा की उजली किरण:यूएन महासचिव

31 दिसम्बर 2018

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कहा है कि दुनिया कई खतरों से जूझते हुए एक मुश्किल दौर से गुजर रही है .  पिछले साल 2018 के आगमन पर दिए अपने संदेश में जारी एक रेड अलर्ट की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उस समय की कई चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं लेकिन आशा का दामन थामे रखने के भी कई कारण हैं. 

जलवायु परिवर्तन पर विशेष रुप से ध्यान केंद्रित करते हुए महासचिव गुटेरेश ने कहा कि इससे उपजी चुनौतियों से निपटने में हम पिछड़ रहे हैं. साथ ही भूराजनैतिक मतभेद और गहरे हो रहे हैं जिससे संघर्ष और टकराव को सुलझा पाना कठिन होता जा रहा है.

"रिकॉर्ड संख्या में लोग सुरक्षा और सलामती की तलाश कर रहे हैं. असमानता बढ़ रही है और लोग एक ऐसी दुनिया पर सवाल उठा रहे हैं जिसमें महज चंद लोगों के पास दुनिया की आधी आबादी के बराबर संपत्ति है."

उन्होंने लगातार बढ़ रही असहिष्णुता और घटते विश्वास पर भी चिंता जताई. 

 

आशा की किरण

महासचिव ने अपने संदेश में हाल ही में हुए समझौतों का हवाला देते हुए संतोष व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए मुश्किलों से निपटा जा सकता है जिससे भविष्य के प्रति आशा बंधती है.   

"यमन वार्ता ने शांति को एक अवसर प्रदान किया है. सितंबर में इथियोपिया और एरिट्रिया के बीच रियाद में हुए समझौते से लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हुआ है और क्षेत्र में बेहतरी का रास्ता तैयार हुआ है."

उनके मुताबिक जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस समझौते के प्रभावी अमलीकरण के लिए कैटोविच सम्मेलन में सभी देशों को एक साथ लाने और कार्ययोजना तैयार करने में संयुक्त राष्ट्र सफल रहा है.

उन्होंने कहा, "अब हमें अपनी आकांक्षाओं को नई उड़ान देनी है ताकि हमारे अस्तित्व पर मंडराते इस खतरे से निपटा जा सके. हमारे पास यह अंतिम सर्वोत्तम अवसर है जिसे इस्तेमाल करने का समय आ गया है."

पिछले कुछ हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में प्रवासियों और शरणार्थियों के लिए अहम वैश्विक समझौते हुए जिससे लोगों की जान बचाने और मिथकों को तोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है. साथ ही टिकाऊ विकास लक्ष्यों के समर्थन में लोग हर जगह आगे आ रहे हैं. ये लक्ष्य धरती को बचाने और यहां शांति, न्याय और खुशहाली सुनिश्चित करने की रुपरेखा हैं.

महासचिव गुटेरेश ने जोर देकर कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलता है तो दुनिया की जीत होती है.

"नए साल की शुरुआत में आइए हम खतरों का सामना करने, मानव सम्मान की रक्षा करने और एक बेहतर भविष्य का निर्माण मिलजुलकर करने का संकल्प लें."