‘गांधी के रास्ते से निकलेंगे हल'

2 अक्टूबर 2018

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौक़े पर उम्मीद जताई है कि राजनेताओं और राजनीतिज्ञ लोगों की भलाई करने के लक्ष्य हासिल करने के लिए महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने और उनके सिद्धान्तों और मूल्यों को अपनाने की कोशिश करेंगे.

महासचिव ने दो अक्तूबर को महात्मा गांधी की जयन्ती के अवसर पर उन्हें एक महान आत्मा क़रार देते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष दो अक्तूबर को अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाता है और इस वर्ष महासचिव ने इस मौक़े पर भारत की यात्रा की.

एंतॉनियो गुटेरेश ने गांधी जयन्ती पर दिल्ली में राजघाट स्थित उनकी समाधि पर फूल चढ़ाए.

इस अवसर उन्होंने कहा, “आज अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस महात्मा गांधी नामक एक ऐसी आत्मा को श्रद्धांजलि दे रहा है जो बहुत महान थी. उनके जीवन ने ये मिसाल पेश की कि अहिंसा के ज़रिए महान लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है.”

“मैं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के रूप में ये उम्मीद करता हूँ कि विश्व में जो भी लोग राजनैतिक ज़िम्मेदारियाँ संभाले हुए हैं, वो महात्मा गांधी की तरह बनकर दिखाएंगे. उन्हें ये भी समझना होगा कि वो अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बातचीत, अहिंसा और सत्य के लिए प्रतिबद्धता व अपने लोगों की चौतरफ़ा भलाई करने का रास्ता अपनाएंगे.”

महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने कहा कि महात्मा गांधी हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं.

साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब जबकि आने वाला वर्ष महात्मा गांधी का 150 वाँ जयन्ती वर्ष मनाया जा रहा है तो ये वर्ष दुनिया भर में पूरी मानवता के लिए बहुत सार्थक साबित होगा.

अहिंसा प्रासंगिक

महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौक़े पर एक वक्तव्य जारी करके कहा कि हम इस मौक़े पर महात्मा गांधी के दर्शन और बुद्धिमत्ता की प्रासंगिकता की अहमियत समझते हैं.

Photo: Giles Clarke
महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश ने 2 अक्तूबर 2018 को महात्मा गांधी के जन्म दिन पर नई दिल्ली के राजघाट में उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की. 2019 में गांधी का 150वां जन्म दिन होगा

उन्होंने कहा कि आज के विश्व में मौजूद चुनौतियों और चल रहे संघर्षों को देखते हुए महात्मा गांधी का अहिंसा दर्शन प्रासंगिक तौर पर प्रेरणा स्रोत है.

संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में 2 अक्तूबर को अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रस्ताव पारित किया था.

ग़ौरतलब है कि 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी का जन्म दिन होता है और इसी सन्दर्भ में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस हर वर्ष 2 अक्तूबर को मनाया जाता है.

महासचिव ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा कि हिंसा से मुक्त विश्व और मतभेदों को अहिंसक तरीक़ों से हल किए जाने का संकल्प – ये मूल्य और सिद्धान्त संयुक्त राष्ट्र के कामकाज की बुनियाद परिभाषित और निर्धारित करते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जबकि दुनिया भर में असमानता बढ़ रही है और एक निष्पक्ष और न्यायसंगत वैश्वीकरण की बहुत ज़रूरत है तो हम महात्मा गाँधी की सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्धता को भी बहुत याद करते हैं.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि ऐसे में जबकि पूरी दुनिया टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अथक प्रयास कर रही है, साथ ही महिलाओं और पुरुषों के बीच अन्तर को समाप्त करने और एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश की जा रही है जहाँ कोई भी पीछे ना छूट जाए, तो मानव प्रतिष्ठा और सम्मान के लिए महात्मा गांधी का संकल्प और प्रतिबद्धता हमारा रास्ता रौशन कर सकती है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा…

“…महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, “अहिंसा इंसानों के पास एक महानतम शक्ति के रूप में मौजूद है.” संयुक्त राष्ट्र का चार्टर भी उस भावना को प्रतिबिम्बित करता है.

संयुक्त राष्ट्र के चैप्टर 6 में कहा गया है, शान्ति के लिए उत्पन्न होने वाले किसी भी ख़तरे का सामना करने के लिए “सर्वप्रथम” बातचीत, मध्यस्थता, सुलह-सफ़ाई, न्यायिक समाधान और अन्य शान्तिपूर्ण तरीक़े अपनाए जाएंगे.

महात्मा गांधी ने साबित करके दिखाया कि अहिंसा में इतिहास बदलने की क्षमता है.

आइए, हम सब शान्ति को बढ़ावा देने, टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने और दुनिया भर के तमाम लोगों के मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए महात्मा गांधी के साहस और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा हासिल करें.”

 

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