महिलाएं

कोविड-19: उबरने के प्रयासों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी ज़रूरी

ऐसे में जबकि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिये निर्धारित संसाधन भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में इस्तेमाल किये जा रहे हैं तो मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिये 25 वर्ष पहले तय किये गए लक्ष्यों को हासिल करने की रफ़्तार किस तरह तेज़ की जाए. इस चर्चा में सरकारों के प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी नेताओं, कम्पनियों के शीर्ध अधिकारियों और शैक्षिक विशेषज्ञों ने वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की.

भारत में बाल विवाह के चँगुल से निकल, शिक्षा का रुख़ करती लड़कियाँ

हाल ही में जारी हुई 2020 की विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बाल विवाह के प्रचलन की दर लगभग 21 प्रतिशत है और हर 5 में से 1 लड़की का विवाह 18 साल की उम्र से पहले ही कर दिया जाता है. भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के 2015-16 आँकड़ों के मुताबिक हर 4 में से लगभग 1 लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है. लेकिन अनेक भारतीय महिलाएँ ऐसी भी हैं जिन्होंने बाल विवाह की हानिकारक प्रथा के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलन्द की और शिक्षा व आत्मनिर्भरता को चुनकर अपना जीवन अपने दम पर जीने का रास्ता चुना.
 

कोविड-19: महिलाओं की समान भागीदारी से ही मज़बूत पुनर्बहाली सम्भव - ब्लॉग

लैंगिक असमानता की खाई पाटने और आर्थिक जीवन में महिलाओं के लिए समान भागीदारी के अवसरों को बढ़ावा देना कोविड संकट के बाद एक मज़बूत और अधिक समावेशी पुनर्बहाली के लिए अहम होगा. भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की उप-प्रतिनिधि, नादिया रशीद का ब्लॉग.

कोविड-19: महामारी के प्रकोप से उबरने में महिला नेतृत्व की महती भूमिका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण विश्व भर में स्वास्थ्य, मानवीय सहायता और विकास के लिए अभूतपूर्व संकट पैदा हुआ है लेकिन इस चुनौती से महिला नेतृत्व की शक्ति भी उजागर हुई है. संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव अमीना जे. मोहम्मद ने मंगलवार को विभिन्न क्षेत्रों, सैक्टरों और पीढ़ियों की प्रभावशाली महिलाओं के साथ एक वर्चुअल बैठक के दौरान यह बात कही है. 

भारत में कोरोना योद्धा - महामारी के दौरान मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल

कोविड-19 महामारी के कारण हुई तालाबन्दी से स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे  यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इन ठोस चुनौतियों के बावजूद, कई साहसी महिलाओं ने आगे आकर ये सुनिश्चित किया कि महामारी के दौरान महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों की उपेक्षा न हो पाए. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर, भारत की ऐसी ही कुछ महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सेवाओं की झलक, जो संकट के समय पूरी प्रतिबद्धता से अपना कर्तव्य निभा रही हैं. 
 

महिलाओं और लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य पर मँडराता ख़तरा

वैश्विक महामारी कोविड-19 सभी लोगों को प्रभावित कर रही है लेकिन इसका असर हर किसी पर एक जैसा नहीं है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार, 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोरोनावायरस संकट के कारण स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और महिलाओं व लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य  की उपेक्षा हो रही है जो गहरी चिन्ता का विषय है. 

महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ लैंगिक हिंसा का ख़ात्मा ज़रूरी

महिला पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशेष ख़तरों का सामना करना पड़ता है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया है कि सरकारों को महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए और अधिक क़दम उठाने की ज़रूरत है. 

भारत में 'तेजस्विनी' महिलाएँ

तेजस्विनी का मतलब है "कान्तिवान महिला." भारत के महाराष्ट्र राज्य में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनीं दस लाख महिलाएँ, वास्तव में सशक्त हैं, कान्तिवान हैं. आईएफ़एडी के महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम ‘तेजस्विनी’ के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय विकास, तकनीकी कौशल और वित्त में प्रशिक्षण दिया गया, जिससे इन महिलाओं ने अभूतपूर्व व्यावसायिक सफलता हासिल की है. अब कोविड-19 संकट के दौरान, ये महिलाएँ बदलती जरूरतों के अनुसार अपने कामकाज में बदलाव लाकर व्यवसायों को आगे बढ़ा रही हैं. देखिये वीडियो फ़ीचर...
 

हानिकारक कुप्रथाओं की शिकार हैं 14 करोड़ लड़कियाँ - साढ़े चार करोड़ भारत में

विश्व जनसंख्या स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2020 की एक प्रमुख रिपोर्ट में बाल विवाह, लिंग-पक्षपाती सैक्स चयन (लड़का-लड़की में भेद करके लड़कों को प्राथमिकता देना) और महिलाओं और लड़कियों को नुक़सान पहुँचाने वाली अन्य प्रथाओं को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है.

'यौन हिंसा क़तई बर्दाश्त नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न माहौल में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा और उनके साथ बलात्कार के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. पुरुषों और लड़कों को इस मुद्दे पर अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. आमिना जे मोहम्मद का वीडियो सन्देश...