महिलाएं

कोविड ने करोड़ों और बच्चों को अत्यन्त ग़रीबी में धकेला

संयुक्त राष्ट्र के एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कोरोनावायरस महामारी ने दुनिया भर में 15 करोड़ अतिरिक्त बच्चों को बहुआयामी ग़रीबी के गर्त में धकेल दिया है जिसके कारण वो शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पोषण, स्वच्छता और जल संसाधनों से वंचित हो गए हैं.

सुरक्षा परिषद का आग्रह - स्कूलों पर हमले बन्द हों

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने माँग करते हुए कहा है कि दुनिया भर में लड़ाई-झगड़ों, संघर्षों वाले व अशान्त स्थानों पर स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों पर हमले रोके जाने होंगे. ये माँग गुरूवार को जारी सुरक्षा परिषद के अध्यक्षीय वक्तव्य में  उठाई गई है जो हमलों से शिक्षा की सुरक्षा के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े से मेल खाती है.

बीजिंग सम्मेलन: 25 वर्ष बाद भी उस एक्शन मंच की महत्ता नहीं हुई है कम

महिलाओं की प्रगति और पुरुषों के साथ उनकी बराबरी सुनिश्चित करने के मुद्दे पर हुए ऐतिहासिक बीजिंग विश्व सम्मेलन को 25 वर्ष गुज़र जाने के बाद भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है. महिला प्रगति व सशक्तिकरण के लिये काम करने वाली यूएन संस्था – यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक फ़ूमज़िले म्लाम्बो न्गक्यूका ने शुक्रवार को ये बात ध्यान दिलाई. 

कोविड-19 से उबरने के प्रयासों में महिलाओं की है केन्द्रीय भूमिका

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि युवा महिलाओं को पर्यावरणीय, आर्थिक व नस्लीय न्याय के आपस में जुड़े मोर्चों पर जद्दोजहद करना पड़ रहा है. उप महासचिव ने गुरूवार को गोलमेज़ विचार-गोष्ठि की श्रृंखला दूसरी कड़ी में ये बात कही जिसमें मशहूर महिला अर्थशास्त्रियों ने शिरकत की. 

कोविड-19: महिलाएँ सर्वाधिक प्रभावित, चरम ग़रीबी मिटाने में हुई प्रगति पलटने का जोखिम

वैश्विक महामारी कोविड-19 और उसके सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव चार करोड़ 70 लाख महिलाओं को ग़रीबी के गर्त में धकेल सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को एक नई रिपोर्ट जारी की है जो दर्शाती है कि कोरोनावायरस संकट के कारण चरम ग़रीबी से निपटने में अब तक हुई दशकों की प्रगति की दिशा उलटने का ख़तरा पैदा हो गया है. यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि कोविड-19 से उबरने के दौरान पुनर्बहाली कार्रवाई और नीतिगत प्रयासों के केन्द्र में महिलाओं को रखना होगा. 

कोविड-19: महिलाओं व लड़कियों के लिये पीढ़ियों की प्रगति खो जाने का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के विनाशकारी सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से दुनिया भर में महिलाएँ व लड़कियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में वर्षों व कई पीढ़ियों से हो रही प्रगति को कोरोनावायरस संकट की भेंट ना चढ़ने देने के लिये व्यापक प्रयास करने की आवश्यकता होगी. 

कोविड 19: भारत में यूनीसेफ़ की मदद से बाल-विवाह रुके

कोविड-19 महामारी की अप्रत्याशित स्थिति ने बाल अधिकारों को दाँव पर लगा दिया है. मार्च 2020 से महामारी और तालाबन्दी के बाद उपजी विषम स्थिति के दौरान, भारत के बिहार राज्य के महादलित समुदायों में यूनीसेफ़ ने अब तक 25 बाल विवाह रोके हैं. लगभग सभी मामलों में, परिवार और बाल विवाह के सम्भावित शिकार बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहायता की गई व उनके परिजनों से बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए गए ताकि वे समय से पहले उन बच्चों की जबरन शादी न कराएँ. संवेदनशीलता के कारण सभी मामलों में दण्डात्मक कार्रवाई रोक दी गई. 

भारत में 'नई मंज़िल' से महिला सशक्तिकरण

विश्व बैंक की ऋण सहायता से भारत सरकार का अल्पसंख्यक कल्याण मन्त्रालय ‘नई मंज़िल’ नामक एक अनूठा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम चला रहा है. इसके तहत उन महिलाओं को  शिक्षा पूरी करने का अवसर व कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने में मदद की जा रही है जो  किन्हीं कारणों से शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं. विश्व बैंक की वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ मार्गेराइट क्लार्क और शिक्षा सलाहकार प्रद्युम्न भट्टाचार्जी का संयुक्त ब्लॉग.  

भारत में महिला सशक्तिकरण के लिये ‘दिशा’

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और आइकिया फाउण्डशन की ‘दिशा’ परियोजना के तहत दस लाख महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है. इसमें संरक्षकों का दल बनाकर, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रैज़िडेंट रैप्रैज़ेटेटिव, शोको नोडा की क़लम से...

जलवायु मुद्दे पर एकल शुरूआत ने खोले बदलाव के विशाल दरवाज़े

अमेरिका की एक 18 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सोफ़िया कियान्नी ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा है वो पर्यावरण रुचि नहीं रखने वाले हर व्यक्ति को जलवायु कार्यकर्ता के रूप में तब्दील कर देने की ख़्वाहिशमन्द हैं. सोफ़िया कियान्नी का परिवार मूलतः ईरान से है और वो ख़ुद उन सात युवाओं में शामिल हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.