महिलाएं

लैंगिक समानता की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) के 64वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा है कि बीजिंग में 25 वर्ष पहले लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण के जिस संकल्प को लिया गया था उसे असरदार और तेज़ गति से लागू किए जाने की ज़रूरत है. आयोग के 64वें सत्र की उदघाटन बैठक सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई लेकिन शेष सत्र को कोरोनावायरस के कारण फ़िलहाल स्थगित कर दिया है.

'महिलाओं के बिना कोई टिकाऊ विकास व शांति नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि अगर दुनिया भर में आधी आबादी (महिलाओं) को अगर पीछे छोड़ दिया जाता है तो विश्व टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के योग्य नहीं बन पाएगा. उप महासचिव ने रविवार, 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौक़े पर पपुआ न्यू गिनी में ये बात कही.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: लैंगिक समानता से सभी को लाभ

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूएन वीमैन की अध्यक्ष ने कहा है कि लैंगिक समानता के लाभ केवल महिलाओं या लड़कियों के लिए ही नहीं हैं, बल्कि एक न्यायपूर्ण दुनिया बनाने से जिनका भी जीवन बदलेगा, उन सभी को फ़ायदा होने वाला है. इस दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित  एक कार्यक्रम में यूएन वीमैन प्रमुख ने ये बात कही. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है.

लैंगिक समानता पर दुनिया भर में सुस्त रफ़्तार

महिलाओं की स्थिति व अधिकारों के बारे में 1995 में हुए बीजिंग सम्मेलन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘बीजिंग प्लैटफ़ॉर्म फ़ॉर एक्शन’ को विभिन्न देशों में किस तरह लागू किया जा रहा है. साथ ही रिपोर्ट में पुरुषों और महिलाओं के बीच ज़्यादा समानता और न्याय सुनिश्चित करने का भी आहवान किया गया है.

दुनिया भर में 90 प्रतिशत लोग महिलाओं के लिए पूर्वाग्रह व भेदभाव से ग्रस्त

लिंग समानता में अंतर को दूर करने के क्षेत्र में पिछले दशकों में हुई प्रगति के बावजूद अब भी लगभग 90 प्रतिशत पुरुष व महिलाएँ ऐसे हैं जो महिलाओं के ख़िलाफ़ किसी ना किसी तरह का पूर्वाग्रह रखते हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक ताज़ा रिपोर्ट में ये आँकड़े सामने आए हैं जो गुरूवार को प्रकाशित हुई.

बच्चे किसी भी देश में यौन शोषण से सुरक्षित नहीं

पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसी कोई सुरक्षित जगह नहीं है जहाँ बच्चों का यौन शोषण, यौन दुराचार और बच्चों को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता हो. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने मंगलवार को एक ताज़ा रिपोर्ट में ये बात कही है.

लड़कियों के लिए अब भी 'हिंसा व भेदभाव' से भरी है दुनिया

दुनिया में पहले समय की तुलना में मौजूदा समय में लड़कियाँ कहीं ज़्यादा संख्या में और ज़्यादा अवधि के लिए स्कूलों में शिक्षा हासिल करने के लिए जा रही हैं लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी प्रगति के बावजूद उनके लिए समानता और हिंसा रहित माहौल सुनिश्चित करने की मंज़िल अब भी दूर है. विश्व में ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ के 64वें सत्र के ठीक पहले जारी हुई संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), प्लान इंटरनेशनल और यूएन महिला संस्था की एक नई रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है.

एड्स को हराने के लिए महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव का ख़ात्मा ज़रूरी

एड्स पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएड्स (UNAIDS) ने ‘शून्य भेदभाव दिवस’ पर कहा है कि एड्स को हराने की लड़ाई को महिलाओं के अधिकारों और उनके साथ होने वाले भेदभाव के सभी रूपों के विरुद्ध संघर्षों से अलग नहीं किया जा सकता. यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयिमा ने इस अवसर पर अपने संदेश में लिंग-आधारित हिंसा, असमानता और असुरक्षा का अंत करने की पुरज़ोर अपील की है. 

21वीं शताब्दी को महिलाओं के लिए समानता की सदी बनाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 21वीं सदी को महिलाओं के लिए समानता सुनिश्चित करने वाली सदी बनाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बराबर हिस्सेदारी विश्व के सुरक्षित भविष्य, स्थिरता, हिंसक संघर्ष की रोकथाम और टिकाऊ व समावेशी विकास के लिए अहम है. उन्होंने लैंगिक असमानता और महिलाओं व लड़कियों के प्रति भेदभाव को एक ऐसा अन्याय क़रार दिया जो विश्व भर में व्याप्त है. 
 

मानवाधिकार परिषद: महिलाधिकारों का एजेंडा अभी 'अधूरा है'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने 'बीजिंग घोषणापत्र' की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा है कि महिला अधिकारों कि दिशा में हुई प्रगति पर संतुष्ट होकर नहीं बैठा जा सकता. विश्व भर में महिला अधिकारों के सामने चुनौतियों पैदा हो रही हैं.