महिलाएं

महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ लैंगिक हिंसा का ख़ात्मा ज़रूरी

महिला पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशेष ख़तरों का सामना करना पड़ता है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया है कि सरकारों को महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए और अधिक क़दम उठाने की ज़रूरत है. 

भारत में 'तेजस्विनी' महिलाएँ

तेजस्विनी का मतलब है "कान्तिवान महिला." भारत के महाराष्ट्र राज्य में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनीं दस लाख महिलाएँ, वास्तव में सशक्त हैं, कान्तिवान हैं. आईएफ़एडी के महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम ‘तेजस्विनी’ के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय विकास, तकनीकी कौशल और वित्त में प्रशिक्षण दिया गया, जिससे इन महिलाओं ने अभूतपूर्व व्यावसायिक सफलता हासिल की है. अब कोविड-19 संकट के दौरान, ये महिलाएँ बदलती जरूरतों के अनुसार अपने कामकाज में बदलाव लाकर व्यवसायों को आगे बढ़ा रही हैं. देखिये वीडियो फ़ीचर...
 

हानिकारक कुप्रथाओं की शिकार हैं 14 करोड़ लड़कियाँ - साढ़े चार करोड़ भारत में

विश्व जनसंख्या स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2020 की एक प्रमुख रिपोर्ट में बाल विवाह, लिंग-पक्षपाती सैक्स चयन (लड़का-लड़की में भेद करके लड़कों को प्राथमिकता देना) और महिलाओं और लड़कियों को नुक़सान पहुँचाने वाली अन्य प्रथाओं को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है.

'यौन हिंसा क़तई बर्दाश्त नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न माहौल में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा और उनके साथ बलात्कार के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. पुरुषों और लड़कों को इस मुद्दे पर अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. आमिना जे मोहम्मद का वीडियो सन्देश...

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का मुद्दा – पुरुषों और लड़कों के नाम यूएन उपप्रमुख की अपील

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं पर आँखें मूँद लेने लेने वाले पुरुषों और लड़कों को यह स्वीकार करना होगा कि वे भी इस हिंसा में भागीदार हैं.  विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने पाया है कि वैश्विक स्तर पर घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. तालाबन्दी और अन्य पाबन्दियों के कारण ज़्यादा सँख्या में महिलाओं को घर में ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बहुत सी महिलाएँ तो उनके साथ दुर्व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार साथी के साथ ही अपने घरों में सीमित हो गई हैं.

जलवायु व सुरक्षा संकटों पर पार पाने के लिए लैंगिक विषमताओं से निपटना अहम

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक साझा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु कार्रवाई के अग्रिम मोर्चे पर जुटी महिलाएँ हिन्सक संघर्षों की रोकथाम और टिकाऊ व समावेशी शान्ति में अहम भूमिका निभा रही हैं. जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा संकट और लैंगिकता के बीच क़रीबी सम्बन्ध से अवगत कराती ये रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई है जिसमें नाज़ुक हालात वाले देशों में लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण के लिए ज़्यादा निवेश और राजनैतिक व आर्थिक क्षेत्र में निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अहम बताया गया है.

कोविड-19: घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के कारण बहुत से लोगों को अपने घरों में ही सीमित रहना पड़ा है. उनमें बहुत सी महिलाएँ अपने उत्पीड़कों के साथ रहने को मजबूर हैं, इससे घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए क्या करना चाहिए... (देखें ये वीडियो)

यमन में धन की कमी के कारण लाखों महिलाओं व लड़कियों पर जोखिम

युद्धग्रस्त देश यमन में मध्य मई में जब कोविड-19 महामारी पहुँची तो लगभग उसी समय प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के पास धनराशि भी ख़त्म हो गई. इस कारण एजेंसी को देश के 180 स्वास्थ्य केन्द्रों व अस्पतालों में से 140 में प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएँ स्थगित करनी पड़ी हैं.

हम किसी से कम नहीं - मेजर सुमन

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में ज़िम्मेदारी सम्भालने वालीं और भारतीय सेना में मेजर सुमन गवानी का कहना है कि महिला शान्तिरक्षक किसी से पीछे नहीं हैं और यूएन शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं की मज़बूत भागीदारी ही उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की परिचायक है. मेजर गवानी को लैंगिक समानता पर उत्कृष्ट कार्य के लिए ब्राज़ील की नौसेना अधिकारी कमान्डर कार्ला मोन्तिएरो डी कास्त्रो अराउजो के साथ वर्ष 2019 के लिए संयुक्त रूप से 'यूएन मिलिट्री जैन्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. 

 

मेजर सुमन गवानी ने यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि शान्तिरक्षकों को अपने दैनिक कार्यों में लैंगिक ज़रूरतों और परिप्रेक्ष्यों को समाहित करना चाहिए और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के प्रयास करने चाहिए...

मानसिक स्वास्थ्य का बहुत ध्यान ज़रूरी

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में इंसानों के ना केवल शारीरिक वजूद पर चोट की है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरी तरह हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि दुनिया भर में हर जगह, हर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखा जाना बहुत ज़रूरी है और ये अभी के लिए नहीं, बल्कि महामारी पर क़ाबू पाए जाने के बाद के समय के लिए भी सुनिश्चित करना है. वीडियो सन्देश...