महिलाएं

भारत में 'नई मंज़िल' से महिला सशक्तिकरण

विश्व बैंक की ऋण सहायता से भारत सरकार का अल्पसंख्यक कल्याण मन्त्रालय ‘नई मंज़िल’ नामक एक अनूठा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम चला रहा है. इसके तहत उन महिलाओं को  शिक्षा पूरी करने का अवसर व कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने में मदद की जा रही है जो  किन्हीं कारणों से शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं. विश्व बैंक की वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ मार्गेराइट क्लार्क और शिक्षा सलाहकार प्रद्युम्न भट्टाचार्जी का संयुक्त ब्लॉग.  

भारत में महिला सशक्तिकरण के लिये ‘दिशा’

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और आइकिया फाउण्डशन की ‘दिशा’ परियोजना के तहत दस लाख महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है. इसमें संरक्षकों का दल बनाकर, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रैज़िडेंट रैप्रैज़ेटेटिव, शोको नोडा की क़लम से...

जलवायु मुद्दे पर एकल शुरूआत ने खोले बदलाव के विशाल दरवाज़े

अमेरिका की एक 18 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सोफ़िया कियान्नी ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा है वो पर्यावरण रुचि नहीं रखने वाले हर व्यक्ति को जलवायु कार्यकर्ता के रूप में तब्दील कर देने की ख़्वाहिशमन्द हैं. सोफ़िया कियान्नी का परिवार मूलतः ईरान से है और वो ख़ुद उन सात युवाओं में शामिल हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.

कोविड-19: उबरने के प्रयासों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी ज़रूरी

ऐसे में जबकि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिये निर्धारित संसाधन भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में इस्तेमाल किये जा रहे हैं तो मंगलवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिये 25 वर्ष पहले तय किये गए लक्ष्यों को हासिल करने की रफ़्तार किस तरह तेज़ की जाए. इस चर्चा में सरकारों के प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी नेताओं, कम्पनियों के शीर्ध अधिकारियों और शैक्षिक विशेषज्ञों ने वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की.

भारत में बाल विवाह के चँगुल से निकल, शिक्षा का रुख़ करती लड़कियाँ

हाल ही में जारी हुई 2020 की विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बाल विवाह के प्रचलन की दर लगभग 21 प्रतिशत है और हर 5 में से 1 लड़की का विवाह 18 साल की उम्र से पहले ही कर दिया जाता है. भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के 2015-16 आँकड़ों के मुताबिक हर 4 में से लगभग 1 लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है. लेकिन अनेक भारतीय महिलाएँ ऐसी भी हैं जिन्होंने बाल विवाह की हानिकारक प्रथा के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलन्द की और शिक्षा व आत्मनिर्भरता को चुनकर अपना जीवन अपने दम पर जीने का रास्ता चुना.
 

कोविड-19: महिलाओं की समान भागीदारी से ही मज़बूत पुनर्बहाली सम्भव - ब्लॉग

लैंगिक असमानता की खाई पाटने और आर्थिक जीवन में महिलाओं के लिए समान भागीदारी के अवसरों को बढ़ावा देना कोविड संकट के बाद एक मज़बूत और अधिक समावेशी पुनर्बहाली के लिए अहम होगा. भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की उप-प्रतिनिधि, नादिया रशीद का ब्लॉग.

कोविड-19: महामारी के प्रकोप से उबरने में महिला नेतृत्व की महती भूमिका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण विश्व भर में स्वास्थ्य, मानवीय सहायता और विकास के लिए अभूतपूर्व संकट पैदा हुआ है लेकिन इस चुनौती से महिला नेतृत्व की शक्ति भी उजागर हुई है. संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव अमीना जे. मोहम्मद ने मंगलवार को विभिन्न क्षेत्रों, सैक्टरों और पीढ़ियों की प्रभावशाली महिलाओं के साथ एक वर्चुअल बैठक के दौरान यह बात कही है. 

भारत में कोरोना योद्धा - महामारी के दौरान मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल

कोविड-19 महामारी के कारण हुई तालाबन्दी से स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे  यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इन ठोस चुनौतियों के बावजूद, कई साहसी महिलाओं ने आगे आकर ये सुनिश्चित किया कि महामारी के दौरान महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों की उपेक्षा न हो पाए. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर, भारत की ऐसी ही कुछ महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सेवाओं की झलक, जो संकट के समय पूरी प्रतिबद्धता से अपना कर्तव्य निभा रही हैं. 
 

महिलाओं और लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य पर मँडराता ख़तरा

वैश्विक महामारी कोविड-19 सभी लोगों को प्रभावित कर रही है लेकिन इसका असर हर किसी पर एक जैसा नहीं है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार, 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोरोनावायरस संकट के कारण स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और महिलाओं व लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य  की उपेक्षा हो रही है जो गहरी चिन्ता का विषय है. 

महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ लैंगिक हिंसा का ख़ात्मा ज़रूरी

महिला पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशेष ख़तरों का सामना करना पड़ता है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया है कि सरकारों को महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए और अधिक क़दम उठाने की ज़रूरत है.