महिलाएं

महिला नेतृत्व की ज़रूरत

अन्तर-संसदीय संघ यानि आईपीयू की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया था कि दुनिया भर की संसदों में, महिला सांसदों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक हो गई है. यह आँकड़ा ऐतिहासिक है, लेकिन संसदों में लैंगिक समानता हासिल करने का लक्ष्य अब भी दूर है. एशिया में, और ख़ासतौर पर भारत में भी, नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन अभी और अधिक साहसिक क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. संसद में, व नेतृत्व पदों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व के बारे में, भारत में नेतृत्व के तीन स्तरों पर आसीन महिलाओं के विचार प्रस्तुत करता एक वीडियो फ़ीचर...

यूएन महिला आयोग: पूर्ण लैंगिक समानता के लिये रोडमैप पर रहेगा ध्यान

महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग के 65वें सत्र का एक मुख्य ध्यान - दुनिया भर में पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने और निर्णय प्रक्रिया में, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये एक रौडमैप तैयार करने पर रहेगा. ये सत्र सोमवार को, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हो रहा है.

'चाहिये, समान अवसरों व संसाधनों तक पहुँच...'

भारत की केन्द्रीय कपड़ा मन्त्री और महिला व बाल विकास मन्त्री स्मृति ईरानी का कहना है कि भारत की संसद में, देश के इतिहास में सबसे ज़्यादा महिला प्रतिनिधियों का होना गर्व का विषय है, लेकिन आसमान छूना अभी बाक़ी है. उन्होंने कहा कि हम किसी से ख़ैरात नहीं चाहते, हम केवल यह चाहते हैं कि हमें समान अवसर मिलें, और संसाधनों तक समान पहुँच मिले. यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत...

म्याँमार: प्रदर्शनों में महिलाओं के विरुद्ध लक्षित हिंसा पर चिन्ता

महिलाधिकारों की संरक्षा के लिये काम करने वाली, संयुक्त राष्ट्र संस्था – यूएन वीमैन ने, म्याँमार में, शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की दमनात्मक कार्रवाई में, महिलाओं को निशाना बनाए जाने और उनके ख़िलाफ़ अत्यधिक हिंसा पर गम्भीर चिन्ताएँ व्यक्त की हैं.

दुनिया में हर तीन में से एक महिला, हिंसा पीड़ित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझीदार संगठनों का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, युवा उम्र से ही शुरू हो जाती है और बुरी तरह व गहराई से जड़ें जमाए हुए है. इस रिपोर्ट को महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा पर, अब तक का सबसे विस्तृत अध्ययन बताया गया है, जिसके अनुसार, अपने जीवनकाल में, हर तीन में से एक महिला यानि लगभग 73 करोड़ 60 लाख महिलाओं को, शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, और इस आँकड़े में पिछले एक दशक में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.

महिलाओं को अहम फ़ैसलों से दूर रखा जाना सहन नहीं - यूएन महिला संस्था

महिला सशक्तिकरण के लिये यूएन संस्था – यूएन वीमैन (UN Women) की प्रमुख फ़ूमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने कहा है कि महिलाओं की ज़िन्दगी पर असर डालने वाले निर्णयों से उन्हें दूर रखा जाना ग़लत है और इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिये. उन्होंने, अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.

आसमाँ छूना अभी बाक़ी है...

संयुक्त राष्ट्र में संसदों के अन्तरराष्ट्रीय संगठन, अन्तर-संसदीय संघ यानि आईपीयू की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर की संसदों में, महिला सांसदों की भागेदारी 25 प्रतिशत से अधिक पहुँच गई है. यह आँकड़ा ऐतिहासिक है, लेकिन संसदों में लैंगिक समानता हासिल करने का लक्ष्य अभी भी दूर है. 

योरोप में महिलाओं को, निर्धनता से निकालने के लिये, 'ज़्यादा आर्थिक स्वतन्त्रता' की दरकार

चरम ग़रीबी और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर ओलिवियर डे शटर ने कहा है कि योरोपीय संघ में महिलाओं को समान वेतन, बाल देखभाल सम्बन्धी सहायता और घरेलू कामकाज में हाथ बँटाने के ज़रिये ज़्यादा आर्थिक स्वतन्त्रता दी जानी चाहिये. महिलाओं को हरसम्भव सहायता प्रदान करके, उन्हें निर्धनता के गर्त में धँसने से बचाया जाना होगा. यूएन न्यूज़ ने, 8 मार्च को, अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, ओलिवियर डे शटर से ख़ास बातचीत की...

महिला दिवस: महिलाओं की समान भागीदारी के लिये विशेष उपाय करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने महिलाओं की समान भागीदारी की रूपान्तरकारी शक्ति को रेखांकित करते हुए, तमाम पक्षों और हितधारकों से, महिलाओं की समान भागीदारी को आगे बढ़ाने और तीव्र बदलाव लाने के लिये, विशेष उपाय करने का आहवान किया है.

महिला दिवस 2021

8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर, लैंगिक असमानता ख़त्म करने और महिलाओं को और ज़्यादा कार्यस्थल मुहैया कराने का आहवान किया गया है. कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में भी महिलाएँ, अग्रिम मोर्चों पर मुस्तैद रही हैं. वीडियो सन्देश...