महिलाएं

कोविड-19 ने धीमी की लैंगिक समानता की दिशा में प्रयासों की रफ़्तार

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) के प्रमुख लियू झेनमिन ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से लैंगिक समानता हासिल करने के प्रयासों में व्यवधान आया है. उनके मुताबिक कोरोनावायरस संकट से पिछले दशकों में कठिनाई से हासिल हुई प्रगति पर भी ख़तरा मँडरा रहा है.  

ग्रामीण महिलाओं को भविष्य के संकटों के मद्देनज़र मज़बूत करने की दरकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ग्रामीण महिलाएँ कृषि, खाद्य सुरक्षा और भूमि व प्राकृतिक संसाधनों के प्रबन्धन में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं मगर फिर भी वो भेदभाव का सामना करती हैं, उनके साथ व्यवस्थागत नस्लभेद होता है और वो ढाँचागत ग़रीबी में जीवन जीती हैं. 

वैश्विक संकट से उबरने के लिये ज़्यादा समानता बहुत ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि पार-अटलाण्टिक दास व्यापार के प्रभावों की स्वीकार्यता, लोगों को दास बनाए जाने के चलन व उपनिवेशवाद की समीक्षा और मूल्याँकन के सन्दर्भ में बात करें तो नस्लवाद, पूर्वाग्रह व नफ़रत और असहिष्णुता के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2001 में हुआ डर्बन विश्व सम्मेलन एक मील का पत्थर साबित हुआ है.

मृत जन्म: ग़ैर-ज़रूरी, अत्यन्त गहरे व ख़ामोश दर्द भरी मुसीबत

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में हर 16 सेकण्ड में एक मृत बच्चे का जन्म (Stillbirth) होता है जिसका मतलब है कि साल भर में लगभग 20 लाख बच्चे ऐसे पैदा होते हैं जो इस दुनिया में आने के बाद अपनी ज़िन्दगी की पहली साँस शुरू ही नहीं कर पाते हैं. 

बीजिंग सम्मेलन की 25वीं वर्षगाँठ - महिला अधिकारों के वादों को पूरा करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया है कि यदि देसों ने कोविड-19 के दुष्प्रभावों से निपटने के लिये अभी कार्रवाई नहीं की तो लैंगिक समानता के मुद्दे पर हुई प्रगति मुश्किल में पड़ जाएगी. यूएन महासचिव ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर ऐतिहासिक चौथे विश्व सम्मेलन की 25वीं वर्षगाँठ पर गुरूवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सरकारों का आहवान किया कि महामारी पर जवाबी कार्रवाई और पुनर्बहाली प्रक्रिया के केन्द्र में महिलाओं को रखना होगा. 

कोविड-19 के कारण बढ़ी लैंगिक हिंसा के ख़िलाफ़ दोगुने प्रयासों की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि घरेलू हिंसा से लेकर यौन उत्पीड़न,ऑनलाइन उत्पीड़न, बाल विवाह में वृद्धि और लिंग आधारित हिंसा (GBV) ऐसा वैश्विक संकट है, जो महामारी के कारण और ज़्यादा बढ़ गया है. 

कोविड-19: अधिकाँश देश आर्थिक व सामाजिक दुष्प्रभावों से महिलाओं की रक्षा करने में विफल 

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण महिलाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, लेकिन अधिकाँश देश उनके लिये पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक संरक्षा उपाय करने में नाकाम साबित हो रहे हैं. महिला सशक्तिकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UN Women) की प्रमुख पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने सोमवार को यह बात कही है. 

गरिमामय और न्यायसंगत विश्व के लिये समान वेतन सुनिश्चित करने की पुकार

महिलाओं और पुरुषों को समान कार्य के लिये मिलने वाले वेतनों में अन्तर और गहराई से समाई व्यवस्थागत विषमताओं की ओर ध्यान आकृष्ट करने के प्रयासों के तहत शुक्रवार, 18 सितम्बर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस’ मनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पहली बार मनाए गए इस दिवस पर अपने सन्देश में कहा कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिये ग़ैर-बराबरी का दर्जा जीवन के अन्य क्षेत्रों में विषमता को पनपने का मौक़ा देता है.  

भारत: बिहार में बाढ़ से राहत में लैंगिक संवेदनशीलता

भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में बढ़ती कोविड-19 महामारी और ऊपर से बाढ़ की मार ने लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं. ख़ासतौर पर किशोरियों और महिलाओं के लिये ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच बहुत कठिन हो गई है. ऐसे में भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफ़पीए) ने महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता सम्बन्धी विभिन्न आवश्यक सेवाएँ देने का बीड़ा उठाया है.  

कोविड ने करोड़ों और बच्चों को अत्यन्त ग़रीबी में धकेला

संयुक्त राष्ट्र के एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कोरोनावायरस महामारी ने दुनिया भर में 15 करोड़ अतिरिक्त बच्चों को बहुआयामी ग़रीबी के गर्त में धकेल दिया है जिसके कारण वो शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पोषण, स्वच्छता और जल संसाधनों से वंचित हो गए हैं.