महिलाएं

'शरीर मेरा है, मगर फ़ैसला मेरा नहीं' महिला सशक्तिकरण पर यूएन रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 57 विकासशील देशों की लगभग आधी महिलाओं को गर्भनिरोधक का उपयोग करने, स्वास्थ्य देखभाल की मांग करने या फिर अपनी कामुकता सहित अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.

'मेरा शरीर, मेरा फ़ैसला’

संयुक्त राष्ट्र की एक नई प्रमुख रिपोर्ट में, व्यक्तियों की शारीरिक स्वायत्तता की पुकार लगाई गई है. इस मुद्दे पर पहली बार ध्यान केन्द्रित करते हुए, यूएन जनसंख्या कोष (UNFPA) की प्रमुख रिपोर्ट, ख़ुद के शरीर के बारे में, ख़ुद के निर्णय लेने की शक्ति और पसन्द की पुकार लगाती है. और ये शक्ति, हिंसा के डर के बिना, व किसी अन्य को ये फ़ैसला करने का अधिकार दिये बिना मिले.

करोड़ों महिलाएँ अन्य लोगों द्वारा नियंत्रित जीवन जीने को विवश

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 57 देशों में, तकरीबन आधी महिलाओं को, अपनी स्वास्थ्य देखभाल, गर्भ निरोधक प्रयोग करने या नहीं करने, या यौन जीवन के बारे में अपनी पसन्द से फ़ैसले करने की शक्ति हासिल नहीं है. 

लैंगिक समानता, 'इस सदी का अधूरा मानवाधिकार संघर्ष' - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को, पीढ़ी समानता फ़ोरम (Generation Equality Forum) में कहा कि महिलाओं के लिये समान अधिकार प्राप्ति का कार्य – “सदी का ऐसा मानवाधिकार संघर्ष है जो अभी अधूरा है”. ये फ़ोरम, मैक्सिको सिटी में सोमवार को शुरू हुआ.

शान्तिरक्षा अभियानों में महिला सशक्तिकरण 'शीर्ष प्राथमिकता'

शान्तिरक्षा अभियानों के लिये संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने शान्तिरक्षा और शान्तिनिर्माण प्रयासों में महिलाओं के बुनियादी योगदानों की सराहना की है. यूएन अवर महासचिव ज्याँ-पिएर लाक्रोआ ने गुरुवार को दोहराया कि सैन्य बलों में महिलाओं का सशक्तिकरण, एक अहम प्राथमिकता है लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये, हर किसी द्वारा यथासम्भव प्रयास किये जाने की ज़रूरत है.   

कोविड-19: महिलाओं पर दोहरी गाज, अग्रिम मोर्चों पर मुस्तैद मगर निर्णय-प्रक्रिया से बाहर

महिला अधिकारों व सशक्तिकरण के लिये काम करने वाले यूएन संगठन – यूएन वीमैन की अध्यक्षा ने कहा है कि निसन्देह दुनिया भर में, स्वास्थ्यकर्मियों में 70 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है, और कोविड-19 महामारी से सबसे ज़्यादा और बुरी तरह महिलाएँ ही प्रभावित हुई हैं, फिर भी, महामारी का मुक़ाबला करने से सम्बन्धित निर्णय प्रक्रिया से, महिलाओं को ही, व्यवस्थागत तरीक़े से बाहर रखा जा रहा है. इनमें दुनिया भर में, सरकारों द्वारा संचालित कार्यबल (टास्क फ़ोर्स) भी हैं.

सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी - 'हर किसी के लिये लाभप्रद'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ को सम्बोधित करते हुए कहा है कि महिलाओं व लड़कियों को सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के लिये पूर्ण रूप से सशक्त बनाना, सही और बुद्धिमान चयन है. अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी मंगलवार को महिला आयोग के सत्र को सम्बोधित किया, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है. 

दक्षिण एशिया: महामारी के कारण जच्चा-बच्चा मौतों में तीव्र बढ़ोत्तरी

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने कहा है कि दक्षिण एशिया में, कोविड-19 के कारण, स्वास्थ्य सेवाओं में उत्पन्न हुए गम्भीर व्यवधान के परिणामस्वरूप, वर्ष 2020 के दौरान, जच्चा-बच्चा की अतिरिक्त दो लाख 39 हज़ार मौतें हुई हैं.

CSW: कॉर्पोरेट हस्तियों को यूएन प्रमुख का सन्देश - लैंगिक समानता समय की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने तमाम कॉर्पोरेट हस्तियों से लैंगिक समानता हासिल करने का आग्रह करते हुए, निजी क्षेत्र और पूरे समाज के लिये, इसके लाभों को भी रेखांकित किया है. यूएन प्रमुख ने, मंगलवार को, महिला स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के आयोग (CSW) के 65वें सत्र के दौरान आयोजित 'लक्ष्य लैंगिक समानता' कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश में, ये अपील की.

कोविड-19: महिलाओं को बनाना होगा 'पुनर्बहाली के प्रयासों की धुरी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ (Commission on the Status of Women) को सम्बोधित करते हुए कहा है कि कोविड-19 के प्रभावों से पुनर्बहाली प्रयासों के केन्द्र में, आगे-पीछे, हर तरफ़ महिलाओं को रखना होगा, यानि अर्थशास्त्र, दक्षता, कारगरता और सामाजिक सुदृढ़ता का एकग विषय बनाना होगा.