महिलाएं

यमन में धन की कमी के कारण लाखों महिलाओं व लड़कियों पर जोखिम

युद्धग्रस्त देश यमन में मध्य मई में जब कोविड-19 महामारी पहुँची तो लगभग उसी समय प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के पास धनराशि भी ख़त्म हो गई. इस कारण एजेंसी को देश के 180 स्वास्थ्य केन्द्रों व अस्पतालों में से 140 में प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएँ स्थगित करनी पड़ी हैं.

हम किसी से कम नहीं - मेजर सुमन

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में ज़िम्मेदारी सम्भालने वालीं और भारतीय सेना में मेजर सुमन गवानी का कहना है कि महिला शान्तिरक्षक किसी से पीछे नहीं हैं और यूएन शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं की मज़बूत भागीदारी ही उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की परिचायक है. मेजर गवानी को लैंगिक समानता पर उत्कृष्ट कार्य के लिए ब्राज़ील की नौसेना अधिकारी कमान्डर कार्ला मोन्तिएरो डी कास्त्रो अराउजो के साथ वर्ष 2019 के लिए संयुक्त रूप से 'यूएन मिलिट्री जैन्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. 

 

मेजर सुमन गवानी ने यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि शान्तिरक्षकों को अपने दैनिक कार्यों में लैंगिक ज़रूरतों और परिप्रेक्ष्यों को समाहित करना चाहिए और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के प्रयास करने चाहिए...

मानसिक स्वास्थ्य का बहुत ध्यान ज़रूरी

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में इंसानों के ना केवल शारीरिक वजूद पर चोट की है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरी तरह हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि दुनिया भर में हर जगह, हर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखा जाना बहुत ज़रूरी है और ये अभी के लिए नहीं, बल्कि महामारी पर क़ाबू पाए जाने के बाद के समय के लिए भी सुनिश्चित करना है. वीडियो सन्देश...

सूडान में महिला ख़तना पर प्रतिबंध, मगर रास्ता बहुत कठिन है... (ब्लॉग)

जहाँ पूरी दुनिया कोरोनावायरस महामारी के दौरान एक अदृश्य दुश्मन से जंग लड़ने में में लगी हुई है, वहीं सूडान ने महिला जननांग विकृति पर रोक लगाने के उपायों के तहत इस प्रथा को अपराध क़रार दे दिया गया  है. यह ऐतिहासिक उपाय 1 मई को विश्व मज़दूर दिवस के मौक़े पर लागू हो गया है. लेकिन  इन उपायों के तहत महिलाओं को इस दर्दनाक प्रथा से मुक्ति दिलाना कितना मुश्किल व आसान होगा?  इस विषय पर केनया में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर, सिद्धार्थ चैटर्जी का ब्लॉग...

स्वास्थ्य संकट में जच्चा-बच्चा के लिए गंभीर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अनुमान ज़ाहिर किया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 11 करोड़ 60 लाख बच्चों का जन्म हुआ है. संगठन ने इस संदर्भ में तमाम देशों की सरकारों से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायी सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने का आहवान किया है क्योंकि उनके लिए पहले से ही दबाव में काम कर रही स्वास्थ्य सेवाओं और बाधित आपूर्ति श्रंखला के माहौल में ज़्यादा ख़तरा दरपेश है.

संघर्षों व हिंसा के कारण विस्थापित बच्चों की रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक ताज़ा रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में लड़ाई-झगड़ों और हिंसा के कारण लगभग एक करोड़ 90 लाख बच्चों को अपने ही देशों में विस्थापित होना पड़ा, जोकि किसी भी अन्य साल से ज़्यादा है. इस कारण बच्चे वैश्विक महामारी कोविड-19 के वैश्विक फैलाव के लिए सबसे कमज़ोर तबका बन गए हैं.