यूएन मामले

यूएन की भूमिका की कुछ झलकियाँ

संयुक्त राष्ट्र हर साल एक छोटे आकार का कार्ड प्रकाशित करता है, जिसमें दस सरल उदाहरणों के ज़रिये ये बताया जाता है कि इस वैश्विक संगठन ने दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में कैसे मदद की. संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इस वर्ष, इसमें एक ग्यारहवीं वजह भी जोड़ी गई यानि कोविड-19 महामारी से मुक़ाबला.

 

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यूएन में भारत के कुछ ऐतिहासिक पल...

26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, सभी राष्ट्र पहली बार एकजुट हुए. सभी राष्ट्र, आने वाली पीढ़ियों को युद्ध की विभीषिका से बचाने, मानवाधिकारों और पुरुषों व महिलाओं के समान अधिकारों के प्रति दोबारा विश्वास क़ायम करने व बड़े और छोटे राष्ट्रों के लिए समान रूप से, न्यायसंगत शर्तें स्थापित कर तथा स्वतन्त्र रूप से सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध थे.


ऐतिहासिक सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व, रामास्वाराई मुदालियर ने किया, जिन्होंने चार्टर पर हस्ताक्षर भी किए. फिर 15 अगस्त, 1947 को, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आज़ाद भारत का झंडा फहराया गया और 54 देशों के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपना यथोचित स्थान हासिल किया. 
 

यूएन चार्टर: चुनौतीपूर्ण दौर में संयुक्त राष्ट्र के मज़बूत स्तम्भ की 75वीं वर्षगाँठ

दशकों पहले युद्ध की विभीषिका और बर्बादी झेल रही दुनिया में संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने नियम आधारित व्यवस्था, शन्ति और आशा का संचार करने में अहम भूमिका निभाई थी. यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 75 वर्ष पूरे होने पर महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक महामारी, विषमता व हिंसा की चुनौतियों के बीच चार्टर के मूल्यों और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की अवधारणा की प्रासंगिकता बनी हुई है. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...

शरणार्थियों को समर्पित इमोजी

आइवरी कोस्ट के एक युवा कलाकार और डिज़ाइनर गैब्रे ओ'प्लेरुओ ने विविधता व एकजुटता का संगम दिखाने के लिए अदभुत इमोजी बनाई हैं. उन्होंने शरणार्थियों की तकलीफ़ों को बयान करने वाली 365 इमोजी भी बनाई हैं, यानि साल में हर दिन के लिए एक इमोजी. गैब्रे का कहना है कि उनके परिवार के जानने वाले बहुत से लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा इसलिए वो शरणार्थियों के हालात के बारे में जागरूकता फैलाने में इच्छुक हैं...

योग से शान्ति व सन्तुलन

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), न्यूयॉर्क में कार्यरत, सिल्के वॉन ब्रोकहौसन के अनुसार कोविड-19 से उत्पन्न संकट के इस समय में योग से उन्हें शान्त, सन्तुलित और संगठित रहने में मदद करता है. योग करने के लिए किसी ख़ासियत की दरकार नहीं है. योगाभ्यास की कुछ झलकियाँ...

योगाभ्यास: विश्व को भारत का अनुपम उपहार

योग मन, तन और आत्मा के बीच अदभुत तारतम्य बिठाता है जिससे अन्ततः अच्छा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य हासिल किया जा सकता है. दुनिया को योग की अनुपम भेंट देने वाले भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का छठे अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस पर सन्देश. कुछ योगाभ्यास झलकियों के साथ...

'यौन हिंसा क़तई बर्दाश्त नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न माहौल में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा और उनके साथ बलात्कार के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. पुरुषों और लड़कों को इस मुद्दे पर अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. आमिना जे मोहम्मद का वीडियो सन्देश...

योगाभ्यास की एक झलक

इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय दिवस रविवार, 21 जून को मनाया गया. कोविड-19 महामारी के कारण ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र योग से सम्बन्धित ज़्यादातर गतिविधियाँ और आयोजन ऑनलाइन मंचों पर आयोजित किए गए. भारत के स्थाई उपप्रतिनिधि नागराज नायडू की योग गतिविधियाँ...

शान्तिरक्षा में महिलाओं का बढ़ता योगदान

संयुक्त राष्ट्र की शान्तिरक्षा सुरक्षा कार्यों की आधारशिला है और महिला शान्तिरक्षक इसकी सफलता की कुन्जी हैं. आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा में नेतृत्व के पदों पर पहले से कहीं ज़्यादा महिलाएँ आसीन हैं. इसमें महिलाएँ सेना, पुलिस और नागरिक समाज का अंग बनकर संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत हैं. संयुक्त राष्ट्र शान्ति व्यवस्था, “महिला, शान्ति और सुरक्षा” पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. इसके तहत महिला अधिकारों को पूर्ण रूप से पाने के लिए महिलाओं को निर्णायक भूमिका में रहना होगा और अपने देशों में शान्तिरक्षकों की भूमिका भी निभानी होगी. निर्णय लेने में महिलाओं का सार्थक समावेश प्रभावशीलता को बढ़ाता है व नए दृष्टिकोण और समाधान उत्पन्न करता है, अधिक संसाधन पैदा करता है और हमारे प्रयासों को मज़बूत करता है.

 

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