यूएन मामले

यूएन महासभा - 75वें सत्र में विश्व नेता करेंगे वर्चुअल शिरकत

संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक जनरल डिबेट (आम चर्चा) साल का सबसे अहम आयोजन है लेकिन सितम्बर में होने वाले 75वें सत्र के लिये विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण कुछ तब्दीलियाँ की गई हैं. नए कार्यक्रम के मुताबिक विश्व नेता न्यूयॉर्क आने के बजाय अपने वीडियो सन्देशों के ज़रिये दुनिया से मुख़ातिब होंगे. 

प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार के लिये 35 युवा होनहार पहुँचे फ़ाइनल में

संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वाधिक प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार के लिये अनोखी रचनाशीलता व नवाचार निर्माणशील विचारों के लिये 35 युवाओं को क्षेत्रीय स्तर पर सूचीबद्ध किया गया है. इनमें अमेज़ॉन की आदिवासी भूमि का खोजी व साहसिक यात्राओं के ज़रिये संरक्षण, अमेरिका में हानिकारक कार्बन उत्सर्जन को मूल्यवान उपभोग संसाधानों में तब्दील करना, नाईजीरिया में पानी से बिजला उत्पादन जैसे नवीन विचार व प्रयोग शामिल हैं जिनके लिये इन युवाओं को नामांकित किया गया है.

'युवाओं को सहारा देने से होगा पूरी दुनिया का फ़ायदा'

संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि जो युवा अपने कामकाज के ज़रिये समुदायों पर सकारात्मक छाप छोड़ना चाहते हैं, उन्हें कामयाब होने और कोविड-19 महामारी का असर कम करने के लिये, सरकारों से और ज़्यादा मदद की तत्काल ज़रूरत है.

यूएन की भूमिका की कुछ झलकियाँ

संयुक्त राष्ट्र हर साल एक छोटे आकार का कार्ड प्रकाशित करता है, जिसमें दस सरल उदाहरणों के ज़रिये ये बताया जाता है कि इस वैश्विक संगठन ने दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में कैसे मदद की. संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इस वर्ष, इसमें एक ग्यारहवीं वजह भी जोड़ी गई यानि कोविड-19 महामारी से मुक़ाबला.

 

देखें वीडियो फ़ीचर...

प्राण निछावर करने वाले यूएन कर्मचारियों के साहस और समर्पण का सम्मान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को एक वर्चुअल कार्यक्रम में उन साथी यूएन कर्मचारियों की निडरता व  विरासत को श्रृद्धांजलि अर्पित की है जिन्होंने भावी पीढ़ियों को युद्ध के दंश से बचाने, सर्वजन के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करने सहित संगठन के सभी मूल्यों व आदर्शों की रक्षा करते समय अपने प्राण निछावर कर दिये. 
 

कोविड-19: झूठी व ग़लत जानकारी शेयर करने से पहले ज़रा ठहरें और सोचें!

संयुक्त राष्ट्र ने तमाम लोगों से आग्रह किया है कि उन्होंने कोविड-19 महामारी से बचने के लिए जो सामाजिक दूरी जैसे उपाय अपनाए हैं, उसी तरह के उपाय सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी अपनाएँ और कोई भी सामग्री आगे बढ़ाने यानि शेयर करने से पहले ठहरकर उसके बारे में सावधानी से सोचें.

यूएन में भारत के कुछ ऐतिहासिक पल...

26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, सभी राष्ट्र पहली बार एकजुट हुए. सभी राष्ट्र, आने वाली पीढ़ियों को युद्ध की विभीषिका से बचाने, मानवाधिकारों और पुरुषों व महिलाओं के समान अधिकारों के प्रति दोबारा विश्वास क़ायम करने व बड़े और छोटे राष्ट्रों के लिए समान रूप से, न्यायसंगत शर्तें स्थापित कर तथा स्वतन्त्र रूप से सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध थे.


ऐतिहासिक सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व, रामास्वाराई मुदालियर ने किया, जिन्होंने चार्टर पर हस्ताक्षर भी किए. फिर 15 अगस्त, 1947 को, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आज़ाद भारत का झंडा फहराया गया और 54 देशों के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपना यथोचित स्थान हासिल किया. 
 

यूएन चार्टर: चुनौतीपूर्ण दौर में संयुक्त राष्ट्र के मज़बूत स्तम्भ की 75वीं वर्षगाँठ

दशकों पहले युद्ध की विभीषिका और बर्बादी झेल रही दुनिया में संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने नियम आधारित व्यवस्था, शन्ति और आशा का संचार करने में अहम भूमिका निभाई थी. यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 75 वर्ष पूरे होने पर महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक महामारी, विषमता व हिंसा की चुनौतियों के बीच चार्टर के मूल्यों और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की अवधारणा की प्रासंगिकता बनी हुई है. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...

शरणार्थियों को समर्पित इमोजी

आइवरी कोस्ट के एक युवा कलाकार और डिज़ाइनर गैब्रे ओ'प्लेरुओ ने विविधता व एकजुटता का संगम दिखाने के लिए अदभुत इमोजी बनाई हैं. उन्होंने शरणार्थियों की तकलीफ़ों को बयान करने वाली 365 इमोजी भी बनाई हैं, यानि साल में हर दिन के लिए एक इमोजी. गैब्रे का कहना है कि उनके परिवार के जानने वाले बहुत से लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा इसलिए वो शरणार्थियों के हालात के बारे में जागरूकता फैलाने में इच्छुक हैं...