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कोविड-19 के बारे में बहुत सारी बातें

कोविड -19 को महामारी परिभाषित किया गया है और विश्व स्तर पर इस बीमारी का सामना करने के लिए असाधारण प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में बहुत से सवाल, भ्रांतियाँ, अफ़वाहें भी देखे जा रहे हैं. ऐसे ही कुछ प्रासंगिक सवालों के जवाब देती ये वीडियो देखें - सांकेतिक भाषा में...

कोविड-19: तथ्य और भ्रान्तियाँ, ऐहतियाती उपाय

कोरोनावायरस यानि कोविड-19 ने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. निसंदेह इस वायरस का संक्रमण बीमारी का कारण बन सकता है मगर इसका मुक़ाबला करने में लोग अक्सर भ्रांतियों व अफ़वाहों के भी शिकार हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि सही समझ, जागरूकता, एकजुटता व चिकित्सा सलाह का पालन करके इस विश्व स्वास्थ्य चुनौती का मुक़ाबला असरदार तरीक़े से किया जा सकता है. कुछ इसी तरह के सवाल-जवाब और तथ्यों व भ्रांतियों में अंतर यहाँ प्रस्तुत है...

विश्व तापमान वृद्धि की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा व व्यापक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के सभी पहलुओं पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है, साथ ही जलवायु संकट दुनिया भर की आबादी के स्वास्थ्य और रहन-सहन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा के साथ विशेष बातचीत... 

'महिलाओं के बिना कोई टिकाऊ विकास व शांति नहीं'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि अगर दुनिया भर में आधी आबादी (महिलाओं) को अगर पीछे छोड़ दिया जाता है तो विश्व टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के योग्य नहीं बन पाएगा. उप महासचिव ने रविवार, 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौक़े पर पपुआ न्यू गिनी में ये बात कही.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: लैंगिक समानता से सभी को लाभ

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूएन वीमैन की अध्यक्ष ने कहा है कि लैंगिक समानता के लाभ केवल महिलाओं या लड़कियों के लिए ही नहीं हैं, बल्कि एक न्यायपूर्ण दुनिया बनाने से जिनका भी जीवन बदलेगा, उन सभी को फ़ायदा होने वाला है. इस दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित  एक कार्यक्रम में यूएन वीमैन प्रमुख ने ये बात कही. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है.

लैंगिक समानता पर दुनिया भर में सुस्त रफ़्तार

महिलाओं की स्थिति व अधिकारों के बारे में 1995 में हुए बीजिंग सम्मेलन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘बीजिंग प्लैटफ़ॉर्म फ़ॉर एक्शन’ को विभिन्न देशों में किस तरह लागू किया जा रहा है. साथ ही रिपोर्ट में पुरुषों और महिलाओं के बीच ज़्यादा समानता और न्याय सुनिश्चित करने का भी आहवान किया गया है.

बच्चे किसी भी देश में यौन शोषण से सुरक्षित नहीं

पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसी कोई सुरक्षित जगह नहीं है जहाँ बच्चों का यौन शोषण, यौन दुराचार और बच्चों को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता हो. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने मंगलवार को एक ताज़ा रिपोर्ट में ये बात कही है.

मानवता के लिए ज़रूरी है वन्यजीव व प्रकृति का संरक्षण

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के न्यूयॉर्क कार्यालय के प्रमुख और सहायक महासचिव सत्या त्रिपाठी ने वन्यजीवों व प्रकृति के संरक्षण को मानवता के अस्तित्व के लिए बेहद अहम क़रार दिया है. उन्होंने वर्ष 2020 को प्रकृति के लिए सुपर साल (super year) बताया क्योंकि इस साल इतनी बैठकें और सम्मेलन हो रहे हैं जिनसे निकलने वाले समाधानों से पर्यावरण के विनाश पर विराम लगाया जा सकता है. पेश है विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर यूएन हिंदी न्यूज़ के प्रमुख महबूब ख़ान के साथ उनकी एक ख़ास बातचीत.

भारत में 'शून्य-बजट' प्राकृतिक खेती से लाभ

भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में 'शून्य-बजट' प्राकृतिक खेती के ज़रिए किसानों की प्रत्यक्ष लागत कम करने का प्रयास किया जा रहा है. इस प्रणाली में स्थानीय और ग़ैर-सिंथेटिक कृषि सामग्री के उपयोग से पैदावार और कृषि स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है.

10 नई प्रवासी प्रजातियों को वन्यजीव समझौते के तहत मिलेगा संरक्षण

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर संधि (सीएमएस) के 13वें सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 के समापन पर 10 प्रवासी प्रजातियों को वैश्विक वन्यजीव समझौते में शामिल करने की घोषणा की गई है जिससे उनके संरक्षण के प्रयासों को मज़बूती मिलेगी. इन प्रजातियों में एशियन एलिफ़ेंट, जैगुआर और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सहित अन्य प्रजातियां शामिल हैं.