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कोविड-19: आपसी सम्बन्धों पर प्रभाव

स्वास्थ्य संकट की स्थिति में, स्कूल, सामाजिक संस्थाओं और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच खो देने के कारण, ख़ासतौर पर लड़कियों को बाल-विवाह और कम उम्र में गर्भवती होने के जोखिम का सामना करना पड़ता है.

बांग्लादेश की 15 साल की त्रिशा कहती हैं, "मैं एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था चाहती हूँ, जहाँ महिलाएँ और बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हों. बाल विवाह हमारे समाज के लिये एक अभिशाप है. जब कोई लड़की बाल विवाह का शिकार होती है, तो वह शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित होती है.”

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में, व्यक्त किये हैं. (वीडियो देखें)...

कोविड-19: एक लड़की की नज़र में असमानता

कोविड-19 महामारी के बढ़ते फैलाव के बीच, लड़कियाँ महिला ख़तना (FGM) से मुक्ति पाने का अधिकार पाने और सुरक्षा व कल्याण के लिये समान अवसरों का उपयोग करने के लिये आवाज़ उठा रही हैं.

निजेर में 15 साल की एस्टा पूछती हैं, "अगर कोई इलाज मिल भी गया, तब भी क्या क्या हमारे जैसे देशों को वो हासिल हो पाएगा?" 

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में व्यक्त किये हैं. (देखिये वीडियो)...

कोविड-19 दौरान शिक्षा - एक लड़की की नज़र से

कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत 194 देशों में राष्ट्रव्यापी तालाबन्दी में लगभग एक अरब 60 करोड़ बच्चों का जीवन भी प्रभावित हुआ है. दुनिया भर के लगभग 90 प्रतिशत छात्र अप्रैल के शुरू से ही स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. आशंका है कि बहुत सी लड़कियाँ शायद कभी भी स्कूली कक्षाओं में वापस नहीं जा पाएँगी, क्योंकि परिवार अपने आर्थिक बोझ कम करने के लिये उन्हें बाल विवाह या बाल श्रम के गर्त में धकेल सकते हैं. 

 

इस वीडियो में मेडागास्कर की 16 वर्षीया अंतासा कहती हैं, "लड़कियों को स्कूल नहीं भेजने का विचार, इन इलाक़ों में वास्तव में संस्कृति का हिस्सा बन गया है".
 

(यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में व्यक्ति किये हैं). 

महामारी - एक लड़की की नज़र से

कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में करोड़ों बच्चों पर असर पड़ा है. स्कूल बन्द होने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिये अपनाए गए तालाबन्दी और अन्य उपायों ने लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,महत्वपूर्ण टीकों और पौष्टिक आहार से दूर कर दिया है. ख़ासतौर पर, लड़कियों के लिये स्थिति और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है. इस तरह की संकट स्थितियों के दौरान लिंग आधारित हिंसा और हानिकारक प्रथाओं का ख़तरा बढ़ जाता है – विशेषकर ग़रीब और कमज़ोर वर्ग की लड़कियों के लिये. अनुमानों के मुताबिक, स्कूल फिर से खुलने पर भी शायद बहुत सी लड़कियाँ फिर कभी भी वापस विद्यालय ना जा सकें या फिर हालात से मजबूर होकर बाल विवाह का शिकार हो जाएँ. 

#दुनिया, जो हम चाहते हैं...

#दुनिया जो हम चाहते हैं, 75 ऐसी तस्वीरों का विशेष संकलन है जो 130 से ज़्यादा देशों से प्राप्त हुई 50 हज़ार तस्वीरों में से चुनी गई हैं. ये संकलन दरअसल यूएन महासचिव की उस पुकार के जवाब में जुटाया गया है जिसमें उन्होंने दुनिया भर में लोगों से भविष्य के लिये उनकी प्राथमिकताओं उनके विचार सीधे भेजने के लिये कहा था. इस वीडियो में वर्चुअल प्रदर्शनी #TheWorldWeWant यानि '#दुनिया, जो हम चाहते हैं', से कुछ विजेता तस्वीरें पेश की गई हैं जिनमें हम सभी भविष्य के लिये साझा उम्मीदें और सपने संजोए हुए हैं. इस फ़ोटो प्रतियोगिता का आयोजन यूएन75 के समर्थन में मोबाइल ऐप - Agora ने किया था.

 

पूरी वर्चुअल प्रदर्शनी देखने के लिये यहाँ क्लिक करें

 

करोड़ों को भरपेट भोजन मयस्सर नहीं, कोविड-19 बना मुसीबतों का पहाड़

वर्ष 2020 के दौरान भी दुनिया भर में करोड़ों लोगों को जीने के लिये काफ़ी बुनियादी भोजन ख़ुराक भी मयस्सर नहीं है क्योंकि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक समस्याओं ने विश्व भर में भुखमरी का स्तर बढ़ा दिया है, और कोविड-19 महामारी ने तो ग़रीबी में मुसीबतों का पहाड़ ही खड़ा कर दिया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की एक ताज़ा रिपोर्ट में ये चिन्ता ज़ाहिर की गई है.

हानिकारक खाद्य प्रणालियों की कायापलट करने के लिये नई योजना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया की खाद्य प्रणालियों में रूपान्तरकारी बदलाव लाने के लक्ष्य से सोमवार को एक नई योजना शुरू  की है. ‘विश्व खाद्य सप्ताह’ के दौरान इस सन्दर्भ में कार्यक्रमों की शुरुआत हुई जिनकी अन्तिम कड़ी के रूप में अगले वर्ष सितम्बर में एक शिखर बैठक आयोजित की जाएगी. 

प्लास्टिक के विकल्प की तलाश

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रयासों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिये विभिन्न देशों के 17 युवाओं को एसडीजी चैम्पियन घोषित किया है. इन्हीं में से एक हैं, बांग्लादेश के ज़हीन रज़ीन. टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अपना योगदान देने के बारे में उनके काम, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में उनके विचार, उन्हीं की ज़ुबानी... (वीडियो)

अहिंसा दिवस और गाँधी@150

हर साल 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी के जन्म दिवस के मौक़े पर अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है. वर्ष 2020 में इस दिवस की थीम है - "गाँधी@150 - शान्ति और विकास के लिये एक अहिंसक रास्ता". संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस बार कोविड-19 महामारी के कारण किये गए ऐहतियाती उपायों के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन वर्चुअली किया. इस कार्यक्रम का वीडियो यहाँ देखिये है...

महासभा: जनरल डिबेट सम्पन्न, कोविड-19 के कारण 75वाँ सत्र इतिहास में दर्ज

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष (PGA) वोल्कान बोज़किर ने जनरल डिबेट का समापन करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि वैश्विक नेता व प्रतिनिधि महासभा के वार्षिक सत्र में व्यक्तिगत मौजूदगी के साथ शिरकत नहीं कर पाए. मंगलवार को उन्होंने कहा कि फिर भी कोविड-19 से बचने के लिये किये गए ऐहतियाती उपाय बहुपक्षवाद को उच्चतम स्तर पर होने से नहीं रोक पाए.