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कोविड-19: दक्षिण एशिया में 60 करोड़ बच्चों के जीवन में उलट-पुलट

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति के लिए संकट का कारण बन रही है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में देशों की सरकारों से त्वरित  कार्रवाई का आग्रह किया है ताकि एक पूरी पीढ़ी की आशाओं और आकाँक्षाओं को बर्बाद होने से बचाया जा सके. महामारी दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में तेज़ी से फैल रही है जहाँ विश्व की क़रीब एक चौथाई आबादी रहती है.

कोविड-19: लाखों बच्चों के बाल मज़दूरी के गर्त में धँसने का ख़तरा

पिछले दो दशकों के दौरान बाल श्रम  की समस्या से निपटने में एक बडी सफलता हासिल हुई है लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण इन प्रयासों में अब तक हुई प्रगति को एक बड़ा झटका लगा है. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा जारी एक साझा रिपोर्ट में कोविड-19 संकट के कारण लाखों बच्चों के बाल मज़दूरी का शिकार होने की आशंका जताई गई है और सरकारों से बच्चों की सहायता के लिए उपायों में निवेश करने की पुकार लगाई है. 

टिकाऊ विकास पर प्रगति के आकलन के लिए नया इंडेक्स जारी

भारत में नीति आयोग ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर आधारित 'इंडिया इंडेक्स' का दूसरा संस्करण जारी किया है जिससे यह जानने में मदद मिलेगी कि 2030 एजेंडा को हासिल करने में भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए प्रयास कितना सफल रहे हैं. 

पहाड़ों का महत्व, ख़ासकर युवाओं के लिए!

पृथ्वी के लगभग 27 प्रतिशत हिस्से पर पहाड़ विराजमान हैं और ये भी ध्यान देने की बात है कि ये पहाड़ एक टिकाऊ आर्थिक विकास की तरफ़ दुनिया की बढ़त में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 के अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया है. बुधवार, 11 दिसंबर को मनाए गए इस दिवस के मौक़े पर इस वर्ष की थीम रखी गई है - Mountains matter for Youth.