शांति और सुरक्षा

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...

योग दिवस: कोविड-19 के दबावों से निपटने में विश्व को भारतीय भेंट की अहमियत

संयुक्त राष्ट्र 21 जून को छठा अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है जिस दौरान मानव स्वास्थ्य और बेहतर जीवन में इस प्राचीन और व्यापक प्रक्रिया की भूमिका की अहमियत को पहचान दी जा रही है. कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अनेक तरह के दबावों और तनावों से निपटने के लिए भी योग को एक शक्तिशाली औज़ार समझा जाता है. 

शान्तिरक्षा में महिलाओं का बढ़ता योगदान

संयुक्त राष्ट्र की शान्तिरक्षा सुरक्षा कार्यों की आधारशिला है और महिला शान्तिरक्षक इसकी सफलता की कुन्जी हैं. आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा में नेतृत्व के पदों पर पहले से कहीं ज़्यादा महिलाएँ आसीन हैं. इसमें महिलाएँ सेना, पुलिस और नागरिक समाज का अंग बनकर संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत हैं. संयुक्त राष्ट्र शान्ति व्यवस्था, “महिला, शान्ति और सुरक्षा” पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. इसके तहत महिला अधिकारों को पूर्ण रूप से पाने के लिए महिलाओं को निर्णायक भूमिका में रहना होगा और अपने देशों में शान्तिरक्षकों की भूमिका भी निभानी होगी. निर्णय लेने में महिलाओं का सार्थक समावेश प्रभावशीलता को बढ़ाता है व नए दृष्टिकोण और समाधान उत्पन्न करता है, अधिक संसाधन पैदा करता है और हमारे प्रयासों को मज़बूत करता है.

 

देखें ये वीडियो फ़ीचर...

संकट काल में शान्तिरक्षक हैं - 'निस्वार्थ सेवा व बलिदान' के प्रतीक

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को ‘अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस’ के अवसर पर तीन हज़ार 900 से ज़्यादा उन सभी शान्तिरक्षकों को श्रृद्धासुमन अर्पित किए हैं जिन्होंने वर्ष 1948 से यूएन के झण्डे तले विश्व शान्ति व सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है.

रमज़ान करीम संदेश

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रमज़ान शुभकामना संदेश में कहा है कि इस बार का ये पवित्र मौक़ा बहुत मुश्किल भरे वक़्त में आया है. बहुत से लोग युद्ध और अशांन्ति वाले इलाक़ों में रहने को मजबूर हैं, उनका ख़याल रखना भी अहम है. साथ ही, महासचिव ने युद्धविराम की अपनी अपील भी दोहराई है...

यूनिफ़िल में भारतीय दल की पहल

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र का अंतरिम बल - यूनिफ़िल दुनियाभर के उन सभी डॉक्टरों और नर्सों का सम्मान करता है, जो कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे हैं. यूनिफ़िल ने भी स्थानीय समुदाय की मदद करने के सटीक उपाय किए हैं. देखिए इस वीडियो में...

धार्मिक हस्तियों से एकजुटता की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व भर की धार्मिक व आस्था हस्तियों से एकजुटता की अपील की है कि वो शांति की ख़ातिर काम करें और कोविड-19 के ख़िलाफ़ इंसानियत की साझा लड़ाई को बल दें. महासचिव ने इस वीडियो संदेश में अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों का भी अभिवादन किया है...

कोविड-19 पर नियंत्रण करने में धार्मिक एकजुटता की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर में सभी धर्मों के नेताओं से एकजुट होने का आग्रह करते हुए कहा है कि वो विश्व भर में शांति की ख़ातिर काम करें और कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ साझा लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करें.

विश्व पर गहरी छाप छोड़ने वाले पूर्व महासचिव हावियर पेरेज़ डि कुएयर के निधन पर शोक

संयुक्त राष्ट्र के पाँचवें महासचिव रहे हावियर पेरेज़ डि कुएयर का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. दो बार महासचिव रहे पेरेज़ डी कुएयर को शांतिवार्ता के रास्ते निकालने और कठिन दौर में विश्व संगठन का नेतृत्व करने के लिए याद किया जाता है.