शांति और सुरक्षा

बाधाओं से परे: फ़ातिमा ख़ामिस का शान्ति मिशन

सूडानी मूल की फ़ातिमा ख़ामिस  मध्य अफ्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र के मिशन में असाधारण योगदान कर रही हैं. कड़ी परम्पराओं वाले समाज में शिक्षा के लिये रास्ता बनाना और एक इजीनियर के रूप में काम करना फ़ातिमा ख़ामिस के लिये आसान नहीं रहा है, मगर उन्होंने बहुत सी बाधाएँ पार की हैं. उनकी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी - शान्ति ही मेरा मिशन है - वीडियो श्रंखला में...

शान्ति की ख़ातिर ख़ास करने की चाह: हुमा ख़ान

दक्षिण सूडान में तैनात, UNMISS की वरिष्ठ महिला सुरक्षा सलाहकार, हुमा ख़ान ने विभिन्न देशों की नौ अन्य महिलाओं सहितत उस वीडियों श्रृंखला में जगह बनाई है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘शान्ति ही मेरा मिशन है’ ’नामक अभियान के तहत जारी की गई है. 31 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 की 20वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में यह अभियान 1 अक्टूबर से शुरू किया गया. शान्तिरक्षक की भूमिका में हुमा ख़ान ने क्या-कुछ सीखा, क्या योगदान किया – सुनिये उनकी ज़ुबानी...

जीवन, शान्ति मिशन, महिलाएँ, एक झरोखा

हमारे पास जीने के लिये एक ही जीवन है. सामान्य जीवन किसी सौभाग्य से कम नहीं है, क्योंकि जिन लोगों का जीवन संघर्ष या किसी तरह की तबाही में उलझ जाता है, उनके लिये उससे निकलना कभी-कभी तो असम्भव नज़र आता है. शान्ति मिशन में महिलाओं की भूमिका पर नज़र डालती एक वीडियो श्रृंखला...

अहिंसा दिवस पर यूएन प्रमुख की वैश्विक युद्धविराम की ताज़ा पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरश ने 2 अक्टूबर को अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौक़े पर वैश्विक युद्धविराम की अपनी पुकार फिर दोहराई है. अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस महात्मा गाँधी के जन्म दिवस (जयन्ती) की याद में हर साल 2 अक्टूबर को मनाया जाता है, और वर्ष 2020 का ये दिवस कोरोनावायरस महामारी से हुई भारी मानवीय और सामाजिक-आर्थिक तबाही की छाया में मनाया जा रहा है.

यमन: युद्धरत पक्षों के बीच 1000 बन्दियों की रिहाई के लिये रज़ामन्दी

यमन में युद्धरत पक्ष बन्दियों के पहले समूह की रिहाई की के लिये रज़ामन्द हुए हैं. सप्ताहान्त के दौरान स्विट्ज़रलैण्ड़ में सप्ताह भर चली बैठक के आख़िर में ये रज़ामन्दी हुई जिसे संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने “एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव” क़रार दिया है.

शान्ति दिवस: हथियार डालने का आग्रह

अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनियाभर में संघर्षरत पक्षों से आग्रह किया कि वे अपने हथियार डालकर सदभाव का रास्ता अपनाएँ. महासचिव ने इस मौक़े पर वैश्विक युद्धविराम की याद भी दिलाई है. अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस 21 सितम्बर को मनाया जाता है. महासचिव का वीडियो सन्देश...

दरकती दुनिया को कोविड-19 से ख़तरा, शान्ति की पुकार

जापान में प्रचलित एक सिद्धान्त के अनुसार टूटी हुई वस्तुओं में भी ख़ूबियाँ तलाश की जाती हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को यूएन मुख्यालय में 21 सितम्बर को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस से पहले गुरूवार को आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम में वैश्विक आग्रह किया कि ऐसे समय जब दुनिया दरक रही है, कोविड-19 से उबरने की प्रक्रिया के दौरान इसी सिद्धान्त को अपनाए जाने की आवश्यकता है.  

कोविड19: यूनिफ़िल की मुस्तैदी

यूनिफ़िल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में कोविड-19 से बचाव के ऐहतियाती उपायों के तहत अपने शान्तिरक्षकौों के लिये सख़्त नियमों वाली रोटेशन व्यवस्था लागू की है. इसका मक़सद है – शान्तिरक्षकों और मेज़बान समुदाय को कोरोनावयरस के संक्रमण से बचाना. देखिये एक वीडियो रिपोर्ट...

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार के 25 वर्ष

यूएन महासचिव ने कहा है कि 25 वर्ष पहले बोसनिया हरज़गोविना के स्रेब्रेनीत्सा में नफ़रत के कारण हज़ारों मुसलमानों का जनसंहार कर दिया गया था. पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान के कहा था कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की वो नाकामी इतिहास का कभी पीछा नहीं छोड़ेगी. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कहना है कि पूरे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की ये ज़िम्मेदारी है कि उस जनसंहार के पीड़ितों को तकलीफ़ों से उबारकर सुलह-सफ़ाई व स्थिरता का माहौल बनाया जाए. वीडियो सन्देश...

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग.