शांति और सुरक्षा

इसराइल द्वारा 'ग़ैरक़ानूनी बस्तियों' को मंज़ूरी - जवाबदेही तय किये जाने की माँग

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने शुक्रवार को कहा है कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना के गम्भीर मामले की महज़ आलोचना करने के बजाय अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को आगे बढ़कर जवाब देना होगा. यूएन विशेषज्ञ का यह बयान इसराइल सरकार की उस घोषणा के बाद आया है जिसमें क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों में लगभग पाँच हज़ार नए घरों को बसाने की योजना को मंज़ूरी दे दी गई है. 

कोलम्बिया में, महिलाएँ ले जा रही हैं - शान्ति प्रक्रिया को आगे

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कोलम्बिया में वर्ष 2016 में हुए ऐतिहासिक शान्ति समझौते को पूर्ण व व्यापक रूप से लागू किये जाने की अहमियत को रेखांकित किया है. यूएन उपप्रमुख ने कहा कि कोरोनावायरस संकट के मद्देनज़र टिकाऊ और सहनशील समुदायों को सामर्थ्य प्रदान करने के लिये ऐसा किया जाना आवश्यक है.

 

 

फ्राँस: चर्च में हमले की कड़ी निन्दा, सहिष्णुता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने फ्राँस के दक्षिणी शहर नीस के एक चर्च में चाकू से किये गए हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की है. ख़बरों के अनुसार गुरुवार को हुए इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है. यूएन अलायन्स ऑफ़ सिविलाइज़ेशन्स के उच्च प्रतिनिधि मिगेल मोराटिनोस ने इस बर्बर हमले की निन्दा करते हुए सभी धर्मों व आस्थाओं में पारस्परिक सम्मान और भाईचारे व शान्ति की संस्कृति को बढ़ावा दिये जाने की पुकार लगाई है. 

सर्वजन के लिये शान्ति और प्रगति में महिला नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका

महिला सशक्तिकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र संस्था - UN Women की प्रमुख पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने आगाह किया है कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण निर्णय-निर्धारण प्रक्रियाओं में महिलाओं को अब भी समुचित प्रतिनिधित्व हासिल नहीं है. उन्होंने गुरूवार को सुरक्षा परिषद को मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए कहा कि हिंसाग्रस्त इलाक़ों में महिलाओं के लिये परिस्थितियाँ कहीं ज़्यादा ख़राब है.

कोविड-19: महामारी पर क़ाबू पाने के लिये इसराइल व फ़लस्तीन के बीच सहयोग की दरकार

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादैनॉफ़ ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए बताया कि महामारी ने इसराइल और फ़लस्तीन, दोनों के लिये गम्भीर हालात पैदा किये हैं. उन्होंने शान्ति स्थापना के लिये हर विकल्प पर विचार किये जाने की अहमियत को रेखांकित करते हुए आगाह किया कि अस्थिरता भरे माहौल में कोरोनावायरस के फलने-फूलने का ख़तरा है.

लीबिया: युद्धविराम पर दस्तख़त के बाद, फिर शुरू होगा राजनैतिक सम्वाद मंच

लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने वर्षों से इस युद्धग्रस्त देश में हाल ही में एक स्थायी युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त होने के बाद ‘लीबियाई राजनैतिक सम्वाद मंच’ फिर से शुरू करने की घोषणा की है. युद्धविराम के बाद जागी उम्मीदों के बीच यह राजनैतिक सम्वाद मंच फिर शुरू होने से एक टिकाऊ समाधान निकलने की उम्मीद भी जताई गई है.

अफ़ग़ानिस्तान: कॉलेज पर हमला, यूएन मिशन ने जताया क्षोभ

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) ने राजधानी काबुल में एक आत्मघाती हमले में एक कॉलेज को सुनियोजित ढँग से निशाना बनाए जाने पर गहरा क्षोभ व्यक्ति किया है. ख़बरों के अनुसार शनिवार रात को हुए इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है और अनेक अन्य घायल हुए हैं जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है. 

परमाणु हथियार निषेध सन्धि के लागू होने का मार्ग प्रशस्त

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘परमाणु हथियारों के निषेध पर सन्धि’ को लागू किये जाने से जुड़ी शर्तों के पूरा होने के बाद इस सन्धि पर मोहर लगाने वाले देशों की सराहना की है. होण्डूरास शनिवार को इस सन्धि पर मोहर लगाने वाले 50वाँ देश बन गया जिसके बाद, इस सन्धि के 22 जनवरी 2021 से लागू होने का रास्ता स्पष्ट हो गया है. 

सूडान और इसराइल में सम्बन्ध सामान्य होने से 'नए अवसरों' के सृजन की आशा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सूडान द्वारा इसराइल के साथ सम्बन्ध सामान्य करने की घोषणा को अपने संज्ञान में लेते हुए उम्मीद जताई है कि पारस्परिक सहयोग से अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व समृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. शनिवार को यूएन प्रमुख की ओर से यह बयान अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों में हुई सहमति की घोषणा के बाद जारी किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र कैसे करता है संघर्ष रोकथाम व निवारण

जब सदस्य देशों ने 75 वर्ष पहले यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किये थे, इसका मक़सद आने वाली पीढ़ियों को तीसरे विश्व युद्ध से बचाना था. इसका मक़सद संघर्ष टालना व रोकना भी था. इसलिये संयुक्त राष्ट्र के लिये संघर्ष निवारण अब भी एक केन्द्रीय प्राथमिकता है. फिर भी, सम्बन्ध पक्षों को शान्ति के लिये राज़ी करना बहुत कठिन काम है, ख़ासतौर से तब, जब वो शान्ति नहीं चाहते हों.