शांति और सुरक्षा

ईरान परमाणु समझौता - शान्ति सुनिश्चित करने का सबसे कारगर उपाय 

संयुक्त राष्ट्र में राजनैतिक और शान्ति निर्माण मामलों की प्रभारी और अवर महासचिव रोज़मैरी डिकार्लो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हुए समझौते – साझा व्यापक कार्ययोजना (Joint Comprehensive Plan of Action) - के भविष्य पर मँडराते सन्देह पर खेद जताया है. लेकिन उन्होंने ध्यान दिलाया कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शान्तिपूर्ण बनाए रखने के लिए यही सर्वश्रेष्ठ रास्ता है. 

मध्य पूर्व के लिए 'विनाशकारी' है फ़लस्तीनी इलाक़ों को छीनने की इसराइली योजना

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों को ग़ैरक़ानूनी ढंग से छीनने की योजना से पीछे हटने को कहा है. यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने इसराइल की इस कार्रवाई का फ़लस्तीनियों और पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी भरे शब्दों में विनाशकारी असर होने की आशंका जताई है. इससे पहले यूएन महासचिव ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ऐसी कोई भी एकतरफ़ा कार्रवाई अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का गम्भीर उल्लंघन होगी. 

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...

इसराइल से फ़लस्तीनी इलाक़े छीनने की योजना से पीछे हटने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इसराइल से फ़लस्तीन में क़ब्ज़ाग्रस्त पश्चिमी तट के हिस्सों को हड़प लेने की योजना छोड़ने का आग्रह किया है. ऐसी आशंका जताई गई है कि इसराइल द्वारा इन फ़लस्तीनी इलाक़ों को छीन लेने की कार्रवाई इसराइल द्वारा अगले हफ़्ते तक की जा सकती है. यूएन के विशेष दूत निकोलाय म्लादेनॉफ़ ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि कई दशकों की शान्ति प्रक्रिया दाँव पर लगी है.

अफ़ग़ानिस्तान में कोविड-19 के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले घोर निन्दनीय

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने कहा है कि देश में कोविड-19 महामारी फैलने के दो महीने के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं पर 15 हमले किए गए. रविवार को प्रकाशित एक ताज़ा रिपोर्ट में दिखाया गया है कि 11 मार्च और 23 मई के बीच हुए हमलों में किस तरह से स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाया गया और किस हद तक स्वास्थ्य सेवाओं को नुक़सान पहुँचा.

योग दिवस: कोविड-19 के दबावों से निपटने में विश्व को भारतीय भेंट की अहमियत

संयुक्त राष्ट्र 21 जून को छठा अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है जिस दौरान मानव स्वास्थ्य और बेहतर जीवन में इस प्राचीन और व्यापक प्रक्रिया की भूमिका की अहमियत को पहचान दी जा रही है. कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अनेक तरह के दबावों और तनावों से निपटने के लिए भी योग को एक शक्तिशाली औज़ार समझा जाता है. 

‘दुनिया को बदलने से पहले ख़ुद को बदलें’

कैप्टन तन्वी शुक्ला काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में यूएन मिशन (MONUSCO) में भारतीय दल की महिला टीम की कमाण्डर हैं. कैप्टन शुक्ला के मुताबिक शान्तिरक्षा मिशन का हिस्सा बनने पर उन्हें बहुत कुछ सीखने, विविध पृष्ठभूमियों से आए लोगों से मिलने-जुलने और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने का अवसर मिला है. उनका कहना है कि हमें पहले ख़ुद में वो बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए जैसा कि हम दूसरों में देखना चाहते हैं. 

लेबनान में महात्मा गाँधी पार्क का नवीनीकरण

दुनिया को अहिंसा का गुरू मन्त्र देने वाले भारत के राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की स्मृति में दक्षिण-पूर्वी लेबनान के अबल अल साक़ी शहर में 1999 में भारतीय शान्तिरक्षकों ने एक पार्क का निर्माण किया था. दक्षिण-पूर्वी लेबनान के अबल अल साक़ी में तैनात यूनीफ़िल की वर्तमान भारतीय बटालियन ने हाल ही में इस पार्क की मरम्मत और नवीनीकरण का बीड़ा उठाया. 

यूएन दूत की चेतावनी, सीरिया में समय किसी के पक्ष में भी नहीं

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पेडरसन ने कहा है कि देश में आर्थिक हालात बदतर होते जा रहे हैं और इसलिए जल्द ही ऐसा रास्ता ढूँढा जाना होगा जिससे लोग अपनी पीड़ाओं से उबर सकें और अपने भविष्य को आकार दे सकें.