शांति और सुरक्षा

नागासाकी: जीवितों का साहस बने परमाणु हथियारों के उन्मूलन की प्रेरणा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव  एंतोनियो गुटेरेश ने जापान के नागासाकी शहर में परमाणु हमले के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हीमाकुशा लोगों के साहस और सहनशील नज़रिये की सराहना की है. उस परमाणु हमले में जीवित बचे लोगों को हीबाकुशा कहा जाता है. 

लेबनान विस्फोट: 'त्वरित कार्रवाई से ही तकलीफ़ें कम की जा सकेंगी'

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि लेबनान को विस्फोक से उत्पन्न हुए संकट उबरने और बेहतर तरीक़े से पुनर्निर्माण करने के लिये “हम सभी को एकजुट होने की ज़रूरत होगी”. रविवार को दानदाताओं के एक वर्चुअल सम्मेलन में आमिना जे मोहम्मद ने ये पुकार लगाई.

लेबनान को तत्काल सहायता मुहैया कराने में लगीं यूएन एजेंसियाँ

लेबनान की राजधानी बेरूत में मंगलवार को हुए घातक बम विस्फोट हज़ारों लोग घायल हुए और लाखों लोगों को बेघर भी होना पड़ा, तबाही के स्तर को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने प्रभावितों के लिये राहत कार्य तत्काल और बहुत तेज़ी से शुरू किये. संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों का व्यापक नैटवर्क एक जुट होकर राजधानी बेरूत में प्रभावित लोगों की मदद करने में लग गया है ताकि लोगों को फिर से उनके पैरों पर खड़ा किया जा सके. अगर आप भी बेरूत के लोगों की मदद करने के बारे में सोच रहे हैं तो हमने यहाँ यूएन एजेंसियों द्वारा किये जा रहे सहायता व राहत कार्यों के बारे में कुछ विवरण प्रस्तुत किया है और आप चाहें तो किस तरह योगदान कर सकते हैं.

हिरोशिमा पर परमाणु हमले के 75 वर्ष – पीड़ितों ने चुना 'उम्मीद और मेलमिलाप' का मार्ग

75 वर्ष पहले 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर में परमाणु बम हमले में जान-माल की भारी तबाही हुई थी जिससे प्रभावित हुए लोगों की स्मृति में गुरुवार को जापान में शान्ति स्मृति समारोह का आयोजन किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस समारोह में पीड़ितों को श्रृद्धांजलि अर्पित की.  महासचिव ने इस अवसर पर आगाह करने के अन्दाज़ में कहा कि परमाणु शस्त्रों से सुरक्षा मज़बूत नहीं बल्कि और भी कमज़ोर होती है.

अफ़ग़ानिस्तान: जलालाबाद के जेल परिसर में आतंकी हमले की कड़ी निन्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद शहर स्थित जेल परिसर में हुए एक आतंकी हमल को जघन्य और कायराना क़रार देते हुए कड़े शब्दों में उसकी निन्दा की है. सोमवार, 3 अगस्त, को हुए इस हमले में आम नागरिकों सहित 29 लोगों की मौत हो गई थी और अनेक लोग घायल हुए थे. इस्लामिक स्टेट (दाएश) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी लेने का दावा किया है. 

भारत से जम्मू कश्मीर में चिन्ताजनक मानवाधिकार स्थिति का तत्काल हल निकालने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत सरकार और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से जम्मू कश्मीर में आम आबादी के मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी रहने की स्थिति पर ध्यान देने के लिये तुरन्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है. इन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किये जाने का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर ये पुकार लगाई है.

लेबनान: बेरूत बन्दरगाह पर भीषण विस्फोट, प्रभावितों की मदद के लिये यूएन सक्रिय

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि लेबनान की राजधानी बेरूत के बन्दरगाह इलाक़े में एक भीषण विस्फोट हुआ है जिसके बाद राहत अभियान में सक्रियता से सहायता प्रदान की जा रही है. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बेरूत के कई इलाक़े बुरी तरह थरथरा उठे. इस घटना में अनेक लोग हताहत हुए हैं जिनमें यूएन के शान्तिरक्षक भी हैं.

जनसंहार के छह वर्ष - यज़ीदी समुदाय के लिये न्याय सुनिश्चित करने की पुकार

आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (दाएश) ने छह वर्ष पहले इराक़ में धार्मिक अल्पसंख्यक यज़ीदी समुदाय के ख़िलाफ़ जनसंहारी कृत्य शुरू किये थे. इस दुखद अध्याय के पीड़ितों की स्मृति और उनके समर्थन में सोमवार को एक वर्चुअल समारोह का आयोजन हुआ जिसमें नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता नादिया मुराद ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अत्याचारों का शिकार और यज़ीदी समुदाय के जीवित बच गए लोगों के लिये न्याय सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है.  

सीरिया में ग़रीबी और ज़रूरतों का बढ़ता दायरा

हिंसा प्रभावित सीरिया में मानवीय सहायता अभियान के ज़रिये एक महीने में 68 लाख लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है लेकिन बदहाल आर्थिक हालात से ग़रीबी गहरी हो रही है जिससे देश में ज़रूरतमन्दों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिये संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के प्रमुख मार्क लोकॉक ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को देश में हालात से अवगत कराते हुए यह जानकारी दी है.

अफ़ग़ानिस्तान: नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और शान्ति वार्ता शुरू करने का आग्रह

अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या में वर्ष 2020 के पहले छह महीनों में 2019 की तुलना में 13 फ़ीसदी की कमी आई है, इसके बावजूद स्थानीय लोगों के लिये देश में परिस्थितियाँ अब भी घातक बनी हुई हैं जिनके मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सभी पक्षों से आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और शान्ति स्थापना के लिये बातचीत की मेज़ पर लौटने की पुकार लगाई है. यूएन की नई रिपोर्ट के मुताबिक 2020 के प्रथम छह महीनों के दौरान लगभग साढ़े तीन हज़ार आम लोग हताहत हुए हैं. इनमें एक हज़ार 282 की मौत हुई है ौर दो हज़ार 176 घायल हुए हैं.