कानून और अपराध की रोकथाम

ग़ैर-क़ानूनी मानव हत्या के मामलों में चिंताजनक बढ़ोत्तरी

विश्व भर में साल 2017 में चार लाख 64 हज़ार लोग मानव हत्या (होमीसाइड) का शिकार हुए और यह संख्या इसी अवधि में सशस्त्र हिंसा की वजह से होने वाली मौतों की तुलना में पांच गुना ज़्यादा है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की ओर से जारी नई रिपोर्ट ‘ग्लोबल स्टडी ऑन होमीसाइड 2019’ रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं.

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में बदलावों पर गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत के असम राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में लगातार किए जा रहे बदलावों और लाखों लोगों पर इनसे होने वाले भारी नुक़सान की संभावनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. प्रभावित होने वाले ज़्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदायों से हैं. इन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इन अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे नफ़रत भरे माहौल पर भी गंभीर चिंता जताई है.

यातना पर हर हाल में प्रतिबंध ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि निसंदेह यातना पर हर हाल में रोक लगनी ज़रूरी है, मगर फिर भी दिन-ब-दिन इस मूल सिद्धांत का उल्लंघन होता देखा जा सकता है - ख़ासतौर पर बंदीगृहों, जेलों, पुलिस थानों, मनोरोग संस्थानों और दूसरे ऐसे स्थानों पर जहाँ क़ैद करने वाले लोग, बंदियों पर अत्याचार करने की हैसियत रखते हों.

निगरानी / सर्वेलेंस तकनीक पर प्रतिबंध लगाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि जब तक निगरानी तकनीकों यानी सर्वेलेंस टैक्नोलॉजी के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए "प्रभावी" राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण नियम न बन जाएँ, तब तक निगरानी तकनीकों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ती समस्याएं

मादक दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल असर अनुमान से कहीं ज़्यादा गंभीर और व्यापक है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है. रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व में मादक दवाओं और पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाली समस्याओं से साढ़े तीन करोड़ लोग पीड़ित हैं लेकिन हर सात में से एक पीड़ित का ही उपचार हो पाता है.

यौन उत्पीड़न: हादसों के अंधेरों से उम्मीद की किरण

संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों और उनके बैनर तले काम करने वाले लोगों द्वारा यौन शोषण और उत्पीड़न का शिकार हुए लगभग तीन हज़ार 340 महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को सहारा और समर्थन देकर उनकी ज़िंदगी फिर से पटरी पर लाने में कामयाबी मिली है. 2016 में गठित किए गए संयुक्त राष्ट्र ट्रस्ट कोष की बदौलत ये संभव हो सका है.

खशोगी हत्या मामले में सघन जाँच की माँग

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ता ने कहा है कि सऊदी अरब मूल के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की ज़िम्मेदारी देश के सत्तारूढ़ शाही परिवार के उच्चस्तरीय अधिकारियों पर है.

स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ता ने हत्या के इस अपराध में सऊदी अरब सरकार की ज़िम्मेदारी ठहराने का आहवान किया है.

'नफ़रत को नोटिस मिल चुका है' - निपटने के लिए नई रणनीति

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत फैलाने वाले संदेशों और भाषणों यानी हेट स्पीच पर धावा बोलते हुए सदस्य देशों का आहवान किया है कि सभी को बहुत ज़्यादा मुस्तैदी से काम लेना होगा. मंगलवार को हेट स्पीच पर संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना शुरू करते हुए उन्होंने कहा, “हेट स्पीच को अपने पैर जमाने के लिए कुछ ज़मीन मिल गई है मगर इसे अब नोटिस भी मिल चुका है.”

वृद्धों पर यौन हमले सभ्य समाजों के माथे पर कलंक

वृद्धावस्था में अक्सर लोगों के साथ ख़राब बर्ताव होने के मामले तो पूरी दुनिया में सामने आते हैं मगर उनका यौन शोषण होने के मामले होते तो हैं लेकिन उनका अक्सर पता नहीं चलता. वृद्ध लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शनिवार, 15 जून को विश्व दिवस (World Elder Abuse Awareness Day) मनाया जा रहा है.

भारत में वन्यजीव अपराधों की संख्या बढ़ी

वन्यजीवों की अवैध तस्करी से दुनिया भर में जीवों की कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं. जानवरों को पालतू बनाने की प्रवृत्ति और उनके चिकित्सकीय गुणों के कारण भारत में भी वन्यजीवों की तस्करी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और आसानी से पैसा कमाने के लालच में युवा भी इस काम में शामिल हो रहे हैं.