कानून और अपराध की रोकथाम

मानव तस्करी की ज़्यादातर शिकार महिलाएँ व लड़कियाँ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा है कि मानव तस्करी एक ऐसा जघन्य अपराध है जिससे दुनिया का हर इलाक़ा प्रभावित होता है, विशेषरूप में महिलाएँ और बच्चे. मंगलवार, 30 जुलाई को मानव तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर महासचिव ने ये संदेश दिया है. मानव तस्करी को रोकने के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष ये दिवस 30 जुलाई को मनाया जाता है.

कुलभूषण जाधव को मौत की सज़ा पर ‘फिर से विचार करे पाकिस्तान’

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) ने भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सज़ा पर पुनर्विचार किए जाने का आदेश दिया है. पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव पर जासूसी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगाए थे लेकिन भारत ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन किया है.

सोमालिया में आतंकवादी हमले की निंदा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमालिया के दक्षिणी हिस्से में शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है.

मामूली अपराधियों का आतंकवाद की ओर रुख़ पैदा कर रहा है ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस के दौरान ये जानकारी सामने आई है कि छोटे-छोटे अपराधी अवसर का लाभ उठाने के लिए आतंकवाद को अपना रहे हैं, जोकि चिंता का विषय है. संयुक्त राष्ट्र अंतरक्षेत्रीय अपराध और न्याय अनुसंधान संस्थान (यूएनआईसीआरआई) के साथ काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय सलाहकार तमारा मकरेंको ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के ख़तरों पर खुली बहस के दौरान इस संबंध में जानकारी को साझा किया.

ग़ैर-क़ानूनी मानव हत्या के मामलों में चिंताजनक बढ़ोत्तरी

विश्व भर में साल 2017 में चार लाख 64 हज़ार लोग मानव हत्या (होमीसाइड) का शिकार हुए और यह संख्या इसी अवधि में सशस्त्र हिंसा की वजह से होने वाली मौतों की तुलना में पांच गुना ज़्यादा है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की ओर से जारी नई रिपोर्ट ‘ग्लोबल स्टडी ऑन होमीसाइड 2019’ रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं.

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में बदलावों पर गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत के असम राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में लगातार किए जा रहे बदलावों और लाखों लोगों पर इनसे होने वाले भारी नुक़सान की संभावनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. प्रभावित होने वाले ज़्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदायों से हैं. इन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इन अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे नफ़रत भरे माहौल पर भी गंभीर चिंता जताई है.