मानवाधिकार

कश्मीर में घटनाक्रम से 'मानवाधिकारों की स्थिति बदतर होगी'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधान, अनुच्छेद 370, को ख़त्म किए जाने से वहां लोगों की बुनियादी लोकतांत्रिक आज़ादी पर जोखिम और ज़्यादा बढ़ जाएगा. यूएन मानवाधिकार एजेंसी ने क्षेत्र में संचार माध्यमों पर लगी पाबंदियों और सूचना पर पूरी तरह रोक लगाए जाने पर भी  गंभीर चिंता जताई है.

म्यांमार की सेना की व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक की माँग

म्यांमार की सेना पर आरोप लगा है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर व्यापार के ज़रिए सेना जो धन एकत्र कर रही है उसका इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को अंजाम देने में किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के स्वंतत्र समूह की एक नई रिपोर्ट में म्यांमार में सेना के व्यापारिक हितों को गहराई से परखा गया है और ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है.

कश्मीर मुद्दे पर संयम बरतने का आग्रह

संयक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो कश्मीर क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति पर नज़दीकी से नज़र रखा रहा है और भारत व पाकिस्तान से कश्मीर मुद्दे पर संयम बरतने का आग्रह किया है. 

सशस्त्र संघर्षों में फंसे बच्चों के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे

बच्चों और सशस्त्र संघर्षों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गांबा ने कहा है कि सशस्त्र संघर्षों में फंसे बच्चों की मदद के लिए सुरक्षा परिषद को एकजुट होना होगा. शुक्रवार को उन्होंने कहा कि बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुज़ारने को मजबूर हैं और उनकी व्यथा को देखते हुए सुरक्षा परिषद को एक साथ मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है.

सशस्त्र संघर्षों का बच्चों पर बढ़ता क़हर

दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों में मारे जाने वाले और अपंग होने वाले बच्चों की संख्या वर्ष 2018 में 12 हज़ार का आंकड़ा पार कर गई. जब से संयुक्त राष्ट्र ने इस विषय में आकंड़ों की निगरानी करना आरंभ किया है तब से यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. सोमालिया, सीरिया, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य और माली जैसे देशों में हिंसा बच्चों से उनका बचपन छीन रही है. सशस्त्र संघर्षों में बच्चों की व्यथा को टटोलती एक नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है.

अफ़ग़ान शांति में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने रविवार को एक  ज़ोरदारअपील जारी करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों को अतीत की तकलीफ़ों और मतभेदों को भुलाकर सुलह करनी चाहिए और देश में शांति स्थापना के प्रयासों में महिलाओं को भी अहम भूमिका देनी चाहिए. आमिना मोहम्मद ने संक्षिप्त अफ़ग़ान यात्रा के दौरान रविवार को ये भी कहा कि एक ऐसी राजनैतिक प्रक्रिया क़ायम की जाए जिसमें सभी की भागीदारी हो, ख़ासतौर से महिलाओं की आवाज़ को वास्तविक रूप में प्रमुख जगह मिले.

नेलसन मंडेला के पद चिन्हों पर चलने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्व में गरिमामय जीवन और समानता के लिए संघर्ष में नेलसन मंडेला एक असाधारण पैरोकार थे और सार्वजनिक सेवा से जुड़े लोगों को उनका अनुकरण करना चाहिए. रंगभेद के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ने वाले और लोकतांत्रिक ढंग से दक्षिण अफ़्रीका के पहले राष्ट्रपति चुने गए नेलसन मंडेला को सम्मान के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर यूएन प्रमुख ने उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी है.  

नौनिहालों को कुपोषण के गर्त से बचाने की ख़ातिर

"संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता व्यवस्था के पैरोकारों के रूप में हम सभी ने शून्य में ताकती आँखों को देखा है, आँखें एक ऐसे बच्चे की जिसका शरीर कुपोषण की वजह से हड्डियों ढाँचा भर रह गया है जिसमें जीवन जैसे अंतिम साँसें गिन रहा हो, उसकी धीमी गति से आती-जाती साँसों से ही बस उसके जीवित होने का  पता चलता है." ये शब्द हैं संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता के कार्यों में सक्रिय एजेंसियों के जो दुनिया भर में कुपोषण के शिकार बच्चों का हालत बयान करने के लिए व्यक्त किए हैं.

लीबिया: हिरासत में रखे गए शरणार्थियों और प्रवासियों को रिहा करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और यूएन प्रवासन एजेंसी के प्रमुखों ने लीबिया में हिरासत में रखे गए साढ़े पांच हज़ार से ज़्यादा शरणार्थियों और प्रवासियों को रिहा करने की अपील की है. यूएन अधिकारियों ने एक साझा बयान में हिरासत केंद्रों से लोगों को व्यवस्थित ढंग से रिहा करने की और उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है.

अमेरिका: हिरासत केंद्रों की बदहाली पर यूएन चिंतित

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि अमेरिकी सीमा में दाख़िल हाेने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों  के लिए बनाए गए हिरासत केंद्रों में बच्चों को भयावह परिस्थितियों  में रखा जा रहा है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आप्रवासन प्रक्रिया के दौरान कभी भी बच्चों को हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए और ना ही उन्हें परिवार से अलग किया जाना चाहिए.