मानवाधिकार

अफ़ग़ानिस्तान: सहायता सम्मेलन में टिकाऊ युद्धविराम लागू करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ उच्चायुक्तों ने अफ़ग़ानिस्तान में बहुत लम्बे समय से चले आ रहे संघर्ष और अशान्ति को ख़त्म किये जाने का आहवान किया है. उन्होंने सोमवार को जिनीवा में हुए एक प्रमुख सम्मेलन में कहा कि देश में सामान्य स्थिति तभी लौट सकती है जब एक टिकाऊ युद्धविराम लागू किया जाए.

संयुक्त राष्ट्र के भीतर नस्लवाद का मुक़ाबला करने के लिये सम्वाद

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संगठन के कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए इस विश्व संस्था में नस्लवाद का मुक़ाबला किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. गुरूवार को इस सम्बोधन में उन्होंने नस्लवाद पर विचार-विमर्श का एक सिलसिला भी शुरू किया.

कम्बोडिया: मानवाधिकार कार्यक्षेत्र को सीमित करने के प्रयासों की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने कम्बोडिया में सिविल सोसायटी पर बढ़ते प्रतिबन्धों पर चिन्ता व्यक्त की है और व्यवस्थित रूप से बन्दी बनाए गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तुरन्त रिहा करने और उनका आपराधिकरण रोके जाने का आग्रह किया है. 

मोज़ाम्बीक़: हिंसा प्रभावित इलाक़ों में मानवाधिकार हनन और सुरक्षा हालात पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि उत्तरी मोज़ाम्बीक़ के काबो डेलगाडो प्रान्त में बदतर होते सुरक्षा हालात पर चिन्ता बढ़ रही है. यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने हिंसा प्रभावित इलाक़ों में आम लोगों के साथ क्रूरता बरते जाने और स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, घरों व सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाये जाने पर क्षोभ ज़ाहिर किया है. 

नफ़रत के सभी रूपों का विरोध हो, यूएन प्रमुख की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वैश्विक समुदाय से नफ़रत के सभी रूपों के ख़िलाफ़ खड़ा होने और ऐसे झूठ व घृणाओं को नकारने का आहवान किया है जो अतीत में नाज़ीवाद के उभार और मौजूदा दौर में समाजों में दरारें पैदा करने के लिये ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा है कि कोविड-19 के संक्रमण के फैलाव के साथ-साथ यहूदीवाद-विरोध और पहचान-आधारित नफ़रत के अन्य रूपों का भी प्रसार हो रहा है.  

म्याँमार  में ‘शान्तिपूर्ण, व्यवस्थित व विश्वसनीय’ चुनावों की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में 8 नवम्बर को होने वाले चुनाव को स्थानीय जनता के लिये एक अहम पड़ाव बताते हुए उम्मीद ज़ाहिर की है कि इससे देश में समावेशी टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. यूएन प्रमुख ने भरोसा जताया है कि सफलतापूर्वक चुनाव सम्पन्न होने से रोहिंज्या शरणार्थियों की सुरक्षित और गरिमामय ढँग से वापसी का रास्ता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी. 

बोसनिया हरज़ेगोविना: कुछ राजनेता अब भी 'मूल योरोपीय मूल्यों' की अनदेखी कर रहे हैं

बोसनिया हरज़ेगोविना के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के एक उच्च प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि 25 वर्ष पहले इसी महीने एक शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद वहाँ ख़ासी प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन अब भी कुछ राजनेता मूल योरोपीय मूल्यों की अनदेखी करते हैं, और यहाँ तक कि युद्धापराधियों का महिमामण्डन भी करते हैं.

इसराइल द्वारा पश्चिमी तट में घर ढहाने से, बच्चों सहित अनेक फ़लस्तीनी बेघर

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता संयोजन कार्यालय (OCHA) ने ख़बर दी है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट में इसराइली अधिकारियों द्वारा फ़लस्तीनी लोगों के अनेक घर और अन्य ढाँचे ढहा दिये हैं जिसके कारण 73 फ़लस्तीनी बेघर हो गए हैं जिनमें 41 बच्चे हैं. हमसा अल बक़ाई इलाक़े में हुई इसराइली कार्रवाई में फ़लस्तीनियों का सामान भी नष्ट किया गया है.

चुनावी पृष्ठभूमि में विपक्षी सांसदों के मानवाधिकार हनन के आरोप

अन्तरराष्ट्रीय संसदीय संघ (IPU) ने विभिन्न देशों में चुनाव प्रक्रिया के दौरान सांसदों के मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को अपने संज्ञान में लिया है. बेलारूस, वेनेज़ुएला, आइवरी कोस्ट और तंज़ानिया में चुनावों के सन्दर्भ में विपक्षी सांसदों के बुनियादी मानवाधिकारों – अभिव्यक्ति की आज़ादी, शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने और आवाजाही के अधिकार – पर गम्भीर पाबन्दियाँ लगाई गई हैं जिनके मद्देनज़र उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आहवान किया गया है.    

म्याँमार: 'लोकतन्त्र की जीवन रेखा' का महत्व कम नहीं करने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने म्याँमार सरकार और सेना से देश में आम चुनाव से पहले पत्रकारों और छात्र प्रदर्शनकारियों समेत विरोधी गुटों के समर्थकों का उत्पीड़न रोकने का आग्रह किया है. म्याँमार में 8 नवम्बर को चुनाव होने है लेकिन उससे पहले 'लोकतन्त्र की जीवन रेखा' समझे जाने वाले अधिकारों पर पाबन्दियाँ लगाए जाने के आरोप बढ़ने पर चिन्ता जताई गई है.