मानवाधिकार

ईरान: मानवाधिकार कार्यकर्ता बन्दियों को, कोविड-19 के जोखिम में, रिहा करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने ईरान से क़ैद में रखे गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और राजनैतिक बन्दियों को रिहा करने की पुकार लगाई है. मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इन तमाम बन्दियों की स्वास्थ्य स्थिति पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए उनके कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आने की भी आशंका जताई है.

ज़्यादा समावेशी समाज बनाने के लिये बुज़ुर्गों के सुझाव और विचार सुनें, यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के माहौल में, दुनिया ऐसे ग़ैर-आनुपातिक और अत्यन्त गम्भीर प्रभावों का सामना कर रही है जो इस वायरस ने वृद्धजन के स्वास्थ्य, अधिकारों और रहन-सहन पर छोड़े हैं. यूएन महासचिव ने ये विचार हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाए जाने वाले वृद्धजन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर व्यक्त किये हैं.

मावनवाधिकार परिषद के "आँख और कान" के सामने वित्तीय संकट

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त स्वतन्त्र मानवाधिकर विशेषज्ञों ने आगाह करते हुए कहा है कि धन की कमी होने के कारण उनका कामकाज जोखिम में पड़ता नज़र आ रहा है. सोमवार को सदस्य देशों को जारी एक अपील में उन्होंने कहा कि उनके कामकाज के लिये समुचित धनराशि की उपलब्धता अनेक वर्षों से चिन्ता का कारण रही है, लेकिन कोविड-19 महामारी के संकट ने उनके कामकाज को और भी ज़्यादा कठिन बना दिया है.

भारत: रेलवे पटरियों के पास रहने वाले लाखों लोगों को घरों से बेदख़ल करने पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने भारत की राजधानी दिल्ली में रेलवे पटरियों के किनारे रहने वाले लगभग ढाई लाख लोगों को अपने घरों से बेदख़ल करने के भारतीय सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर चिन्ता व्यक्त की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के क़दम से प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय अधिकार सन्धियों के तहत देशों के दायित्वों का उल्लंघन होगा.

यमन: युद्धरत पक्षों के बीच 1000 बन्दियों की रिहाई के लिये रज़ामन्दी

यमन में युद्धरत पक्ष बन्दियों के पहले समूह की रिहाई की के लिये रज़ामन्द हुए हैं. सप्ताहान्त के दौरान स्विट्ज़रलैण्ड़ में सप्ताह भर चली बैठक के आख़िर में ये रज़ामन्दी हुई जिसे संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने “एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव” क़रार दिया है.

समावेश व लोगों की ज़्यादा सहभागिता से शासन नीतियाँ बेहतर होंगी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ना केवल कोविड-19, बल्कि जलवायु परिवर्तन, ज़्यादा भागीदारी वाली राजनीति व मानवाधिकारो के लिये जद्दोजहद, और कम होता सार्वजनिक अविश्वास, इन सभी चुनौतियों ने समाजों को कड़ी निगरानी के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है जिन्हें सामाजिक व आर्थिक अन्यायों ने अपनी चपेट में ले रखा है.

म्याँमार: राख़ीन प्रान्त में हमलों में बच्चों की मौतों को रोकना होगा - मानवाधिकार विशेषज्ञ

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने मंगलवार को कहा है कि देश के राख़ीन प्रान्त में गाँवों पर सुरक्षा बलों के हमले तुरन्त रोकने होंगे, और तुरन्त संघर्षविराम घोषित होना चाहिये.

विकलाँगता की बाधाओं से परे...

भारत, भूटान, मालदीव और श्रीलंका के लिये यूनेस्को के निदेशक और भारत में यूनेस्को के प्रतिनिधि, एरिक फ़ॉल्ट मानते हैं कि विकलाँग समुदाय में असीम क्षमताएँ मौजूद हैं और सही क़दम उठाकर उनसे उचित लाभ उठाया जा सकता है. पढ़िये, एरिक फ़ॉल्ट का ब्लॉग...

कोविड-19: निर्धनों को दासता के आधुनिक रूपों से बचाने की पुकार

देशों की सरकारों द्वारा समय रहते सहायता के समुचित प्रयास नहीं किये जाने के कारण विश्व भर के लाखों-करोड़ लोग कोविड-19 महामारी के कारण दासता व शोषण के समकालीन रूपों के शिकार हो सकते हैं. यह चेतावनी दासता के समकालीन रूपों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर तोमोया ओबोकाता की ओर से जारी की गई है जिन्होंने बुधवार को मानवाधिकार परिषद के वर्चुअल सत्र के दौरान अपनी पहली रिपोर्ट पेश की है. 

सीरिया: आमजन पर ज़ुल्म ढाने में सभी पक्ष हैं शामिल, जाँच आयोग की रिपोर्ट


सीरिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के जाँच आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2020 में युद्धविराम लागू होने के बाद से बड़े पैमाने वाली युद्धक गतिविधियों में तो कुछ कमी आई है, मगर अब भी सशस्त्र गुट आम लोगों पर बहुत ज़ुल्म ढा रहे हैं, और जानबूझकर व सोचसमझकर लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है.