मानवाधिकार

म्याँमार: यूएन प्रमुख ने प्रदर्शनों पर घातक हिंसा के प्रयोग की निन्दा की

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में, प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग किये जाने की निन्दा की है. ध्यान रहे कि म्याँमार में, सेना द्वारा, 1 फ़रवरी 2021 को, सरकार अपने हाथों में लेने के विरोध में, प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है.

काँगो: 30 लाख बच्चों का जीवन और भविष्य जोखिम में, यूनीसेफ़ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में, विस्थापित लगभग 30 लाख बच्चों की गम्भीर स्थिति की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया है जिन्हें लड़ाकों की क्रूर हिंसा और अत्यन्त गम्भीर भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है.

महामारी के बाद की दुनिया - असमानता व नस्लवाद के ख़ात्मे का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने नस्लवाद, भेदभाव, और विदेशियों के प्रति नापसन्दगी व डर से उपजी सामाजिक व आर्थिक विषमताओं को उजागर किया है. यूएन प्रमुख ने गुरुवार को सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए महामारी से पुनर्बहाली में ज़्यादा समावेशी समाज बनाए जाने का आहवान किया है. 

भारत: जम्मू कश्मीर में बदलावों से 'अल्पसंख्यकों के अधिकार कमज़ोर होने का जोखिम'

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि भारत के जम्मू कश्मीर राज्य की स्वायत्तता समाप्त किये जाने और नए क़ानून लागू किये जाने से मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की राजनैतिक भागीदारी का स्तर घटने की आशंका है. मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गुरूवार को जारी अपने वक्तव्य में, भारत सरकार से राज्य की जनता के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. 

म्याँमार: रैली से पहले हिंसा की आशंका, मानवाधिकार विशेषज्ञ की कड़ी चेतावनी

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने बुधवार को यंगून में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों से पहले हिंसा की आशंका जताई है. स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कड़े शब्दों में कहा है कि म्याँमार ऐसे पड़ाव पर है जहाँ सेना, जनता के ख़िलाफ़ पहले से भी बड़े अपराधों को अंजाम दे सकती है. उन्होंने ध्यान दिलाया है कि स्थानीय लोगों की बुनियादी स्वतन्त्रता और मानवाधिकारों के दमन को तुरन्त बन्द किया जाना होगा. 

अफ़ग़ानिस्तान: तीन वर्षों में 65 मीडियाकर्मियों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गँवानी पड़ी ज़िन्दगी

हाल के वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मीडियाकर्मियों पर हमलों और उनके मारे जाने की घटनाओं में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2018 से अब तक देश में 65 पत्रकार, मीडियाकर्मी और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं. सितम्बर 2020 में अफ़ग़ान शान्ति प्रक्रिया की शुरुआत के बाद से 31 जनवरी 2021 तक कम से कम 11 मानवाधिकार कार्यकर्ता और मीडियाकर्मी लक्षित हमलों में मारे गए हैं. 

म्याँमार में हालात पर चिन्ता, बुनियादी अधिकारों की रक्षा का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में हालात पर गहरी चिन्ता जताते हुए सेना और पुलिस से शान्तिपूर्ण सभा के अधिकार का पूर्ण सम्मान किये जाने और अत्यधिक बल प्रयोग से परहेज़ करने का आग्रह किया है. ख़बरों के अनुसार सेना द्वारा सत्ता हथिया लिये जाने के बाद देश में विरोध-प्रदर्शनों के जारी रहने के बीच म्याँमार के बड़े शहरों में बख़्तरबन्द गाड़ियों व सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. 

म्याँमार संकट: तख़्तापलट के ज़िम्मेदारों के विरुद्ध, कड़ी कार्रवाई की माँग

संयुक्त राष्ट्र की उप मानवाधिकार उच्चायुक्त नदा अल नाशीफ़ और म्याँमार पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने, देश में, पिछले सप्ताह ‘सत्ता का तख़्तापलट’ करने वाली हस्तियों के विरुद्ध लक्षित प्रतिबन्ध लगाने का आहवान किया है. इस बीच म्याँमार में जारी स्थिति पर चर्चा करने के लिये, शुक्रवार को, यूएन मानवाधिकार परिषद का विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें म्याँमार में बन्दी बनाई गई राजनैतिक हस्तियों की तुरन्त रिहाई की माँग करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया.

कोविड के कारण, बच्चों को संघर्षों में इस्तेमाल करने के ख़तरे को मिला ईंधन

संयुक्त राष्ट्र और योरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि बच्चों के कोरोनावायरस महामारी के प्रभाव के कारण, सशस्त्र गुटों और सशस्त्र बलों के हत्थे चढ़ जाने का जोखिम और भी ज़्यादा बढ़ गया है. शुक्रवार, 12 फ़रवरी को मनाए जाने वाले, 'बाल सैनिकों के इस्तेमाल के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर, ये चिन्ता व्यक्त की गई है.

आईसीसी के फ़ैसले से खुलेगा 'क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों में न्याय के लिये रास्ता'

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के उस फ़ैसले की सराहना की है जिसमें कहा गया है कि इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों में जो गम्भीर अपराध किये गये हैं, वे कोर्ट के न्यायिक क्षेत्र में आते हैं. यूएन विशेषज्ञ ने मंगलवार को जारी अपने वक्तव्य में इस निर्णय को, न्याय व जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया है.