मानवाधिकार

इथियोपिया: यूनीसेफ़ ने अफ़ार क्षेत्र में जानलेवा हमलों पर जताई गम्भीर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में, गुरूवार 5 अगस्त को एक स्वास्थ्य ढाँचे और स्कूल पर हुए हमलों पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की है जिनमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए, उनमें 100 से ज़्यादा बच्चे थे. उस स्वास्थ्य ढाँचे और स्कूल में विस्थापित परिवार शरण लिये हुए थे.

आदिवासी समुदायों के साथ एक नए सामाजिक अनुबन्ध की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार, 9 अगस्त, को ‘विश्व के आदिवासी लोगों के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर, इन समुदायों की पीड़ाओं की पहचान करने, विषमताओं का अन्त करने और उनके ज्ञान व बुद्धिमता की पहचान करते हुए, एक नए सामाजिक अनुबन्ध की पुकार लगाई है.  

अफ़ग़ानिस्तान में एक नया संकट टालने के लिये, सुरक्षा परिषद से तेज़ कार्रवाई की अपील

अफ़ग़ानिस्तान में, जबकि युद्ध, अब एक नए, ज़्यादा ख़तरनाक और विनाशकारी चरण में दाख़िल हुआ नज़र आ रहा है, देश में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी डेबराह लियोन्स ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद से, एक नई मुसीबत को टालने के लिये, तेज़ कार्रवाई करने की अपील की.

सीरिया: दक्षिणी इलाक़े में, आम लोगों की स्थिति, 'युद्ध बन्धक जैसी'

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार पदाधिकारी मिशेल बाशेलेट ने सीरिया में आम लोगों की मुश्किलों व तकलीफ़ों के बारे में गुरूवार को एक बार फिर ख़तरे की घण्टी बजाई है क्योंकि देश के दक्षिणी शहर दरा के भीतर व आसपास, सरकारी सेनाओं व विपक्षी सशस्त्र गुटों के बीच गहन लड़ाई और अन्धाधुन्ध गोलाबारी ने रिहायशी इलाक़ों को एक तरह से बन्धक सा बना दिया है.

इराक़: यज़ीदी समुदाय को न्याय दिलाने के लिये यूएन प्रमुख ने जताई प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस्लामिक स्टेट (दाएश) के बर्बरतापूर्ण कृत्यों से जीवित बच गए यज़ीदी समुदाय के व्यक्तियों की मदद के लिये, एक नया क़ानून जल्द लागू किये जाने का आग्रह किया है.

अफ़्रीकी मूल के लोगों का नया स्थाई फ़ोरम - जनरल असेम्बली में प्रस्ताव पारित

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सदियों से नस्लवाद, नस्लभेद और दासता से पीड़ित रहे अफ़्रीकी मूल के लोगों के जीवन में बेहतरी लाने पर केन्द्रित एक नए मंच की स्थापना की है.

म्याँमार: सैन्य तख़्तापलट के छह महीने बाद भी, मानवीय स्थिति बदतर हो रही है

म्याँमार में सेना द्वारा इस वर्ष एक फ़रवरी को तख़्तापलट करके सत्ता हथियाए जाने को, छह महीने का समय हो गया है, जिस दौरान गहराते राजनैतिक, मानवाधिकार और मानवीय संकट के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिन्ताएँ भी व्यक्त की गई हैं जिनके कारण देश के लोगों का जीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है.