मानवाधिकार

लैंगिक समानता, 'इस सदी का अधूरा मानवाधिकार संघर्ष' - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को, पीढ़ी समानता फ़ोरम (Generation Equality Forum) में कहा कि महिलाओं के लिये समान अधिकार प्राप्ति का कार्य – “सदी का ऐसा मानवाधिकार संघर्ष है जो अभी अधूरा है”. ये फ़ोरम, मैक्सिको सिटी में सोमवार को शुरू हुआ.

म्याँमार: सैन्य बलों की दमनात्मक कार्रवाई की कठोरतम शब्दों में निन्दा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार को, म्याँमार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की कड़ी निन्दा की है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बच्चों व युवाओं सहित अनेक आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है, और फ़रवरी में सैन्य तख़्ता पलट के बाद यह अब तक का सबसे रक्तरंजित दिन साबित हुआ है.  

म्याँमार की सेना, देश के भविष्य के लिये ख़तरा - यूएन दूत की चेतावनी

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने कहा है कि देश की सेना अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है, जिससे देश के भविष्य पर जोखिम मंडरा रहा है. विशेष दूत ने म्याँमार में वार्षिक 'सैन्य बल दिवस' की पूर्व संध्या पर, शुक्रवार को जारी अपने बयान में म्याँमार मे हालात पर चिन्ता जताई है.  

दास व्यापार के अन्त के बावजूद, 'श्वेत वर्चस्ववादी विचार अब भी जीवित'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने क्षोभ जताया है कि पार-अटलाण्टिक दास व्यापार का अन्त, दो शताब्दी पहले हो जाने के बावजूद, उसे बल प्रदान करने वाली श्वेत वर्चस्ववाद की धारणा अब भी जीवित है. गुरुवार, 25 मार्च, को दासता एवँ पार-अटलाण्टिक दास व्यापार के पीड़ितों के स्मरण में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर यूएन प्रमुख ने सर्वजन के लिये शान्ति व गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है. 

म्याँमार में ‘हालात बिगड़ने की आशंका’, आपात बैठक बुलाए जाने का आग्रह

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने मौजूदा हालात पर चर्चा के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से सभी हितधारकों की एक आपात बैठक बुलाए जाने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि इस वार्ता में उन सांसदों को भी आमन्त्रित किया जाना होगा जो फ़रवरी मे सैन्य तख़्ता पलट से पहले चुनावों में लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए थे.

मानवाधिकार परिषद: बेलारूस, म्याँमार में मानवाधिकार हनन पर चिन्ता, प्रस्ताव पारित

स्विट्ज़रलैण्ड के जिनीवा में 47 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने बुधवार को म्याँमार और बेलारूस पर प्रस्तावों को पारित किया है जिनमें इन देशों में बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन की निन्दा की गई है. ग़ौरतलब है कि बेलारूस में अगस्त 2020 में विवादित राष्ट्रपति चुनावों और म्याँमार में हाल ही में सैन्य तख़्ता पलट के बाद, दोनों देशों में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिन्ता ज़ाहिर की जाती रही है. 

एशियाई-विरोधी हिंसा में उभार पर ‘गहरी चिन्ता’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एशियाई और एशियाई मूल के लोगों के विरुद्ध हिंसा में उभार पर गहरी चिन्ता ज़ाहिर की है. वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान नस्लवादी घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है. पिछले सप्ताह, अमेरिका के अटलांटा शहर में एक अकेले बन्दूकधारी ने, आठ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी. मृतकों में, एशियाई मूल की छह महिलाएँ भी हैं.

नस्लभेद रूपी विष को ख़त्म करने के लिये, सामूहिक संकल्प की दरकार

ऐसे समय में जबकि कोविड-19 महामारी ने, नस्लभेद और भेदभाव को अपना सिर उठाने के लिए उर्वरक भूमि मुहैया कराई है, संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन – यूनेस्को की प्रमुख ऑड्री अज़ूले ने सोमवार को तमाम देशों से “इस कठिन दौर में” एकजुटता दिखाने का आहवान किया है. 

सभी क्षेत्रों व समाजों में व्याप्त है ‘नस्लवाद की दुखदायी बुराई’ 

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि मौजूदा दौर का नस्लवाद, सदियों के औपनिवेशवाद और दासताकरण (Enslavement) में गहराई से समाया हुआ है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने, रविवार, 21 मार्च, को नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस से पहले, शुक्रवार को यूएन महासभा में आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए,  नस्लवाद से निपटने और नस्लीय न्याय सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है. 

गहराई से बैठे नस्लवाद से निपटने के लिये 'व्यवस्थागत उपायों की दरकार'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR0 की प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अफ़्रीकी मूल के व्यक्तियों के विरुद्ध क्रूरता और भेदभावपूर्व बर्ताव अब भी जारी है. उन्होंने कहा कि पुलिस हिंसा व क्रूरता से तब तक नहीं निपटा जा सकता, जब तक प्रणाली में समाए हुई नस्लवाद को दूर करने के लिये प्रणालीगत उपायों को नहीं अपनाया जाता. मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार को अफ़्रीकी मूल के व्यक्तियों के ख़िलाफ़ पुलिस हिंसाक के मुद्दे पर चर्चा हुई है.