मानवाधिकार

सूडान: पश्चिमी दारफ़ूर में हाल की हिंसा की जाँच व मानवाधिकार संरक्षण का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने सूडान के पश्चिमी दारफ़ूर इलाक़े में, हाल ही में भीषण हिंसा फिर से भड़कने के सन्दर्भ में, सरकार से आग्रह किया है कि उसे, बिना कोई भेदभाव किये, सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.

रवाण्डा की जनता के साथ एकजुटता – नफ़रत भरे भाषणों से निपटने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रवाण्डा में तुत्सी समुदाय के जनसंहार की बरसी पर नफ़रत फैलाने वाली मुहिमों को पराजित करने और इतिहास को फिर दोहराए जाने से रोकने के लिये समन्वित प्रयासों की पुकार लगाई है. वर्ष 1994 में इस जनसंहार को अंजाम दिया गया, जिसमें तुत्सी समुदाय के साथ-साथ हुतू और अन्य समूहों के उन लोगों को भी निशाना बनाया गया, जिन्होंने जनसंहार का विरोध किया था.

म्याँमार: सुरक्षा की ख़ातिर भागने वालों की रक्षा करनी होगी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) और यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने म्याँमार के पड़ोसी देशों से आग्रह किया है कि वो देश में हिंसा और दमन से बचकर सुरक्षा की ख़ातिर भागने वाले लोगों को शरण और सुरक्षा मुहैया कराएँ. म्याँमार में राजनैतिक संकट गुरूवार, 1 अप्रैल को, तीसरे महीने में प्रवेश कर गया है.

लैंगिक समानता, 'इस सदी का अधूरा मानवाधिकार संघर्ष' - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को, पीढ़ी समानता फ़ोरम (Generation Equality Forum) में कहा कि महिलाओं के लिये समान अधिकार प्राप्ति का कार्य – “सदी का ऐसा मानवाधिकार संघर्ष है जो अभी अधूरा है”. ये फ़ोरम, मैक्सिको सिटी में सोमवार को शुरू हुआ.

म्याँमार: सैन्य बलों की दमनात्मक कार्रवाई की कठोरतम शब्दों में निन्दा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार को, म्याँमार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की कड़ी निन्दा की है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बच्चों व युवाओं सहित अनेक आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है, और फ़रवरी में सैन्य तख़्ता पलट के बाद यह अब तक का सबसे रक्तरंजित दिन साबित हुआ है.  

दक्षिण अफ़्रीका: शार्पविल नरसंहार में जीवित बचे पीड़ितों की आपबीती

21 मार्च, 1960 को, दक्षिण अफ्रीका के शार्पविल में, रंगभेद के ख़िलाफ़ शान्तिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे, 69 प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून दिया गया था. इसीलिये, 21 मार्च का दिन, अब नस्लभेद के उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस नरसंहार में जीवित बचे कुछ पीडितों ने अपनी व्यथा बयान की है. एक वीडियो रिपोर्ट...
 

म्याँमार की सेना, देश के भविष्य के लिये ख़तरा - यूएन दूत की चेतावनी

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने कहा है कि देश की सेना अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है, जिससे देश के भविष्य पर जोखिम मंडरा रहा है. विशेष दूत ने म्याँमार में वार्षिक 'सैन्य बल दिवस' की पूर्व संध्या पर, शुक्रवार को जारी अपने बयान में म्याँमार मे हालात पर चिन्ता जताई है.  

दास व्यापार के अन्त के बावजूद, 'श्वेत वर्चस्ववादी विचार अब भी जीवित'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने क्षोभ जताया है कि पार-अटलाण्टिक दास व्यापार का अन्त, दो शताब्दी पहले हो जाने के बावजूद, उसे बल प्रदान करने वाली श्वेत वर्चस्ववाद की धारणा अब भी जीवित है. गुरुवार, 25 मार्च, को दासता एवँ पार-अटलाण्टिक दास व्यापार के पीड़ितों के स्मरण में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर यूएन प्रमुख ने सर्वजन के लिये शान्ति व गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है. 

म्याँमार में ‘हालात बिगड़ने की आशंका’, आपात बैठक बुलाए जाने का आग्रह

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने मौजूदा हालात पर चर्चा के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से सभी हितधारकों की एक आपात बैठक बुलाए जाने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि इस वार्ता में उन सांसदों को भी आमन्त्रित किया जाना होगा जो फ़रवरी मे सैन्य तख़्ता पलट से पहले चुनावों में लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए थे.

मानवाधिकार परिषद: बेलारूस, म्याँमार में मानवाधिकार हनन पर चिन्ता, प्रस्ताव पारित

स्विट्ज़रलैण्ड के जिनीवा में 47 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने बुधवार को म्याँमार और बेलारूस पर प्रस्तावों को पारित किया है जिनमें इन देशों में बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन की निन्दा की गई है. ग़ौरतलब है कि बेलारूस में अगस्त 2020 में विवादित राष्ट्रपति चुनावों और म्याँमार में हाल ही में सैन्य तख़्ता पलट के बाद, दोनों देशों में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिन्ता ज़ाहिर की जाती रही है.