मानवाधिकार

भारत: पत्रकार की हत्या की निन्दा, दोषियों को सज़ा की माँग

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक एवँ वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुक़दमा चलाने की पुकार लगाई है. उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में 19 जून को दो हमलावरों ने शुभम मणि त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 

पाकिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ता की जबरन गुमशुदगी पर यूएन विशेषज्ञों का क्षोभ

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में लापता मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक के बारे में सरकार द्वारा जानकारी सार्वजनिक किये जाने का स्वागत किया है, लेकिन सात महीने से भी पहले उनके अचानक जबरन ग़ायब होने की घटना की कड़ी निन्दा भी की है. मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक को आख़िरी बार 13 नवम्बर 2091 को तब देखा गया था जब सुरक्षा एजेण्टों ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्त के स्वाबी इन्टरचेन्ज इलाक़े के पास उनकी कार को रोका था. 

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग. 

भारतीय नागरिकता अधिनियम: प्रदर्शनकारी नेताओं को रिहा करने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत सरकार से उन सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने की अपील की है जिन्हें नागरिकता क़ानून में हुए संशोधन के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए गिरफ़्तार किया गया है. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में भारत के अनेक पड़ोसी देशों से विशिष्ट धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया सरल और शीघ्रता से आगे बढ़ाने का प्रावधान है लेकिन मुसलमानों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. 

निगरानी के लिए डिजिटल टैक्नॉलॉजी के अभूतपूर्व इस्तेमाल पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने देशों और व्यवसायों से आग्रह किया है कि डिजिटल टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करते समय यह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है कि इससे लोगों के शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने, अभिव्यक्ति की आज़ादी और सार्वजनिक मुद्दों में भागीदारी से सम्बन्धित बुनियादी अधिकारों का हनन ना हो.

पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिन्ता जताई है. यूनेस्को प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी लोकतन्त्र का एक बेहद अहम अंग है और पत्रकारों द्वारा ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग प्रैस की आज़ादी और सूचना के अधिकार के लिए अतिआवश्यक है. इसलिए उनके काम करने की आज़ादी और सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है.

नस्लीय हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई - मानवाधिकार उच्चायुक्त की अगुवाई में

मानवाधिकार परिषद ने अफ़्रीकी मूल के लोगों के ख़िलाफ़ क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों में समाए ढाँचागत नस्लवाद से निपटने के प्रयासों की अगुवाई की ज़िम्मेदारी मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट को सौंपी है. जिनीवा में परिषद के सत्र के दौरान अफ़्रीकी समूह के देशों के आग्रह पर बुधवार को नस्लवाद पर चर्चा (Urgent Debate) हुई थी जिसके बाद शुक्रवार को इस मुद्दे पर प्रस्ताव सर्वसम्मति से, और मतदान की ज़रूरत के बिना ही पारित हो गया.  

'मैं अपने भाई का रखवाला हूँ': मानवाधिकार परिषद में नस्लीय न्याय की भावपूर्ण पुकार

जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र को सम्बोधित करते हुए जियॉर्ज फ़्लॉयड के भाई फ़्लॉनेस फ़्लॉयड ने समाज में गहरी जड़ जमाए नस्लवाद को उखाड़ फेंकने की पुकार लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई करने का आग्रह किया है. अमेरिका के मिनियापॉलिस शहर में 25 मई को एक पुलिस अधिकारी ने एक काले अफ़्रीकी व्यक्ति जियॉर्ज फ़्लॉयड की गर्दन पर कई मिनटों तक अपना घुटना टिकाए रखा था और हालत बिगड़ने पर बाद में पुलिस हिरासत में ही जियॉर्ज फ़्लॉयड की मौत हो गई थी. इस घटना के विरोध में नस्लीय न्याय की माँग के समर्थन में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. 

हिंसक संघर्षों में क्रूरता और उत्पीड़न के शिकार बच्चों की तमाशबीन दुनिया

सशस्त्र संघर्षों में बच्चों का इस्तेमाल और उनका उत्पीड़न वर्ष 2019 में भी निर्बाध रूप से जारी रहा और बच्चों के अधिकारों के  गम्भीर हनन के 25 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए. बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के मुद्दे पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने सोमवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि बचपन दर्द, भय और क्रूरता का शिकार हो रहा है और दुनिया  बस देखे जा रही है. 

कोविड-19 व्यवधान के बाद मानवाधिकार परिषद का सत्र फिर शुरू, नस्लभेद पर होगी चर्चा

कोविड-19 महामारी के कारण तीन महीने के लम्बे अन्तराल के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सत्र सोमवार को फिर शुरू हुआ जिसमें नस्लवाद के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराए जाने को हरी झण्डी दी गई है. ग़ौरतलब है कि अमेरिका में एक काले अफ़्रीकी व्यक्ति जियॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद अनेक देशों में नस्लीय न्याय की माँग के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं.