मानवाधिकार

रवांडा में तुत्सी समुदाय के जनसंहार से 'मानवता को मिले कई सबक'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रवांडा में तुत्सी समुदाय के जनसंहार को मानव इतिहास का एक काला अध्याय करार दिया है. रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कगामे की उपस्थिति में यूएन महासभा में आयोजित एक समारोह में ऐसी त्रासदियों को फिर न होने देने के लिए संकल्प को मज़बूत करने की अपील की.

सूडान में उपयुक्त और समावेशी समाधान तलाशे जाने की अपील

सूडान में तेज़ी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी पक्षों से शांति और अधिकतम संयम बरते जाने की अपील की है. कई महीनों से चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद गुरूवार को सूडानी राष्ट्रपति ओमार अल बशीर को सेना ने सत्ता से बेदख़ल कर दिया. 

सूडान: संवाद के ज़रिए संकट का समाधान तलाशने की अपील

सूडान प्रशासन का सबसे अहम दायित्व विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है. सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 70 लोगों तक मारे जाने की रिपोर्टों के बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशलेट ने मौजूदा हालात पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि आपसी बातचीत के ज़रिए शांतिपूर्ण ढंग से समाधान तलाशा जाना चाहिए.

'युद्धापराध की श्रेणी में आ सकती है' रोहिंज्या समुदाय पर हैलीकॉप्टर से गोलाबारी

म्यांमार में सुरक्षा बलों और हथियारबंद अलगाववादी गुटों के बीच तेज़ होती झड़पों के बीच राखीन प्रांत में सेना के हैलीकॉप्टर से हुए हमले में रोहिंज्या समुदाय के सात लोगों की मौत हो गई है जबकि 18 लोग घायल हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा है इस हमले को युद्धापराध की श्रेणी में रखा जा सकता है. 

नफ़रत फैलाने वाले धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के विरोध की अपील

मिस्र में काहिरा की ऐतिहासिक अल-अज़हर मस्जिद का दौरा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर के समाजों, धर्मों और संस्कृतियों से एक साथ आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सभी समुदायों को सामूहिक हितों के लिए मिल कर काम करना चाहिए और नफ़रत फैला रहे नेताओं को अस्वीकार कर देना चाहिए. 

ब्रुनेई: नई दंड संहिता से 'क्रूर और अमानवीय' सज़ाओं की आशंका

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशलेट ने कहा है कि ब्रुनेई की दंड संहिता में इस्लामी क़ानून की सख़्त व्याख्या के अनुसार प्रस्तावित बदलावों पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि इससे मानवाधिकारों का हनन होने और अमानवीय सज़ाएं दिए जाने की आशंका है. नए क़ानून के तहत पत्थर मारकर मौत की सज़ा देने सहित अन्य प्रावधानों को उन्होंने निष्ठुर करार दिया है.