मानवाधिकार

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग. 

कोविड-19: घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के कारण बहुत से लोगों को अपने घरों में ही सीमित रहना पड़ा है. उनमें बहुत सी महिलाएँ अपने उत्पीड़कों के साथ रहने को मजबूर हैं, इससे घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए क्या करना चाहिए... (देखें ये वीडियो)

आइए, चुप्पी तोड़ें!

क्या समलैंगिकता एक विकल्प है? यदि आप एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और आप उस लिंग के प्रति आकर्षित हैं जो आप पहले ख़ुद थीं, तो इससे आप समलैंगिक हुईं या विषमलैंगिक? क्या आपको हिजड़ा कहना सही होगा?

ज़ैनब पटेल - एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और ऐसे कई असहज प्रश्नों का उत्तर दे रहीं हैं जो लम्बे समय से एलजीबीटी समुदाय को लेकर लोगों के दिमाग़ में जड़ें जमाए हुए हैं...