मानवाधिकार

बीजिंग सम्मेलन: 25 वर्ष बाद भी उस एक्शन मंच की महत्ता नहीं हुई है कम

महिलाओं की प्रगति और पुरुषों के साथ उनकी बराबरी सुनिश्चित करने के मुद्दे पर हुए ऐतिहासिक बीजिंग विश्व सम्मेलन को 25 वर्ष गुज़र जाने के बाद भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है. महिला प्रगति व सशक्तिकरण के लिये काम करने वाली यूएन संस्था – यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक फ़ूमज़िले म्लाम्बो न्गक्यूका ने शुक्रवार को ये बात ध्यान दिलाई. 

पाकिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक की गुमशुदगी ख़त्म करने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से एक मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खटक का ख़ुफ़िया बन्दीकरण ख़त्म करने का आहवान किया है. लगभग नौ महीनों से अभी तक इदरीस ख़टक की कोई ख़बर नहीं है.

इसराइल-हमास समझौता होगा महामारी का मुक़ाबला करने में मददगार

मध्य पूर्व क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठतम अधिकारी निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा के भीतर और आसपास के इलाक़ों में कोविड-19 महामारी के बावजूद हाल के समय में बढ़े तनाव को कम करने के लिये हुए समझौते का स्वागत किया है.

बेलारूस को प्रदर्शनकारियों पर ज़ुल्म ढाना बन्द करना होगा

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बेलारूस सरकार का आहवान किया है 9 अगस्त के राष्ट्रपति पद के चुनाव के मुद्दे पर हो रहे व्यापक प्रदर्शनों के दौरान बन्दी बनाए गए लोगों को प्रताड़ित करना बन्द करे, और उन पुलिस अधिकारियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए जिन्होंने अपनी हिरासत में रखे गए प्रदर्शनकारियों की कथित रूप में बेइज़्ज़ती व पिटाई की है.

सैन्सरशिप, धमकियाँ, हमले - कोविड-19 संकट काल में प्रैस आज़ादी पर ख़तरे

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने आगाह किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान मीडिया के समक्ष सैन्सरशिप, दमन, धमकियों और हमलों जैसी चुनौतियाँ और ज़्यादा गम्भीर हुई हैं और कुछ देशों में सरकारें कोविड-19 सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का इस्तेमाल आलोचना और असहमति पर रोक लगाने के लिये कर रही हैं जो किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने दोहराते हुए कहा कि लोगों को सटीक और भरोसेमन्द सूचना पाने का अधिकार है और यह कई अन्य मूलभूत अधिकारों की बुनियाद है. 

जबरन गुमशुदगी पर रोक लगाने के प्रयासों को मज़बूती देने का आहवान

विश्व के अनेक देशों में लोगों को जबरन ग़ायब कराए जाने की घटनाएँ व्यक्तियों के मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों के साथ-साथ समाजों में आतंक फैलाने की रणनीति को भी दर्शाती हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार, 30 अगस्त, को 'जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर सदस्य देशों से इस समस्या पर विराम लगाने का आहवान किया है. 

नोबेल विजेता डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को मिली धमकियों के बीच सुरक्षा देने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कोंगो के नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को मिल रही मौत की धमकियों की निन्दा करते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की पुकार लगाई है.

म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.