मानवाधिकार

महामारी के दौरान कुछ राजनेताओं की हरकतें निन्दनीय, नए अमेरिकी राष्ट्रपति से उम्मीदें

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के समय में, कुछ देशों में राजनैतिक नेतृत्व ने, निन्दनीय बर्ताव किया है. उन्होंने उम्मीद भी जताई है कि अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के सत्ता संभालने के साथ ही, वर्ष 2021 एक बेहतर साल होगा. 

बेहतर उबरें: मानवाधिकारों के लिये खड़ें हों

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 10 दिसम्बर को मनाए जाने वाले मानवाधिकार दिवस पर एक वीडियो सन्देश में कहा है कि कोविड महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों, लैंगिक समानता, जन-भागीदारी, जलवायु न्याय और टिकाऊ विकास में - मानवाधिकारों को केन्द्रीय महत्व दिये जाने की ज़रूरत झलकती है. (वीडियो)...

भारत: प्रदर्शनकारी किसानों के लोकतान्त्रिक अधिकारों का सम्मान हो

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत में किसानों को शान्तिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का आधिकार है और उनकी स्वतन्त्रताओं का सम्मान किया जाना चाहिये.

डीआरसी: राजनैतिक तनाव, सशस्त्र हमले, विस्थापन और कोविड चुनौतियाँ दरपेश

काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में यूएन मिशन की अध्यक्ष लैला ज़ैरूगुई ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को बताया है कि देश में, अनेक तरह के ख़तरों और जोखिमों का सामना कर रहे नागरिकों को, सरकारी संस्थानों द्वारा, स्थिरता और सुरक्षा मुहैया कराए जाने की सख़्त ज़रूरत है.

संशोधित अफ़ग़ान क़ानून भी, यौन हिंसा की पीड़ित महिलाओं को इन्साफ़ दिलाने में नाकाम

यूएन मानवाधिकार एजेंसी और अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा है कि देश में न्याय व्यवस्था अब भी हिंसा और यौन अपराधों की शिकार महिला पीड़ितों को पर्याप्त सहायता मुहैया कराने में नाकाम है, जब वर्ष 2009 में एक ऐसा क़ानून बनाया गया था जिसे महिलाओं को संरक्षा व सुरक्षा मुहैया कराने के क़ानूनी प्रयास आगे बढ़ाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया गया था.

यमन: 'अन्धाधुन्ध मानवाधिकार उल्लंघन, युद्धापराध के दायरे में आ सकते हैं'

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने सुरक्षा परिषद और व्यापक अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से युद्धग्रस्त देश यमन में मानवाधिकार उल्लंघन के अतार्किक और निर्बाध उल्लंघन के मामलों पर यह कहते हुए रोक लगाने का आहवान किया है कि अत्याचारों ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है.

विकलाँग व्यक्तियों के अधिकारों को पहचान व सुरक्षा देने की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र ने समाजों में विकलाँग व्यक्तियों के और ज़्यादा समावेशन और उनके मानवाधिकारों को पहचान देने के साथ-साथ उनका सम्मान किये जाने का आहवान किया है. गुरुवार को विकलाँग व्यक्तियों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर ये आहवान किया गया है. 

'21वीं सदी की दुनिया में, दासता स्वीकार्य नहीं'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दासता के समकालीन रूपों के प्रभावों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि इस तरह की घिनौने चलन के लिये 21वीं सदी में कोई जगह नहीं हो सकती. महासचिव ने दासता के उन्मूलन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये बात कही है, जोकि 2 दिसम्बर को मनाया जाता है.

समाजों में विकलाँग व्यक्तियों के और ज़्यादा समावेश की पुकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि एक ऐसी दुनिया हासिल करना, जहाँ सभी लोगों को समान अवसर हासिल हों, एक ऐसा लक्ष्य है जिसके लिये जद्दोजहद करना सार्थक है. उन्होंने सोमवार को एक सन्देश में, समाज में विकलाँग व्यक्तियों के और ज़्यादा समावेश का आहवान किया, जिनमें कोविड-19 से निपटने और पुनर्बहली उपाय भी शामिल हैं.

कोविड-19: आपसी सम्बन्धों पर प्रभाव

स्वास्थ्य संकट की स्थिति में, स्कूल, सामाजिक संस्थाओं और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच खो देने के कारण, ख़ासतौर पर लड़कियों को बाल-विवाह और कम उम्र में गर्भवती होने के जोखिम का सामना करना पड़ता है.

बांग्लादेश की 15 साल की त्रिशा कहती हैं, "मैं एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था चाहती हूँ, जहाँ महिलाएँ और बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हों. बाल विवाह हमारे समाज के लिये एक अभिशाप है. जब कोई लड़की बाल विवाह का शिकार होती है, तो वह शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित होती है.”

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में, व्यक्त किये हैं. (वीडियो देखें)...