मानवाधिकार

कोविड-19: घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के कारण बहुत से लोगों को अपने घरों में ही सीमित रहना पड़ा है. उनमें बहुत सी महिलाएँ अपने उत्पीड़कों के साथ रहने को मजबूर हैं, इससे घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए क्या करना चाहिए... (देखें ये वीडियो)

आइए, चुप्पी तोड़ें!

क्या समलैंगिकता एक विकल्प है? यदि आप एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और आप उस लिंग के प्रति आकर्षित हैं जो आप पहले ख़ुद थीं, तो इससे आप समलैंगिक हुईं या विषमलैंगिक? क्या आपको हिजड़ा कहना सही होगा?

ज़ैनब पटेल - एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और ऐसे कई असहज प्रश्नों का उत्तर दे रहीं हैं जो लम्बे समय से एलजीबीटी समुदाय को लेकर लोगों के दिमाग़ में जड़ें जमाए हुए हैं...

'हराना ही होगा नफ़रत को'

कोविड-19 का मुक़ाबला करने में सारी दुनिया के सामने असाधारण चुनौती है लेकिन फिर भी अनेक देशों में नफ़रत, कुछ ख़ास समूहों पर दोषारोपण या कलंकित करने के मामले भी सामने आए हैं जो बेहद चिन्ताजनक है. महासचिव ने एकजुट होकर नफ़रत को भी हराने का आग्रह किया है, बिल्कुल उसी तरह से जैसे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए वैश्विक एकजुटता की ज़रूरत है. नफ़रत का फैलाव भी एक महामारी के रूप में ही सामने आया है. वीडियो सन्देश...

कोविड-19: ‘जवाबी कार्रवाई में विकलांग व्यक्तियों का भी रखें ध्यान’

दुनिया की कुल आबादी का लगभग 15 फ़ीसदी हिस्सा यानि क़रीब एक अरब लोग विकलांगता के साथ जीवन गुज़ारते हैं. कोविड-19 संकट से उपजे हालात में विश्व आबादी के इस बड़े हिस्से को ज़रूरी मदद और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में मुश्किलें पेश आ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें महामारी से निपटने की कार्रवाई में विकलांगों का समावेश सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है. 

विकलांग व्यक्तियों का साथ भी ज़रूरी

यूएन महासचिव ने कहा है कि कोविड-19 महामारी दुनिया के एक अरब विकलांग व्यक्तियों को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है. ऐसे में विकलांग लोगों को महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनदायी प्रक्रिया का लाभ दिलाने के लिए समान अधिकारों की गारंटी देनी होगी. महासचिव ने तमाम देशों से आग्रह किया है कि वे कोविड-19 का मुक़ाबला करने और उबरने के प्रयासों में विकलांग व्यक्तियों का प्रमुखता से ध्यान रखें, उनकी राय जानने के साथ-साथ उनसे संपर्क बनाए रखें.  देखें वीडियो संदेश...

कोविड-19: 'ग़लत जानकारी की महामारी' से मुक़ाबले में पत्रकारों की अहम भूमिका 

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के संबंध में ग़लत जानकारियों की महामारी ख़तरनाक ढंग से फैलने की रोकथाम के प्रयासों में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वैश्विक संकट के दौरान प्रैस की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को आयोजित एक वर्चुअल संवाद के दौरान यह बात कही है.

कोविड-19: 'दुष्प्रचार नामक महामारी की औषधि' मुहैया कराते हैं पत्रकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के साथ दुष्प्रचार (Mis-information) नामक एक अन्य महामारी भी फैल रही है जिससे निपटने की 'औषधि' तथ्यों पर आधारित सूचना व विश्लेषण मुहैया कराने वाले पत्रकारों के पास है. रविवार, 3 मई, को ‘विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस’ पर जारी अपने संदेश में उन्होंने सरकारों से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है. 

प्रैस की आज़ादी व सुरक्षा की पुकार

यूएन महासचिव ने 3 मई को विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस पर दुनिया भर के देशों से पत्रकारों को काम करने की आज़ादी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की गारंटी देने की पुकार लगाई है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के माहौल में स्वतंत्र प्रैस की भूमिका और भी ज़्यादा अहम हो जाती है क्योंकि दुष्प्रचार, झूठ और अफ़वाहों के माहौल में पत्रकार ही तथ्यपरक व प्रासंगिक जानकारी सामने ला रहे हैं. वीडियो सन्देश...

कोविड-19: सख़्त पाबंदियों से निर्बल समुदायों पर सबसे अधिक असर

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि अनेक देशों से व्यथित करने वाली ऐसी जानकारी मिल रही हैं जो दर्शाती हैं कि तालाबंदी की सख़्त पाबंदियों से ज़हरीला माहौल पनप रहा है और जिससे समाज के सबसे निर्बल वर्ग पर भारी असर पड़ रहा है. ग़ौरतलब है कि पिछले हफ़्ते ही यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया था कि कोविड-19 संकट के बहाने दमनकारी क़दम उठाए जाने से बचाना होगा क्योंकि ख़तरा वायरस से है, लोगों से नहीं. 

कोविड-19 और मानवाधिकार

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी सिर्फ़ एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा नहीं है बल्कि एक मानवीय, आर्थिक और सामाजिक संकट है,और यह तेज़ी से मानवाधिकारों का संकट भी बनता जा रहा है. उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य आपदा से निपटने के उपायों में मानवाधिकारों की अहमियत को रेखांकित करते हुए मानव कल्याण और मानवाधिकारों को सर्वोपरि रखने को कहा है...