मानवाधिकार

मानवाधिकार दिवस: महामारी पर जवाबी कार्रवाई में मानवाधिकारों पर बल 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को 'मानवाधिकार दिवस' के अवसर पर अपने सन्देश में एक अपील जारी करते हुए कहा है कि कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई और महामारी से उबरने के प्रयासों के केन्द्र में मानवाधिकारों को रखना होगा. महासचिव गुटेरेश के मुताबिक हर जगह, हर एक व्यक्ति के लिये, एक बेहतर भविष्य हासिल करने के लिये यह बेहद अहम है. 

बेहतर उबरें: मानवाधिकारों के लिये खड़ें हों

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 10 दिसम्बर को मनाए जाने वाले मानवाधिकार दिवस पर एक वीडियो सन्देश में कहा है कि कोविड महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों, लैंगिक समानता, जन-भागीदारी, जलवायु न्याय और टिकाऊ विकास में - मानवाधिकारों को केन्द्रीय महत्व दिये जाने की ज़रूरत झलकती है. (वीडियो)...

कोविड-19: आपसी सम्बन्धों पर प्रभाव

स्वास्थ्य संकट की स्थिति में, स्कूल, सामाजिक संस्थाओं और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच खो देने के कारण, ख़ासतौर पर लड़कियों को बाल-विवाह और कम उम्र में गर्भवती होने के जोखिम का सामना करना पड़ता है.

बांग्लादेश की 15 साल की त्रिशा कहती हैं, "मैं एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था चाहती हूँ, जहाँ महिलाएँ और बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हों. बाल विवाह हमारे समाज के लिये एक अभिशाप है. जब कोई लड़की बाल विवाह का शिकार होती है, तो वह शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित होती है.”

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में, व्यक्त किये हैं. (वीडियो देखें)...

यमन: युद्धरत पक्षों के बीच 1000 बन्दियों की रिहाई के लिये रज़ामन्दी

यमन में युद्धरत पक्ष बन्दियों के पहले समूह की रिहाई की के लिये रज़ामन्द हुए हैं. सप्ताहान्त के दौरान स्विट्ज़रलैण्ड़ में सप्ताह भर चली बैठक के आख़िर में ये रज़ामन्दी हुई जिसे संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने “एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव” क़रार दिया है.

नेलसन मण्डेला पुरस्कार 2020

मानवीय भलाई के कार्यों के लिये दिया जाने वाला दूसरा नेलसन मण्डेला पुरस्कार दो समाज सेवियों - मारियाना वी वार्दिनॉयानिस (ग्रीस) और डॉक्टर मॉरीसैण्डा कोयाते (गिनी) को दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नेलसन मण्डेला पुरस्कार का प्रस्ताव 2014 में पारित किया था और पहला पुरस्कार 2015 में नामीबिया की डॉक्टर हेलेना न्ड्यूमे और पुर्तगाल के होर्गे फ़र्नाण्डो सैम्पाइयो को दिया गया था. ये पुरस्कार हर पाँच वर्ष में एक महिला और एक पुरुष को दिया जाता है... वीडियो....

'असमानता हमारे दौर को परिभाषित करती है' – महासचिव का कड़ा 'मण्डेला दिवस सन्देश'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि असमानता एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे दौर को परिभाषित करता है और इसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं व समाजों के तबाह होने का जोखिम पैदा होता है. महासचिव ने शनिवार को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर एक कड़े सन्देश में ये बात कही है.

नेलसन मण्डेला की याद में...

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि नेलसन मण्डेला ने हमेशा मानवता व समानता के आदर्शों और सिद्धान्तों के लिए संकल्प दिखाया और वो कहा करते थे कि जब तक दुनिया में ग़रीबी और असमानता बरक़रार है, तब तक हमे आराम नहीं मिल सकता. 18 जुलाई को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार की 25वीं बरसी पर आपसी सुलह-समझौते की पुकार

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार के 25 वर्ष बाद भी बोसनिया एण्ड हरज़ेगोविना में शान्ति एक नाज़ुक डोर से बन्धी है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद योरोप में अत्याचार के सबसे भयावह अध्याय के रूप में देखे जाने वाले स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार की 25वीं बरसी पर क्षेत्र में आपसी मेलमिलाप के लिए ईमानदार प्रयासों की ज़रूरत को रेखांकित किया है. 

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार के 25 वर्ष

यूएन महासचिव ने कहा है कि 25 वर्ष पहले बोसनिया हरज़गोविना के स्रेब्रेनीत्सा में नफ़रत के कारण हज़ारों मुसलमानों का जनसंहार कर दिया गया था. पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान के कहा था कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की वो नाकामी इतिहास का कभी पीछा नहीं छोड़ेगी. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कहना है कि पूरे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की ये ज़िम्मेदारी है कि उस जनसंहार के पीड़ितों को तकलीफ़ों से उबारकर सुलह-सफ़ाई व स्थिरता का माहौल बनाया जाए. वीडियो सन्देश...

'कोविड-19 जैसे संकट में ही संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता निहित'

संयुक्त राष्ट्र चार्टर की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 देशों में से एक भारत भी था. तब से लेकर आज तक,  संयुक्त राष्ट्र और भारत – दोनों ही बहुपक्षवाद में भागीदार रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत अहम योगदान देता रहा है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर कई सवाल उठे हैं. संयुक्त राष्ट्र की उपयोगिकता और यूएन में भारत के योगदान पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन का ब्लॉग.