मानवाधिकार

जबरन गुमशुदगी पर रोक लगाने के प्रयासों को मज़बूती देने का आहवान

विश्व के अनेक देशों में लोगों को जबरन ग़ायब कराए जाने की घटनाएँ व्यक्तियों के मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों के साथ-साथ समाजों में आतंक फैलाने की रणनीति को भी दर्शाती हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार, 30 अगस्त, को 'जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर सदस्य देशों से इस समस्या पर विराम लगाने का आहवान किया है. 

नोबेल विजेता डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को मिली धमकियों के बीच सुरक्षा देने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कोंगो के नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को मिल रही मौत की धमकियों की निन्दा करते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की पुकार लगाई है.

म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.

कोविड-19, नफ़रत व भेदभाव को एकजुट होकर हराना होगा - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 फैलने के बाद से दुनिया भर में फैले और बढ़ते नस्लवाद और नफ़रत के ख़िलाफ़ आगाह किया है. उन्होंने 22 अगस्त को धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हिंसा के पीड़ितों की याद में मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर ये चेतावनी दी है.

अफ़ग़ानिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौतों को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई का आग्रह

अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष की शुरुआत से अब तक नौ मानवाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गँवा चुके हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने चिन्ताजनक रूझान बताया है. शुक्रवार को यूएन विशेषज्ञ मैरी लॉलॉर ने अफ़ग़ान प्रशासन से मौतों के इस सिलसिले को रोके जाने का आग्रह किया है. 

बेरूत में विस्फोट से 'अभूतपूर्व' क्षति, जवाबदेही तय करने की माँग

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए भीषण विस्फोट के लिए न्याय की पुकार लगाई है और स्थानीय जनता की ओर से इस घटना की जवाबदेही तय किए जाने की माँग की है. 4 अगस्त को बेरूत बन्दरगाह पर विस्फोट से 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हज़ारों लोग घायल और बेघर हो गए थे. अनेक लोग अब भी लापता बताए गए हैं. 

कोविड-19 के दौर में आदिवासी लोगों की सहनशीलता की तरफ़ ध्यान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में दुनिया भर में रह रहे लगभग 47 करोड़ 60 लाख आदिवासी लोगों कों शामिल करना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना  बहुत ज़रूरी है. 

कोविड-19: 'पीड़ा और मौत के सबब' अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्धों को हटाने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने आग्रह किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान क्यूबा, ईरान, सूडान सहित अन्य देशों पर लगे प्रतिबन्ध हटाया जाना या उनके असर को कम करना बेहद अहम है. यूएन विशेषज्ञों के मुताबिक प्रभावित देशों में जनता कष्टों का सामना कर रही है और प्रतिबन्ध हटाने या उनमें ढील देने से स्थानीय समुदायों तक अहम राहत सामग्री पहुँचाना सम्भव हो सकेगा.