मानवाधिकार

उभरती टैक्नॉलॉजी से गहराती नस्लवाद और भेदभाव की चुनौती 

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने उभरती डिजिटल टैक्नॉलॉजी की गहराई के साथ छानबीन करने की पुकार लगाई है जिनका इस्तेमाल नस्लीय असमानता, भेदभाव और असहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिये किया जा रहा है. 

म्याँमार में स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव की माँग

म्याँमार में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के नए स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एन्ड्रयूज़ ने कहा है कि देश में इस वर्ष नवम्बर में होने वाले चुनावों की निष्पक्षता और स्वतन्त्रता सुनिश्चित की जानी होगी.

आपात हालात में लड़कियों व महिलाओं को ज़्यादा संरक्षण की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उप-उच्यायुक्त (OHCHR) नाडा अल-नशीफ़ ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 और हिंसक संघर्ष के सामूहिक प्रभाव के कारण वर्ष 2022 तक 20 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी. उन्होंने सोमवार को मानवाधिकार परिषद को जानकारी देते हुए आगाह किया कि महिलाओं व लड़कियों के लिए हालात विशेष तौर पर चिन्ताजनक है. 

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार की 25वीं बरसी पर आपसी सुलह-समझौते की पुकार

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार के 25 वर्ष बाद भी बोसनिया एण्ड हरज़ेगोविना में शान्ति एक नाज़ुक डोर से बन्धी है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद योरोप में अत्याचार के सबसे भयावह अध्याय के रूप में देखे जाने वाले स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार की 25वीं बरसी पर क्षेत्र में आपसी मेलमिलाप के लिए ईमानदार प्रयासों की ज़रूरत को रेखांकित किया है. 

स्रेब्रेनीत्सा जनसंहार के 25 वर्ष

यूएन महासचिव ने कहा है कि 25 वर्ष पहले बोसनिया हरज़गोविना के स्रेब्रेनीत्सा में नफ़रत के कारण हज़ारों मुसलमानों का जनसंहार कर दिया गया था. पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान के कहा था कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की वो नाकामी इतिहास का कभी पीछा नहीं छोड़ेगी. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कहना है कि पूरे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की ये ज़िम्मेदारी है कि उस जनसंहार के पीड़ितों को तकलीफ़ों से उबारकर सुलह-सफ़ाई व स्थिरता का माहौल बनाया जाए. वीडियो सन्देश...

धुँधला रहा है 2030 तक ग़रीबी उन्मूलन का सपना – यूएन विशेषज्ञ

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण 25 करोड़ से ज़्यादा लोग भुखमरी के कगार पर पहुँच गए हैं और वर्ष 2030 तक चरम ग़रीबी के उन्मूलन की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं. यूएन के विशेष रैपोर्टेयर की ताज़ा रिपोर्ट में लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालने के लिए सरकारों के आर्थिक प्रगति पर निर्भर रहने की आलोचना की गई है.

भारत: पत्रकार की हत्या की निन्दा, दोषियों को सज़ा की माँग

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक एवँ वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुक़दमा चलाने की पुकार लगाई है. उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में 19 जून को दो हमलावरों ने शुभम मणि त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी थी.