मानवाधिकार

अमेरिका में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों पर बल प्रयोग की निन्दा  

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी राष्ट्रों के संगठन (OAS) द्वारा नियुक्त स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नस्लभेद विरोधी आन्दोलनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की निन्दा की है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि लोकतान्त्रिक समाज में प्रैस की अहम भूमिका है और विरोध प्रदर्शनों के दौरान मीडिया को आज़ादी से काम करने की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना चाहिए. 

कोविड-19: घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के कारण बहुत से लोगों को अपने घरों में ही सीमित रहना पड़ा है. उनमें बहुत सी महिलाएँ अपने उत्पीड़कों के साथ रहने को मजबूर हैं, इससे घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए क्या करना चाहिए... (देखें ये वीडियो)

आइए, चुप्पी तोड़ें!

क्या समलैंगिकता एक विकल्प है? यदि आप एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और आप उस लिंग के प्रति आकर्षित हैं जो आप पहले ख़ुद थीं, तो इससे आप समलैंगिक हुईं या विषमलैंगिक? क्या आपको हिजड़ा कहना सही होगा?

ज़ैनब पटेल - एक ट्रान्सजैन्डर महिला हैं और ऐसे कई असहज प्रश्नों का उत्तर दे रहीं हैं जो लम्बे समय से एलजीबीटी समुदाय को लेकर लोगों के दिमाग़ में जड़ें जमाए हुए हैं...

'अमेरिका को गहरी जड़ जमाए नस्लवाद को ख़त्म करना होगा'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि जो लोग अमेरिका में गहराई से जड़ जमाए और समाज के लिए एक बीमारी बन चुके ढाँचागत नस्लवाद को ख़त्म करने के लिए अपनी आवाज़ बुलन्द कर रहे हैं, उनकी आवाज़ों को सुना और समझा जाना होगा, ताकि देश नस्लवाद और हिन्सा के अपने पीड़ादायक इतिहास के चंगुल से बाहर निकल सके.

भारत: 'भुलाए जा चुके' प्रवासी मज़दूरों को राहत पहुँचाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत सरकार से सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का तत्काल अनुपालन करने का आग्रह किया है जिसमें 10 करोड़ से ज़्यादा आन्तरिक प्रवासी कामगारों का कल्याण सुनिश्चित करने की बात कही गई है. वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण भारत में मार्च में तालाबन्दी लागू किए जाने बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूरों को पैदल अपने गण्तव्य स्थानों तक पहुँचने के लिए लम्बी यात्राएँ करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

कोविड-19: एशियाई देशों से अभिव्यक्ति की आज़ादी को नहीं दबाने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के दर्जन से भी ज़्यादा देशों ने कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत अभिव्यक्ति की आज़ादी को भी दबाया है जो बहुत चिन्ताजनक है. 

कोविड-19: भेदभाव के कारण अल्पसंख्यकों पर दहला देने वाला असर

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि इस बारे में तुरन्त ठोस क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है कि नस्लीय व जातीय अल्पसंख्यकों पर वैश्विक स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के ग़ैर-आनुपातिक असर ना हो. मानवाधिकार उच्चायुक्त ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी ने कुछ देशों में चेता देने वाली असमानताएँ उजागर कर दी हैं:

अमेरिका में प्रदर्शनों पर सभी से संयम बरतने की अपील

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने अमेरिका के अनेक शहरों में जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की वो अपील दोहराई है कि किसी भी तरह की शिकायतें शान्तिपूर्ण तरीक़ों से सुनी जानी चाहिए, साथ ही पुलिस व सुरक्षा बलों को भी और ज़्यादा संयम दिखाना होगा. ध्यान रहे कि कुछ स्थानों पर इन प्रदर्शनों के सन्दर्भ में अनेक पक्षों की तरफ़ से हिन्सा भी हुई है.