स्वास्थ्य

संघर्षों व हिंसा के कारण विस्थापित बच्चों की रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक ताज़ा रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में लड़ाई-झगड़ों और हिंसा के कारण लगभग एक करोड़ 90 लाख बच्चों को अपने ही देशों में विस्थापित होना पड़ा, जोकि किसी भी अन्य साल से ज़्यादा है. इस कारण बच्चे वैश्विक महामारी कोविड-19 के वैश्विक फैलाव के लिए सबसे कमज़ोर तबका बन गए हैं. 

कोविड-19: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) का ताज़ा विश्लेषण दर्शाता है कि वर्ष 2020 में विमान कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में  डेढ़ अरब तक की गिरावट का सामना करना पड़ सकता है. यूएन एजेंसी की ताज़ा जानकारी में विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण हवाई यातायात पर पड़ने वाले आर्थिक असर को भी आँका गया है. 

कोविड-19: 'जब तक सब सुरक्षित नहीं, तब तक कोई भी नहीं'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी पर क़ाबू पाने के लिए “इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयास” की ज़रूरत है. यूएन प्रमुख ने सोमवार को ब्रसेल्स में योरोपीय संघ के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बात कही जिसका आयोजन दान के ज़रिए धन जुटाने का संकल्प व्यक्त करने के लिए किया गया. 

'कोविड-19 ने वैश्विक कमज़ोरियाँ व असमानताएँ उजागर की हैं'

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में विकसित और विकासशील देश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बड़ी संख्या में संक्रमण के मामल सामने आने, लोगों की मौतें होने और तालाबंदी के कारण आर्थिक संकट उत्पन्न होने से चिंता व्याप्त है. संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे. मोहम्मद ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में बताया कि इस संकट से हमारे समाजों की ख़ामियाँ और असमानताएँ उजागर हो गई हैं.  

कोविड-19: स्वच्छ हाथ बने हथियार

वैश्विक महामारी कोविड-19 का अभी तक कोई इलाज नहीं है. केवल ऐहतियात व रोकथाम ही एक मात्र उपाय है. चूँकि संक्रमित हाथों के ज़रिए ही ये वायरस हमारे शरीर में दाख़िल हो सकता है इसलिए इस वायरस से बचने में हाथों को पूरी तरह स्वच्छ रखना बेहद ज़रूरी है. हाथ धोने का सही तरीक़ा इस वीडियो में देखें...

कोविड-19 के वायरस के पशु स्रोत का पता लगाने की सिफ़ारिश

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को कोविड-19 महामारी फैलने का कारण बने वायरस के पशु स्रोत का पता लगाने और यह जॉंच-पड़ताल करने के लिए कहा है कि ये संक्रमण मनुष्यों में कैसे फैला. शुक्रवार को यूएन एजेंसी की आपात समिति ने सर्वसहमति जताई कि कोविड-19 अब भी एक अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी है. 

'बुज़ुर्गों के मानवाधिकारों व गरिमा का ध्यान ज़रूरी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया भर में कोविड-19 महामारी से मौत का शिकार होने वाले कुल मरीज़ों में 80 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के वृद्धों की संख्या पाँच गुना ज़्यादा है. उन्होंने शुक्रवार को बुज़ुर्गों के लिए सदी की इस भयावह महामारी के दौरान व बाद में भी अन्य अनेक चुनौतियों पर एक नई नीति पहल जारी करते हुए ये बात कही.

कोविड-19: भारत में वंचित समूहों के लिए UNFPA की आपात सेवा

भारत में भी कोविड-19 महामारी का सामना करने के प्रयासों के तहत पूरे देश में तालाबंदी लागू  है जिससे जनजीवन व्यापक रूप में प्रभावित हुआ है. भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने बिहार राज्य में पटना नगर निगम (PMC) के साथ मिलकर गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों की मदद के लिए ‘वी-केयर’ नाम की सहायता सेवा शुरू की है. इसके तहत बिहार की राजधानी पटना में झुग्गियों में रहने वाले कमज़ोर तबके के लोगों को मुफ़्त आपातकाल यातायात और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं. 

कोविड-19: प्राथमिकताएँ: वैश्विक युद्धविराम, निर्बलों की मदद, पुनर्बहाली की योजना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को एक वर्चुअल प्रैस वार्ता के दौरान कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई को जीतने का संकल्प दोहराया है. उन्होंने कहा कि इस विकराल चुनौती से निपटने के लिए यूएन प्रणाली तीन मुख्य आयामों पर ध्यान केंद्रित कर रही है: वैश्विक युद्धविराम को लागू करना; सबसे नाज़ुक हालात में रह रहे लोगों की मदद सुनिश्चित करना; और आर्थिक व सामाजिक पुनर्बहाली की योजना तैयार करना.

कोविड-19: स्कूल फिर से खोलने के लिए नए दिशा-निर्देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र दुनिया के अनेक देशों में स्कूल बंद किए गए हैं जिससे बच्चों की शिक्षा, संरक्षण और स्वास्थ्य-कल्याण के लिए अभूतपूर्व जोखिम पैदा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने गुरुवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो बताते हैं कि तालाबंदी से प्रभावित एक अरब से ज़्यादा बच्चों के लिए स्कूल फिर किस तरह खोले जा सकते हैं.