स्वास्थ्य

क़रीब पाँच अरब लोग हो जाएंगे स्वास्थ्य केयर से बाहर

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि देशों ने तमाम इंसानों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में अंतर को ख़त्म करने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए तो 2030 तक लगभग 5 अरब लोगों को स्वास्थ्य देखभाल मयस्सर नहीं होगी. 

प्रसव के दौरान मौतों के मामलों में गिरावट लेकिन चुनौती बरक़रार

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों की मौतों के मामलों में पिछले दो दशकों के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन अब भी हर 11 सेकेंड में एक गर्भवती महिला या उसके शिशु की मौत होती है. अधिकांश मौतें जिन कारणों से होती हैं उनकी रोकथाम की जा सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2000 की तुलना में स्थिति में सुधार सुलभ और क़िफ़ायती स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिए संभव हो पाया है.

मरीज़ों के स्वास्थ्य की सुरक्षित देखभाल सर्वोपरि

असुरक्षित ढंग से मरीज़ों की देखरेख किए जाने की वजह से प्रति मिनट कम से कम पांच लोगों की मौत हो जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मियों, नीत-निर्धारकों, स्वास्थ्य देखरेख के काम में जुटे लोगों से मरीज़ों की समुचित तरीक़े से देखभाल करने की पुकार लगाई है ताकि इलाज कराते समय ख़तरों की रोकथाम हो सके. मंगलवार, 17 सितंबर, को ‘मरीज़ सुरक्षा दिवस’ मनाया जा रहा है.

योरोप में स्वास्थ्य असमानता की खाई पाटने की चुनौती

योरोप में स्वस्थ जीवन को सर्वजन के लिए सुलभ बनाने की दिशा में प्रगति के बाद अब इन प्रयासों में एक ठहराव का सामना करना पड़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट बताती है कि समाज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सभी के लिए सुनिश्चित करने का स्पष्ट रास्ता होने के बावजूद एक ऐसी खाई बनी हुई है जिसे पाटना मुश्किल हो रहा है.

हर 40 सेकंड में एक आत्महत्या, अब भी!

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि देशों में राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सुधारों में प्रगति होने के बावजूद हर 40 सेकंड में आत्महत्या से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है. संगठन के निदेशक ने दुनिया भर में आत्महत्याओं के अनुमानों के बारे में सोमवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए ये बात कही.

वैक्सीन में भरोसा बहाल करने के लिए फ़ेसबुक की नई पहल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘फ़ेसबुक’ की उस पहल का स्वागत किया है जिसके ज़रिए वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों और ग़लत जानकारियों के बजाय तथ्य आधारिक सूचना उपलब्ध कराई जाएगी. इसके तहत फ़ेसबुक सर्च परिणामों, ग्रुप, पेज और फॉरम पर सही जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी.

ख़सरा और रुबेला के 2023 तक ख़ात्मे का संकल्प

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्वी एशिया के क्षेत्र के सदस्य देशों ने अपने यहाँ ख़सरा और रुबेला बीमारियों को साल 2023 तक पूरी तरह से ख़त्म करने का संकल्प व्यक्त किया है. दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय समिति के नई दिल्ली में 5 सितंबर को हुए 72वें सत्र में ये संकल्प लिया गया.

यूएन प्रमुख ने चुनौतियों से घिरे डीआर कॉंगो के साथ एकजुटता दिखाई

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और यूएन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के तीन दिवसीय दौरे पर हैं जहां स्थानीय समुदाय असुरक्षा और एक बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं. अगस्त 2018 से इबोला वायरस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और अब तक दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

इबोला से मौतों का आंकड़ा चिंताजनक, रोकथाम के लिए निवेश पर ज़ोर

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वोत्तर हिस्से में वर्ष 2018 में इबोला वायरस नए सिरे से फैलना शुरू हुआ और तब से अब तक 850 बच्चे इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बताया है कि इनमें से 600 बच्चों की अब तक मौत हो चुकी है. डीआरसी के पड़ोसी देश युगांडा में एक नौ साल की बच्ची के इबोला से संक्रमित होने का नया मामला सामने आया है.

योरोप में ख़सरा का ख़तरा फिर उठा रहा है सिर

ख़सरा का ख़ात्मा करने के अभियान में योरोप पीछे छूट रहा है. योरोप के ख़सरा और रूबेला उन्मूलन पुष्टिकरण क्षेत्रीय आयोग (आरवीसी) ने गुरूवार को आगाह करते हुए कहा है कि योरोप के अनेक ऐसे देशों में जहाँ ख़सरा या तो पूरी तरह ख़त्म हो गया था या उस पर व्यापक पैमाने पर क़ाबू पा लिया गया था, वहाँ अब ये कामयाबी कमज़ोर पड़ती दिख रही है.