स्वास्थ्य

बच्चों के समुचित विकास के लिए सही नीतियों की दरकार

बच्चों के जीवन में शुरुआती वर्षों को उनके सही विकास और स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. उन वर्षों की अहमियत को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने पारिवारिक दृष्टि से अनुकूल नीतियों के लिए अनुशंसाओं की एक सूची जारी की है. यूएन एजेंसी का कहना है कि इन नीतियों को अपनाए जाने से अनेक लाभ होंगे.

इबोला बीमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी घोषित

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में घातक इबोला बीमारी के फैलने के मामले लगातार सामने आने के बाद इसे अब 'अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति' घोषित कर दिया गया है. अगस्त 2018 में ईबोला वायरस नए सिरे से फैलना शुरू हुआ जिससे दूसरी बार इतने व्यापक पैमाने पर लोग संक्रमित हो रहे हैं और अब तक वहां 1,650 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

इबोला बीमारी से प्रभावी ढंग से निपटने पर चर्चा

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला बीमारी के नए मामले सामने आने पर चिंताएं बढ़ रही हैं. अगस्त 2018 में नए सिरे से बीमारी फैलने के बाद से अब तक 1,650 लोगों की मौत हो चुकी है और हर दिन लगभग 12 नए मामलों का पता चल रहे हैं. जिनीवा में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सरकार के साथ मिलकर इस घातक बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों पर चर्चा हुई.

नौनिहालों को कुपोषण के गर्त से बचाने की ख़ातिर

"संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता व्यवस्था के पैरोकारों के रूप में हम सभी ने शून्य में ताकती आँखों को देखा है, आँखें एक ऐसे बच्चे की जिसका शरीर कुपोषण की वजह से हड्डियों ढाँचा भर रह गया है जिसमें जीवन जैसे अंतिम साँसें गिन रहा हो, उसकी धीमी गति से आती-जाती साँसों से ही बस उसके जीवित होने का  पता चलता है." ये शब्द हैं संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता के कार्यों में सक्रिय एजेंसियों के जो दुनिया भर में कुपोषण के शिकार बच्चों का हालत बयान करने के लिए व्यक्त किए हैं.

देशों के बीच और भीतर भारी असमानता मगर राहत के संकेत भी

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बहुत से देशों के बीच और देशों के भीतर विभिन्न वर्गों व समाज के ग़रीब तबकों के लोगों में भारी असमानता व्याप्त है. अनेक देशों में ग़रीबी कम करने के प्रयासों में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है. इनमें भारत, कंबोडिया और बांग्लादेश प्रमुख हैं.

ईबोला प्रभावित इलाक़े में खसरा टीकाकरण अभियान

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वोत्तर हिस्से में स्वास्थ्यकर्मियों ने बड़े पैमाने पर खसरा टीकाकरण अभियान शुरू किया है. यह वही क्षेत्र है जिसे घातक ईबोला वायरस ने अपनी जकड़ में ले रखा है और दूसरी बार इतने बड़े पैमाने पर यह बीमारी फैलने से अब तक डेढ़ हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 2019 में बड़ी संख्या में खसरा के मामले भी सामने आए हैं. 

कैंसर से लड़ने वाली अभूतपूर्व दवाएं आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आवश्यक दवाओं की सूची में अनेक नई दवाओं को शामिल करने की घोषणा की है – जिसके बाद ये दवाएं हर देश में उपलब्ध होनी चाहिए. इस सूची में नए कैंसर उपचार भी शामिल हैं जिन्हें इंजेक्शन के ज़रिए लेने की बजाय आसानी से गोली के रूप में निगला जा सकता है.

स्वाइन फ़ीवर के पैर पसारने से छोटे किसानों की मुश्किलें बढ़ी

संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (UNFAO) के अनुसार पूर्वी और दक्षिणपूर्वी एशिया के देशों में अफ़्रीकन स्वाइन बुखार तेज़ी से फैल रहा है जिससे लाखों घरों के लिए खाद्य सुरक्षा और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग भोजन और आय के लिए सुअर पालन पर निर्भर हैं.

मेडागास्कर के ग्रामीणों ने ‘खुले में शौच’ के ख़तरों को समझा

ग्रामीणों के साथ चर्चा तड़के से ही शुरू हो जाती है.  स्वयंसेवकों को चॉक से ज़मीन पर अपने गांव का नक्शा तैयार करने को कहा जाता है. एक महिला के स्कैच से पता चला कि उस गाँव में 17 परिवारों के 65 लोग कुल 11 लाल मिट्टी के घरों में रहते हैं. वह बताती हैं कि वे सभी लोग केवल तीन शौचालयों से काम चलाते हैं, जो वहां काफी समय से हैं.

आंखों की संक्रामक बीमारी ट्रेकोमा पर क़ाबू पाने में बड़ी सफलता

विश्व स्तर पर दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण ट्रेकोमा संक्रमण का जोखिम झेल रहे लोगों की संख्या में 17 वर्षों में 91 फ़ीसदी की गिरावट हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2002 में 1.5 अरब लोग ट्रेकोमा संक्रमण के ख़तरे का सामना कर रहे थे लेकिन 2019 में यह संख्या घटकर 14 करोड़ पर आ गई है.